Magh Mela 2023: नागा साधुओं की होती है बेहद रहस्यमयी दुनिया, इन गुप्त बातों को नहीं जानते होंगे आप

माघ मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में शुरू हो चुका है। संगम नगरी में माघ पूर्णिमा के दिन स्नान की शुरूआत गई हैं। इस डेढ़ महीने तक चलने वाले माघ मेले में नागा साधु, जो सालो-साल नजर नहीं आते, लेकिन इन दिनों संगम पर स्नान करने के लिए आ रहे हैं। नागा साधु काफी रहस्य से भरे हुए होते हैं। वे ज्यादा दूसरों से घुलते-मिलते नहीं है। नागा साधु अपने कार्य कलापों में व्यस्त रहते हैं। यहां पर हम नागा साधुओं के बारें में कुछ अनजाने रहस्यों के बारें में बात करेंगे, जो आम लोगों को नहीं पता होते हैं। नागा साधु आजीवन नग्नाव्स्था में ही रहते हैं। लेकिन इन सर्दी में भी वो अपने आप को किस तरह से जिंदा रखते हैं, ये उनके एक रहस्य वाली बात है, क्योंकि नागा साधु हिमालय पर भी वास करते हैं, और वहां भी वो नग्नावस्था में भी रहते हैं।

नागा साधुओं की उत्पत्ति मोहनजोड़ने के समय से

नागा साधुओं की उत्पत्ति मोहनजोड़ने के समय से

संस्कृत में नागा का मतलब पहाड़ होता है। नागा पहाड़ों में रहने वाले लोगों को पहाड़ी कहा जाता है नागा साधुओं का इतिहास मोहनजोदड़ो से है, उस दौरान के सिक्कों पर वो दिखाई दिये हैं। नागा साधुओं की तपस्या काफी कठिन होती है। हिंदू संरचनाएं, उस समय, नागा साधुओं द्वारा बड़े पैमाने पर अभ्यास किया जाता था।

नागा साधु इस दिन से हो जाते हैं नग्न

नागा साधु इस दिन से हो जाते हैं नग्न

नागा साधु बनने की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है। नागा साधु बनने में लगभग 12 सालों का समय लगता है। इन 12 सालों में 6 साल नागा पंथ में शामिल होने के जरूरी अनुष्ठान करते हैं। इस दौरान नागा साधु सिर्फ लंगोट पहनते हैं। इसके बाद कुंभ के मेले में प्रण लेने के बाद वो लंगोट को त्याग देते हैं और आजीवन नग्न रहते हैं।

नागा साधु खुद का करते हैं पिंडदान

नागा साधु खुद का करते हैं पिंडदान

नागा साधु बनने की प्रक्रिया बहुत ही कठिन होती है। वे खुद का खुद से ही पिंडदान करते हैं जिसे बिजवान कहा जाता है।

जुना अखाड़े में सबसे ज्यादा नागा साधु

जुना अखाड़े में सबसे ज्यादा नागा साधु

सबसे अधिक नागा साधु जुना अखाड़े में हैं। लेकिन नागा साधु बनने की दिक्षा सिर्फ शैव अखाड़ा ही देता है। नागा साधुओं में वैष्णव, शैव और उदासीन अखाड़े हैं। इन तीनों अखाड़े के साधु, नागा साधु बनते हैं।

महिला नागा साधुओं को इस बात की नहीं होती इजाजत

महिला नागा साधुओं को इस बात की नहीं होती इजाजत

पुरुष नागा साधु आजीवन नग्न रहते हैं, लेकिन महिला नागा साधुओं को नग्न होने की इजाजत नही है। महिला नागा वस्त्र पहनती है। लेकिन महिलाओँ को अपने मस्तक पर तिलक लगाना जरूरी होता है। महिला नागा साधु सिर्फ गेरुआ रंग का कपड़ा पहनती है।

सिर्फ कुंभ में भी बना जा सकता है नागा साधु

सिर्फ कुंभ में भी बना जा सकता है नागा साधु

वर्ण व्यवस्था से ऊपर है नागा साधु बनना, जिसमें ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय और शूद्र भगवान की सेवा के लिए आगे आते हैं। नागा साधु बनने के लिए कोई बंदिश नहीं है, शर्त सिर्फ ये है कि वो नागा साधु बनने की प्रक्रिया और सहने को तैयार नागा स्थिति प्राप्त करने के लिए गहन तपस्या के लिए तैयार हो।

सिर्फ कुंभ के दौरान ही कोई नागा साधु बन सकता है।

(डिस्क्लेमर-यहां बताई गईं जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है।)

Story first published: Monday, January 9, 2023, 14:03 [IST]
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