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Mahakumbh 2025: 1896 को पैदा हुए और 100 साल से हर कुंभ में हो रहे शामिल, जानें कौन हैं स्वामी शिवानंद सरस्वती?
Who is 129 yr old swami sivananda baba: महाकुंभ 2025 की शुरुआत 13 जनवरी से शुरु हो चुकी है और इसके साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं, संतों और साधुओं का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। इन्हें में से एक 128 वर्षीय स्वामी शिवानंद सरस्वती, अपनी सरल जीवनशैली और गहन दर्शन से प्रयागराज में सबको मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। वे पिछले 100 वर्षों से हर कुंभ मेले में हिस्सा ले रहे हैं और पवित्र स्नान कर रहे हैं।
स्वामी शिवानंद का सादगीपूर्ण जीवन, योग और तपस्या पर आधारित है, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महाकुंभ के इस भव्य आयोजन में उनकी उपस्थिति न केवल विशेष है, बल्कि यह आध्यात्मिकता और परंपरा का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

100 वर्षों से कुंभ मेले में ले रहे हैं भाग
स्वामी शिवानंद की शिष्याओं में से एक, शर्मिला सिन्हा ने बताया कि स्वामी शिवानंद पिछले 100 वर्षों से कुंभ मेले में भाग ले रहे हैं और हर बार पवित्र स्नान करते हैं। शर्मिला ने कहा, "मैं बाबा को बचपन से जानती हूं। उनकी जीवनशैली बहुत साधारण है, वे सभी को प्रणाम करते हैं और किसी सांसारिक चीज़ से परहेज़ करते हैं। बाबा ने कभी दान नहीं लिया और न ही किसी से पैसे लिए। 1977 तक उन्होंने पैसे को हाथ नहीं लगाया था।"
उबला हुआ खाना खाते हैं बाबा
स्वामी शिवानंद बाबा उबला हुआ खाना खाते हैं, जिसमें न तो तेल होता है और न ही नमक। उन्होंने बताया कि वह किसी से दान नहीं लेते। बाबा वाराणसी के कबीर नगर, दुर्गाकुंड में रहते हैं और कुंभ मेला समाप्त होने के बाद वापस बनारस लौट जाएंगे। अपने संदेश में, बाबा ने युवा पीढ़ी को सलाह दी कि वे सुबह जल्दी उठकर आधा घंटा योग करें, संतुलित जीवनशैली अपनाएं, और स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन टहलें।
गरीबी में बीता जीवन
स्वामी शिवानंद बाबा का बचपन बहुत कठिनाइयों में बीता। उनके शिष्य के अनुसार, उनका परिवार बेहद गरीब था और उनके घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं होता था। बचपन में, बाबा के माता-पिता उन्हें गांव में आने वाले संतों को दे देते थे, जिससे उनका पेट भरता था। जब वह चार साल के हुए, उन्हें संत ओंकारानंद गोस्वामी के पास भेज दिया गया। छह साल की उम्र में, भूख के कारण उनकी बहन की मौत हो गई। जब बाबा घर लौटे, तो एक सप्ताह बाद उनके माता-पिता की भी भूख के कारण मृत्यु हो गई। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। इस दर्दनाक घटना ने बाबा पर गहरा असर डाला, और तब से उन्होंने कभी भी भरपेट खाना नहीं खाया।
चमत्कारी घटना से जब भक्त रह गया हैरान
स्वामी शिवानंद बाबा ने एक घटना साझा की, जब एक भक्त उनसे मिलने आया और भूखा था। बाबा ने उसे मिट्टी के बर्तन में खीर दी, लेकिन भक्त को वह खीर कम लगी और उसने शिकायत की। जब उसने खीर खाना शुरू किया, तो उसका पेट भर गया, लेकिन खीर खत्म नहीं हुई। इस चमत्कारी घटना से भक्त हैरान हो गया और बाबा के चरणों में गिर पड़ा। 21 मार्च 2022 को, बाबा शिवानंद को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया।



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