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Bhavina Patel: जानें व्हीलचेयर से पैरालंपिक मेडल का सफर तय करने वाली भाविना पटेल के बारे में
टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक खेलों में भारत को अपना पहला पदक प्राप्त हो चुका है। भारत की भाविना पटेल ने टेबल टेनिस में रजत पदक अपने नाम करके पहली बार देश के लिए पैरालम्पिक टेबल टेनिस क्लास 4 में पदक जीता। फाइनल मैच में भाविना को चीनी खिलाड़ी झाउ यिंग के हाथों 11-7, 11- 5, 11-6 से हार का सामना करना पड़ा। रजत पदक की जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति कोविंद ने उन्हें बधाई देते हुए ट्वीट किए। पैरालम्पिक में पदक जीतने तक भाविना पटेल का सफर बेहद संघर्षमयी रहा है, जिससे आज पूरा देश प्रेरणा ले रहा है।

बचपन में ही हो गई थीं पोलियो का शिकार
34 साल की भाविना गुजरात के मेहसाणा की रहने वाली हैं। जब वे एक साल की हुईं तब उन्हें पोलियो हो गया, उस वक़्त पैसों की कमी के कारण उनका इलाज नहीं हो पाया। 4 साल की उम्र में उनकी एक सर्जरी हुई पर वो भी असफल रही। इसके बाद उन्हें व्हीलचेयर को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना पड़ा।

टेबल टेनिस की शुरुआत
भाविना ने शौकिया तौर पर टेबल टेनिस खेलना शुरू किया था। अहमदाबाद में आईटीआई से कंप्यूटर साइंस कोर्स करने के दौरान पनपे इस शौक को उन्होंने गंभीरता से लेना शुरू किया। ट्रेनिंग के लिए उन्हें ऑटो और बसों के सहारे जाना पड़ता था, जो उनके लिए काफी मुश्किल भरा था। इन्हीं यात्राओं के दौरान ही वे अपने पति निकुल पटेल से मिलीं जो बताते हैं कि भाविना को देश विदेश में यात्राओं के दौरान अभी भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

2011 में थाईलैंड में टूर्नामेंट जीतने से मिली पहचान
साल 2011 में भाविना ने पीटीटी थाईलैंड टेबल टेनिस चैंपियनशिप जीतकर अपने करियर की पहली बड़ी सफलता पाई। इसके बाद उन्हें देश भर में पहचान मिली। अक्टूबर 2013 में बीजिंग एशियन पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं के सिंगल्स क्लास 4 इवेंट का रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। साल 2017 के एशियन पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भी भाविना ने कांस्य पदक अपने नाम किया था।
रिओ पैरालम्पिक में वो क्वालीफाई करने में नाकाम रही थीं पर टोक्यो पैरालम्पिक में उन्होंने रजत पदक अपने नाम करके सभी को दिखा दिया कि कड़ी मेहनत और अपनी काबिलियत पर विश्वास रखकर हम सफलता की नई ऊंचाईयों को छू सकते हैं।



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