हार से जीत की इबारत लिखने का हुनर है पीवी सिंधु के पास, जानें उनकी कुछ अनसुनी बातें

पी वी सिंधु किसी पहचान की मोहताज नहीं है। पुसरला वेंकट सिंधु, जो पी वी सिंधु के नाम से हर घर में मशहूर है। इस भारतीय महिला खिलाड़ी को बैडमिंटन को नयी ऊंचाई तक ले जाने का श्रेय दिया जाता है।

छोटी सी उम्र में ही इस खेल के प्रति उनकी रूचि और कड़ी मेहनत ने इन्हें बैडमिंटन के दिग्गज खिलाडियों के साथ लाकर खड़ा कर दिया है। मगर सिंधु के लिए ये सफर आसान नहीं था।

world badminton championship winner pv sindhu intresting and unknown facts

अपने उम्र की दूसरी लड़कियों की तुलना में ये अपना जीवन बहुत नियम और अनुशासन के साथ बिताती हैं। वो आज जिस मकाम में हैं इसके पीछे उनका कितना समर्पण और त्याग है इसकी हम सिर्फ कल्पना कर सकते हैं। 5 जुलाई 1995 में जन्मी सिंधु के करियर से जुड़ी कुछ ख़ास बातें जानते हैं।

वर्ल्ड चैम्पियनशिप के फाइनल का जिक्र है जरूरी

वर्ल्ड चैम्पियनशिप के फाइनल का जिक्र है जरूरी

25 अगस्त 2019 का दिन बैडमिंटन प्रेमियों के लिए बेहद खास रहा। भारत की शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ना सिर्फ भारत की उम्मीदों पर खरी उतरी बल्कि सालों से देशवासियों के इंतजार पर विराम लगाते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप के फाइनल में जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर, पीवी सिंधु ये कारनाम करने वालो भारत की पहली खिलाड़ी बन गयी।

सिंधु और उनकी चिर प्रतिद्वंदी ओकुहारा के बीच फाइनल का मुकाबला 37 मिनट तक चला। ये लगातार तीसरा मौका था जब सिंधु इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में देश के लिए मेडल लाने में कामयाब रही हो। लेकिन स्वर्ण पदक का स्वाद चखने के लिए उन्हें 2019 तक का इंतजार करना पड़ा। गौरतलब है कि इससे पहले 2017 और 2018 में रजत तथा 2013 व 2014 में कांस्य पदक जीत चुकीं हैं। सिंधु ने इस मुकाबले में ओकुहारा को कोई मौका नहीं दिया। पूरे मैच के दौरान भारतीय शटलर ने अपना दबदबा कायम रखा और ये एकतरफा मुकाबला 21-7, 21-7 से अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही सिंधु ने ओकुहारा के खिलाफ अपना करियर रिकॉर्ड 9-7 कर लिया है। सिंधु ने ये गोल्ड मेडल अपनी मां को समर्पित किया।

24 साल की उम्र में जीता वर्ल्ड चैम्पियनशिप का स्वर्ण

24 साल की उम्र में जीता वर्ल्ड चैम्पियनशिप का स्वर्ण

पीवी सिंधु का पूरा नाम पुसरला वेंकट सिंधु है। उनका जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में हुआ था।

माता पिता भी रहे खिलाड़ी

माता पिता भी रहे खिलाड़ी

पीवी सिंधु ही नहीं बल्कि उनके पिता पीवी रमना भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं लेकिन वो वॉलीबॉल के खिलाड़ी थे। सिंधु अपने पिता को ही अपना आदर्श मानती है। पीवी रमना को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। सिंधु की मां पी विजया भी वॉलीबॉल की खिलाड़ी रह चुकी हैं।

ट्रेनिंग के लिए करती हैं 56 किलोमीटर का सफर

ट्रेनिंग के लिए करती हैं 56 किलोमीटर का सफर

सिंधु के घर से बैडमिंटन अकेडमी की दूरी लगभग 56 किलोमीटर है लेकिन बुलंद इरादों वाली इस खिलाड़ी ने कभी इसे आड़े नहीं आने दिया। वो रोज समय पर अपनी प्रैक्टिस के लिए अकेडमी पहुंचती है। ये खेल के प्रति उनकी दीवानगी का सबूत है।

8 साल की उम्र में ही थम लिया था बैडमिंटन रैकेट

8 साल की उम्र में ही थम लिया था बैडमिंटन रैकेट

पीवी सिंधु ने आठ साल की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। बहुत कम लोगों को जानकारी है कि सिंधु ने इस खेल की बुनियादी जानकारी महबूब अली से ली थी। इसके बाद उन्होंने पुलेला गोपीचंद की सरपरस्ती में अपने हुनर को तराशा।

ओलंपिक में बढ़ा चुकी हैं देश का मान

ओलंपिक में बढ़ा चुकी हैं देश का मान

रियो ओलंपिक के महिला एकल बैडमिंटन मुकाबले में पीवी सिंधु ने रजत (सिल्वर) मेडल जीता था। वो ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं।

मिल चुके हैं ये सम्मान

मिल चुके हैं ये सम्मान

पीवी सिंधु को 2013 में अर्जुन अवार्ड और 2015 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। साल 2016 में सिंधु को राजीव गांधी खेल रत्न के लिए उन्हें चुना गया।

ये हैं सिंधु के पसंदीदा खिलाड़ी और एक्टर्स

ये हैं सिंधु के पसंदीदा खिलाड़ी और एक्टर्स

एक इंटरव्यू में सिंधु बता चुकी हैं कि उन्हें चीन के शीर्ष खिलाड़ी लीन-डेन पसंद हैं। उन्होंने अपना पसंदीदा अभिनेता रणबीर सिंह और अदकारा दीपिका पादुकोण को बताया।

Desktop Bottom Promotion