Latest Updates
-
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया
क्या जानवरों से इंसानों में भी फैल सकता है लंपी वायरस ? संकेत, लक्षण और रोकथाम
लंपी त्वचा रोग (गांठदार त्वचा रोग) एक वायरल बीमारी है जो मवेशियों को प्रभावित कर रही है। इसके साथ ही ये बेहद संक्रामक है। केंद्र के अनुसार, इससे देशभर में अब तक करीब 57,000 मवेशियों की मौत हो चुकी है। वहीं अब तक 15.21 लाख से अधिक मवेशी इससे प्रभावित हैं। ये रोग मवेशियों के पूरे शरीर में फैल सकता है। भारत के आठ से अधिक राज्यों- गुजरात, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान में इस बीमारी से हजारों मवेशियों की मौत हो चुकी है। गुजरात, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली सहित कम से कम सात राज्यों ने मामले दर्ज किए हैं। ये मवेशियों की मौत के अलावा दूध उत्पादन में कमी, विकास में रुकावट, बांझपन और गर्भपात भी इससे हो जाता है।

इसके क्या कारण हैं?
लंपी त्वचा रोग (एलएसडी) मवेशियों और भैंसों का एक वायरल रोग है जो कैप्रीपॉक्स वायरस की वजह से होता है। ये खून पीने वाले कीड़ों, जैसे मक्खियों और मच्छरों की कुछ प्रजातियों, या टिक्स द्वारा स्प्रेड होता है। इसमें बुखार, और त्वचा पर गांठ बनती जाती है। और इससे मृत्यु भी हो सकती है।

क्या जोखिम बढ़ाता है?
इस बीमारी को कोई इलाज अब तक नहीं मिल पाया है। एक बार संक्रमण फैल जाता है रोकना मुश्किल है। इसके अलावा वैक्सीन की कमी से भी खतरा बढ़ सकता है।

इस बीमारी के लक्षण
जो जानवर इस बीमारी से संक्रमित होते हैं उनमें निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं-
1.शरीर पर छाले
2.वजन में कमी
3.अतिरिक्त लार
4.शरीर के कुछ अंगों जैसे आंख और नाक से स्त्राव होना
5.बुखार
6.खाने में परेशानी
क्या इस प्रसार को रोका जा सकता हैं ?
1.मूवमेंट कंट्रोल
2.टीकाकरण
3.प्रबंधन रणनीतियां
4.वध अभियान
लंपी रोग के खिलाफ टीकाकरण की अब तक कम से कम 97 लाख खुराकें दी जा चुकी हैं। वायरल बीमारी से लगभग 80,000 मवेशी ठीक हो चुके हैं। कृषि अनुसंधान निकाय आईसीएआर के दो संस्थानों द्वारा विकसित एलएसडी के लिए एक नई वैक्सीन लंपी-प्रोवैकइंड के कमर्शियल लॉन्च में अगले तीन-चार महीने लगेंगे। स्वैन के अनुसार, बकरी पॉक्स का टीका 100 प्रतिशत प्रभावी है और पहले ही 1.5 करोड़ खुराक प्रभावित राज्यों में प्रशासित किया जा चुका है।

क्या बीमारियां इंसानों को प्रभावित कर सकती हैं?
नहीं, यह रोग जूनोटिक नहीं है, जिसका मतलब है कि इंसानों में वायरल संक्रमण को कॉन्ट्रेक्टेड नहीं कर सकते क्योंकि ये जानवरों से इंसानो में स्थानांतरित नहीं होती है। इसलिए, मवेशियों से खरीदे गए उत्पादों पर इसके प्रभावों के अलावा मामले में ये वृद्धि ज्यादा चिंता का विषय नहीं हो सकती है।



Click it and Unblock the Notifications