Paris Olympics 2024: अल्मोड़ा में जन्मे लक्ष्य सेन ब्रॉन्ज़ हारकर भी जीते दिल, जानें कितना पढ़ा लिखा है ये खिलाड़ी

Paris Olympics 2024 Lakshya Sen Educational Qualification: महज 22 साल की उम्र में लक्ष्य सेन ने ओलंपिक में सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के पहले पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। हालांकि इस मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद ब्रॉन्ज़ मेडल के लिए उन्हें मलेशिया के ली ज़ी जिया से भिड़ना पड़ा और वहां भी उन्हें शिकस्त मिली। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेल में लक्ष्य सेन के बेहतरीन परफॉर्मेंस ने देश का मान जरूर बढ़ाया।

Paris Olympics 2024 Badminton Player Lakshya Sen Educational Qualification and Career in Hindi

गौरतलब है कि लक्ष्य सेन से पहले, 2016 में किदांबी श्रीकांत और 2012 में पारुपल्ली कश्यप ही क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे, वो भी पदक जीतने से चूक गए थे। लक्ष्य का सेमीफाइनल तक का सफर शानदार रहा है। लक्ष्य को हर मुकाबले में जबरदस्त चुनौती मिली। उनके प्रदर्शन ने न केवल उन्हें प्रशंसा दिलाई बल्कि भारत के लिए ओलंपिक पदक की उम्मीद भी जगा दी थी। मगर पेरिस ओलंपिक का सफर अब उनके लिए खत्म हो चुका है।

16 अगस्त, 2001 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मे लक्ष्य को बैडमिंटन से उनके दादा चंद्र लाल सेन ने परिचित कराया और शुरुआत में उनके पिता डीके सेन ने उन्हें कोचिंग दी।

लक्ष्य सेन का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

2010 में लक्ष्य ने अपने पिता को मना लिया कि वे उसे अपने बड़े भाई चिराग के साथ यूनियन बैंक ऑल-इंडिया सब-जूनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में जाने दें। वहाँ, उसने खेलने की इच्छा व्यक्त की और एक कोच का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने प्रकाश पादुकोण से उसकी सिफारिश की। लक्ष्य की प्रतिभा से प्रभावित होकर, पादुकोण ने उसे प्रकाश पादुकोण अकादमी में अपने संरक्षण में ले लिया।

15 साल की उम्र में ही लक्ष्य ने राष्ट्रीय पुरुष एकल फाइनल में पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बनकर अपने गुरु का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। बैडमिंटन करियर के साथ-साथ उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी में बीरशीबा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।

लक्ष्य सेन का करियर

लक्ष्य के नाम का अर्थ है "लक्ष्य" या "लक्ष्य", जो किसी ऐसे व्यक्ति के लिए उपयुक्त है जिसकी शुरुआत इतनी शानदार रही हो। 2016 में, उन्होंने थाईलैंड में एशियाई जूनियर चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता। उनकी अगली महत्वपूर्ण उपलब्धि 2018 में आई जब उन्होंने सिर्फ़ 17 साल की उम्र में यूथ ओलंपिक में रजत पदक हासिल किया।

उसी वर्ष, उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और एशियाई खेलों में रजत पदक जीता। 2021 विश्व चैंपियनशिप में उनकी जीत ने उन्हें बैडमिंटन समुदाय में व्यापक सम्मान दिलाया।

बैडमिंटन में प्रमुख उपलब्धियां

लक्ष्य सेन ने अपने करियर की शुरुआत में ही महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कर ली हैं। मात्र 15 साल की उम्र में, वह राष्ट्रीय पुरुष एकल फाइनल में पहुँचने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए। उनकी उपलब्धियों में शामिल हैं:

जूनियर चैंपियनशिप: कई राष्ट्रीय स्तर की जूनियर चैंपियनशिप जीतना।
एशियाई जूनियर चैंपियनशिप: 2016 में कांस्य पदक हासिल किया।
बीडब्ल्यूएफ टूर्नामेंट: 2017 में इंडिया इंटरनेशनल सीरीज़ और यूरेशियन बल्गेरियाई ओपन जीतना।
थॉमस कप: 2022 में विजेता टीम का हिस्सा बनना।
राष्ट्रमंडल खेल: 2022 में स्वर्ण पदक जीतना।
विश्व चैंपियनशिप: कांस्य पदक अर्जित करना।

लक्ष्य सेन के ओलंपिक सफर ने प्रशंसकों को आकर्षित किया है और भारतीय खेल प्रेमियों को गौरवान्वित किया है। लक्ष्य सेन की उपलब्धियाँ उनके समर्पण और कौशल का प्रमाण हैं।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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