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National Handloom Day: जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडू तक, जानें भारत में किस राज्य का कौन सा हथकरघा उत्पाद है मशहूर
National Handloom Day 2026: भारत की पारंपरिक बुनाई कला सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। देश के अलग-अलग राज्यों में आज भी लाखों बुनकर हाथों से ऐसे वस्त्र तैयार करते हैं, जिनकी पहचान केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में है। इन्हीं कारीगरों और हथकरघा उद्योग के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय हथकरघा परंपरा को बढ़ावा देने, बुनकरों के काम को पहचान दिलाने और लोगों को स्वदेशी वस्त्रों के महत्व से जोड़ने का अवसर भी माना जाता है। आइए, जानते हैं राष्ट्रीय हथकरघा दिवस क्यों मनाया जाता है और देश के अलग-अलग राज्यों के प्रसिद्ध हथकरघा उत्पाद -

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस क्यों मनाया जाता है?
7 अगस्त का संबंध 1905 के स्वदेशी आंदोलन से माना जाता है, जब विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का अभियान शुरू हुआ था। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस तारीख को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में चुना गया। इसका उद्देश्य भारतीय हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देना और लोगों को हाथ से बने स्वदेशी वस्त्रों के प्रति जागरूक करना है।
अलग-अलग राज्यों के प्रसिद्ध हथकरघा उत्पाद
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल की जामदानी साड़ी अपनी बेहद महीन बुनाई और कलात्मक डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है। इसे हल्के मलमल के कपड़े पर तैयार किया जाता है। इसके अलावा तांत, गरद और कोरियल साड़ियां भी राज्य की पारंपरिक हथकरघा विरासत का अहम हिस्सा हैं।
तमिलनाडु
तमिलनाडु की कांचीपुरम (कांजीवरम) सिल्क साड़ी देश की सबसे प्रसिद्ध रेशमी साड़ियों में गिनी जाती है। शुद्ध रेशम, चौड़े बॉर्डर और जरी की शानदार बुनाई इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
गुजरात
गुजरात की बांधनी (बंधेज) कला रंग-बिरंगे पैटर्न और पारंपरिक टाई-एंड-डाई तकनीक के लिए जानी जाती है। वहीं घरचोला साड़ी भी यहां की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है, जिसे खासतौर पर शादी-विवाह के अवसरों पर पहना जाता है।
ओडिशा
ओडिशा की संबलपुरी इकत बुनाई अपनी अनोखी तकनीक के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसमें धागों को पहले रंगा जाता है और उसके बाद कपड़ा बुना जाता है, जिससे आकर्षक डिज़ाइन तैयार होते हैं।
असम
असम का मुगा सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक और मजबूती के लिए मशहूर है। इसके अलावा यहां की पारंपरिक मेखला-चादर भी महिलाओं का प्रमुख परिधान है, जिसे हाथों से बुना जाता है।
कर्नाटक
कर्नाटक का मैसूर सिल्क अपनी मुलायम बनावट, शुद्ध रेशम और सुनहरी जरी वाले बॉर्डर के लिए प्रसिद्ध है। यह राज्य के सबसे लोकप्रिय हथकरघा उत्पादों में शामिल है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की पैठानी साड़ी अपनी रंगीन बुनाई और मोर, कमल जैसे पारंपरिक डिजाइनों के लिए जानी जाती है। इसे रेशम और जरी के धागों से तैयार किया जाता है।
राजस्थान
राजस्थान की शीशा कढ़ाई (मिरर वर्क) दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है। रंग-बिरंगे कपड़ों पर छोटे-छोटे शीशों और धागों से की गई कढ़ाई इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
पंजाब
पंजाब की फुलकारी कढ़ाई पारंपरिक हस्तशिल्प का बेहतरीन उदाहरण है। इसमें कपड़ों पर रंगीन धागों से फूल और ज्यामितीय आकृतियां बनाई जाती हैं।
हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश की कुल्लू शॉल अपनी गर्माहट और पारंपरिक ज्यामितीय डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हें स्थानीय बुनकर हाथों से तैयार करते हैं।
जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर की पश्मीना शॉल दुनिया की सबसे बेहतरीन ऊनी शॉलों में गिनी जाती है। इसकी मुलायम बनावट, महीन कढ़ाई और गर्माहट इसे खास बनाती है।
उत्तराखंड
उत्तराखंड का पिछौड़ा यहां की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान है। इसे विशेष रूप से विवाहित महिलाएं शुभ अवसरों पर धारण करती हैं। पीले और लाल रंग के इस परिधान पर स्वास्तिक, सूर्य और शंख जैसे मांगलिक प्रतीक बनाए जाते हैं।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी शानदार जरी की बुनाई और पारंपरिक डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है। वाराणसी में तैयार होने वाली इन साड़ियों पर सोने-चांदी के धागों से महीन कारीगरी की जाती है। शादी और अन्य शुभ अवसरों पर बनारसी साड़ी को विशेष महत्व दिया जाता है।
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश की उप्पडा सिल्क साड़ी अपनी हल्की बनावट और आकर्षक हाथ की बुनाई के लिए जानी जाती है। इसे बिना भारी जरी के भी बेहद खूबसूरत डिजाइनों में तैयार किया जाता है, इसलिए यह पहनने में आरामदायक होने के साथ-साथ बेहद आकर्षक भी होती है।
तेलंगाना
तेलंगाना की पोचमपल्ली इकत बुनाई अपनी अनोखी टाई-एंड-डाई तकनीक के लिए प्रसिद्ध है। इसमें धागों को पहले रंगा जाता है और फिर उन्हें विशेष तरीके से बुनकर ज्यामितीय डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं। इस कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश की चंदेरी और महेश्वरी साड़ियां हथकरघा उद्योग की खास पहचान हैं। चंदेरी साड़ियां अपनी हल्की बनावट और महीन बुनाई के लिए मशहूर हैं, जबकि महेश्वरी साड़ियों में पारंपरिक बॉर्डर और आकर्षक रंगों का सुंदर मेल देखने को मिलता है।
बिहार
बिहार का भागलपुरी सिल्क देश के सबसे पुराने रेशमी वस्त्रों में गिना जाता है। भागलपुर में तैयार होने वाला यह सिल्क अपने प्राकृतिक चमकदार कपड़े और टिकाऊ गुणवत्ता के कारण काफी लोकप्रिय है। इससे साड़ी के अलावा दुपट्टे, स्टोल और अन्य परिधान भी बनाए जाते हैं।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी आभा और मजबूत बनावट के लिए जाना जाता है। यह रेशम मुख्य रूप से राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में तैयार किया जाता है और इससे बनी साड़ियां, कुर्ते तथा अन्य पारंपरिक वस्त्र काफी पसंद किए जाते हैं।
केरल
केरल की कसावु साड़ी अपनी सादगी और पारंपरिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। सफेद या ऑफ-व्हाइट रंग की इस साड़ी पर सुनहरे जरी का बॉर्डर इसकी सबसे बड़ी पहचान है। ओणम, विषु और अन्य पारंपरिक त्योहारों के दौरान महिलाएं इसे विशेष रूप से पहनती हैं।



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