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ऑफिस में सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत के लिए आगे क्यों नहीं आतीं महिलाएं ? ये है वजह
क्या आपको अपने वर्क प्लेस पर ऐसा कुछ याद है है जहां किसी महिला ने सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत की हो? लेकिन क्या हुआ उसके बाद? क्या उसने पहले की तरह काम करती रही? क्या उनका वेलकम किया गया और अभिवादन उनके को-वर्कर्स ने ठीक वैसी ही किया जैसे वो आम दिनों में करते थे? क्या उसने कंपनी छोड़ दी? क्या दूसरी महिलाओं ने शिकायत करने के लिए आगे आने में हिचकिचाईं किया?
कार्यालय की महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर ट्रेन और बस द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। आपने यह खबर भी सुनी होगी कि किसी ने आपके साथ या आपके किसी जानने वाले के साथ यौन उत्पीड़न के बारे में साझा किया। कई महिलाएं अपने करीबी या कुछ को केवल तभी बताएंगी जब कार्यालय में उनके बॉस या सहकर्मी द्वारा उनका यौन उत्पीड़न किया गया हो। वुमेंस इंडियन चैंबर ऑफ कमर्स एंड इंडस्ट्री (Women's Indian Chamber of Commerce and Industry) के सर्वे से पता चलता है कि देश की 68.7 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने कभी यौन उत्पीड़न को लेकर शिकायत किसी से नहीं की है।

क्या है यौन उत्पीड़न ?
कानून के अनुसार, सेक्सुअल हरासमेंट न केवल अनवॉन्टेंड फिजिकल कॉन्टेक्ट है, बल्कि आदमी के आचरण और विमेन कुलिग के साथ विहेवियर भी बताता है। झूठी/मलिश्यस शिकायतों के क्लासिफिकेशन के बारे में 46.2 फीसदी आईसी/एलसी मेंबर्स ने कहा कि इस तरह के क्लासिफिकेशन महिलाओं को अपनी शिकायतों के साथ आगे आने से रोकते हैं।
'Safe Places to Work' Survey सर्वे-
वहीं 'Safe Places to Work' Survey के अनुसार, 27 प्रतिशत महिलाएं रोज ही किसी न किसी रूप में यौन उत्पीड़न का सामना करती हैं। इस सर्वे में शामिल महिलाओं और लड़कियों ने बताया कि महीने के कम से कम 3 दिनों में एक बार यौन उत्पीड़न का अनुभव किया है।
मुश्किलें कंप्लेन करने के बाद आती हैं-
महिलओं का कहना है शिकायत करना मुश्किल नहीं होता है। मुश्किलें कंप्लेन करने के बाद आती हैं द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र में इस बात को उजागर किया गया है लगभग 80% महिलाएं अपने ऑफिस या वर्क प्लेस पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ नीतियों से अवगत थीं। हालांकि, लगभग 30 फीसदी विमेन वर्कर्स अभी भी ऐसी घटनाओं के बारे में इंटरनल कमिटी से शिकायत नहीं करती हैं या करने में हिचकिचाती हैं। इसके अलावा, सर्वे में शामिल आधे से अधिक महिलाओं ने उसी स्थान पर काम करना जारी रखा जहां पर उनका सेक्सुअल हरासमेंट हुआ था।

महिलाओं के सामने आने के बाद असल में क्या होता है?
प्रतिशोध (महिलओं से संबंधित दोस्तो, परिवार, आय की हानि)
बदला या प्रताड़ना के डर से ज्यादातर महिलाएं अपनी कम्पेंन दर्ज करने से बचती हैं। ये बदली कई रूपों में हो सकता है। वर्क प्लेस पर उन्हें महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट से हटा देना और असाइनमेंट नहीं देना हो सकता है। उन्हें बिना किसी काम के जस्टिफिकेशन के, आवश्यकता से पहले रिपोर्ट करने और ऑफिस में देर से रुकने के लिए भी कहा जा सकता है। एक्ट्रीम केसेज़ में, उन्हें संगठन छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
को-वर्कर्स का खराब बिहेवियर
इसके अलावा, महिलाएं भी अपने कलिग्स के बुरे व्यवहार के कारण अलग-थलग महसूस करती हैं, क्योंकि 'वे किसी झंझट में नहीं पड़ना चाहतीं।

'सेक्सुअल हरासमेंट प्रीवेंन्शन में समय लगता है
एक अन्य वजह ये भी है कि जब महिलाएं ऐसी घटनाओं से गुजरती हैं; कई जांच और प्रक्रियाओं से उन्हें गुजरना पड़ता है। उनका अधिकांश समय शिकायतों की कार्यवाही करवानें मे ही बीत जाता है।

यौन उत्पीड़न अधिनियम
साल 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम पारित किया गया था। जिन संस्थाओं में दस से अधिक ज्यादा लोग काम करते हैं, उन पर ये अधिनियम लागू होता है। बता दें कि ये अधिनियम, 9 दिसम्बर, 2013, में प्रभाव में आया था। इसका उद्देश्य रोकथाम, पॉबिशन एंड रिडरेस को क्लियर करना है। उल्लंघन के मामले में पीड़ित को सहायता प्रदान करने के लिये भी ये काम करता है।



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