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कोर्ट-कचहरी के मामलों से छुटकारा दिलाता है हिमाचल प्रदेश का ये मंदिर, इंदिरा गांधी तक करवा चुकी हैं पूजा
Himachal Pradesh's Famous Baglamukhi Temple : हिमाचल प्रदेश की भूमि को देवभूमि कहा जाता है। यहां कई चमत्कारी मंदिर मौजूद है, जहां दर्शन मात्र से ही हर बिगड़े काम बन जाते हैं। कुछ मंदिर तो इतने प्रसिद्ध है कि कहा जाता है कि जो भी भक्त इन मंदिरों में दर्शन के लिए आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उसके जीवन के सभी संकट और विपत्तियां दूर हो जाती हैं।
यही नहीं, इन मंदिरों में पूजा-अर्चना करने से कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी राहत मिलती है। ऐसा ही एक मंदिर है मां बगलामुखी मंदिर का, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामले जल्द ही सुलझ जाते हैं। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति का कोर्ट केस लंबे समय से अटका हुआ है, तो उसे मां बगलामुखी के दर्शन करने चाहिए। चलिए जानते हैं आखिर ये सिद्धिपीठ कहां स्थित है?

पितांबरी देवी के नाम से है विख्यात
मां बगलामुखी को पितांबरी देवी के नाम से भी जाना जाता है। कांगड़ा जिले में स्थित यह मंदिर लाखों भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां बगलामुखी का स्वरूप वैसा ही है जैसा प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है। माना जाता है कि मां हल्दी के पीले जल से प्रकट हुई थीं, जिसके कारण उन्हें पितांबरा देवी भी कहा जाता है। पीला रंग मां को अत्यंत प्रिय है, इसलिए यहां की पूजा में पीली सामग्री का ही विशेष महत्व है।
इस मंदिर को लेकर प्रचलित मान्यता
ऐसा माना जाता है कि बगलामुखी मंदिर में पूजा करने से शत्रुओं की शक्ति कमजोर हो जाती है और वे असहाय हो जाते हैं। इस मंदिर में की जाने वाली पूजा विशेष रूप से कानूनी मामलों में विजय प्राप्त करने के लिए बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। भक्त यहां घरेलू कलह, अदालती समस्याएं, जमीन-जायदाद से जुड़ी मुश्किलें और कमजोर ग्रह की शांति के लिए आते हैं और पंडितों से शांति यज्ञ या उपायों का सुझाव लेते हैं।
नेता-अभिनेता है इस मंदिर में कर चुके हैं दर्शन
मां बगलामुखी के भक्तों में नेता से लेकर अभिनेता तक का नाम शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, सांसद अमर सिंह, जया प्रदा, जगदीश टाइटलर, भूपेंद्र हुड्डा, नादिरा बब्बर, बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा, गुरदास मान, शिल्पा शेट्टी, राज कुंद्रा, कपिल शर्मा, कंगना रानौत, एकता कपूर और सनी देओल जैसे नाम शामिल हैं। ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदर सिंह बिट्टा ने मां के सामने अपने जीवन पर एक बायोपिक बनाने मनोकामना की थी, और अगले ही महीने अभिनेता अक्षय कुमार ने इस पर फिल्म बनाने की घोषणा की। मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंदर जुगनाथ भी अपनी पत्नी के साथ मां बगलामुखी के इस पवित्र स्थल पर तांत्रिक पूजा और हवन कर चुके हैं।
यहां किया जाता है लाल मिर्च का हवन
भक्त यहां अपने संकटों को दूर करने के लिए लाल मिर्च का हवन करते हैं। अगर आपने ध्यान दिया हो तो हवन में आहुति दाएं (सीधे) हाथ से दी जाती है, मगर इस मंदिर में विशिष्ट मान्यता के चलते आहुति बाएं (उल्टे) हाथ से दी जाती है, जो इसे खास बनाती है।
सत्ता में वापसी के लिए इंदिरा गांधी ने कराई थी यहां पूजा
भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी मां बगलामुखी के दर पर शीश नवाया था। 1977 में चुनावी हार के बाद, उन्होंने यहां तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था। मां बगलामुखी की कृपा से इंदिरा गांधी ने 1980 में सत्ता में जोरदार वापसी की और एक बार फिर देश की प्रधानमंत्री बनीं।
मां बगलामुखी की उत्पति की कथा
एक पौराणिक कथा के मुताबिक जब ब्रह्मा जी का एक ग्रंथ एक राक्षस द्वारा चुरा लिया गया। राक्षस ने ग्रंथ चुराने के बाद पाताल में जाकर छिप गया। इस राक्षस को वरदान प्राप्त था कि मानव और देवता उसे पानी में नहीं मार सकते। इस स्थिति को देखते हुए, भगवान ब्रह्मा ने मां भगवती का जाप किया, जिसके परिणामस्वरूप मां बगलामुखी का अवतार हुआ।
मां बगलामुखी ने बगुला का रूप धारण कर राक्षस का वध किया और भगवान ब्रह्मा को उनका ग्रंथ वापस लौटा दिया।
मान्यतानुसार रावण ने भी मां बगलामुखी को अपनी इष्ट देवी के रूप में पूजा किया। पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान मां बगलामुखी का मंदिर बनवाया और वहां पूजा-अर्चना की थी। इस प्रकार द्धापर युग से लेकर कलयुग तक मां बगलामुखी शत्रुओं का नाश करने वाली मानी जाती हैं। सत्ता में वापसी के लिए इंदिरा गांधी ने कराई थी यहां पूजा
भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी मां बगलामुखी के दर पर शीश नवाया था। 1977 में चुनावी हार के बाद, उन्होंने यहां तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था। मां बगलामुखी की कृपा से इंदिरा गांधी ने 1980 में सत्ता में जोरदार वापसी की और एक बार फिर देश की प्रधानमंत्री बनीं।
मां बगलामुखी की उत्पति की कथा
एक पौराणिक कथा के मुताबिक जब ब्रह्मा जी का एक ग्रंथ एक राक्षस द्वारा चुरा लिया गया। राक्षस ने ग्रंथ चुराने के बाद पाताल में जाकर छिप गया। इस राक्षस को वरदान प्राप्त था कि मानव और देवता उसे पानी में नहीं मार सकते। इस स्थिति को देखते हुए, भगवान ब्रह्मा ने मां भगवती का जाप किया, जिसके परिणामस्वरूप मां बगलामुखी का अवतार हुआ।
मां बगलामुखी ने बगुला का रूप धारण कर राक्षस का वध किया और भगवान ब्रह्मा को उनका ग्रंथ वापस लौटा दिया।
मान्यतानुसार रावण ने भी मां बगलामुखी को अपनी इष्ट देवी के रूप में पूजा किया। पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान मां बगलामुखी का मंदिर बनवाया और वहां पूजा-अर्चना की थी। इस प्रकार द्धापर युग से लेकर कलयुग तक मां बगलामुखी शत्रुओं का नाश करने वाली मानी जाती हैं।



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