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दक्षित भारतीय लोगों के बारे में कही जाने वाली अजीब बातें
भारत एक ऐसा देश है जहां कई धर्म व जाति के लोग रहते हैं। ऐसी स्थिति में लोगों की पहचान करने के लिए हम उनके कपडों का व उनके रंग-रूप का सहारा लेते हैं। इसे हम अपना स्वभाव कहें या नासमझी। लेकिन सच यह कि इस आदत से छुटकारा पाना हमें कठिन लगता है।
पुरूष, महिलाओं में क्या घूरते हैं....
कुछ वर्ष पहले लोग काम के कारण किसी अन्य राज्य में जाकर बसना पसंद नहीं करते हैं। लेकिन भूमंडलीकरण के इस दौर में लोग प्रांतीय सीमाओं को कहीं पीछे छोड चुके हैं। लेकिन लोगों को परखने के क्रम में हमारे मन में कुछ मिथक बातें घर कर चुकी हैं।
विदेश में बहुत याद आती है अपने देश की ये बातें
इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी ही बातों से रूबरू कराएंगे। अतः हमें यकीन हैं कि इन्हें पढ़कर आप भी दंग रह जाएंगे।

1 खराब अंग्रेजी
माना जाता है कि दक्षिण भारतीय लोग अंग्रेजी भाषा नहीं बोल सकते हैं। एक अन्य धारणा है कि दक्षिण भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली विभिन्न भाषाएं एक जैसी होती हैं।

2 मुख्य भोजन
क्योंकि दक्षिण भारतीय लोग चावल व चावल से बनाए जाने वाले व्यंजन ज्यादा पसंद करते हैं। माना जाता है कि ये लोग इडली व डोसा के बिना नहीं जी सकते हैं।

3 रूपरंग
चूंकि दक्षिण भारतीय लोग सावले रंग के होते हैं। रंग के आधार पर इन्हें एक प्रांत से जोडा जाता है। जबकि यहां के कुछ लोग गोरे रंग के भी होते हैं।

4 रूढ़िवादी होते हैं
अलग-अलग समय पर भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर अलग शासनकारों ने राज किया। अतः उनके राज व परंपरा का असर उन क्षेत्रों में देखा जा सकता है। परंतु इस मामले में दक्षिण भारत भाग्यशील रहा है व अपनी संस्कृति को बटोरे आज भी उसी तरह खडा है। इस बात से अनजान लोग इन्हें रूढिवादी कहते हैं।

5 नृतक है
हालांकि यहां कि नृत्यशैली उत्तर भारतीय नृत्यशैली से अलग है। यहां के लोगों को नृतक कहना सही नहीं है।

6 केले के पत्तों में खाते हैं
दक्षिण भारत में कुछ अवसरों पर केले के पत्तों में खाना परोसा जाता है। केले का पत्ता खाने के स्वाद को भी बढाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यहां के लोग केवल केले के पत्ते में ही खाना खाते है।

7 लुंगी से खास लगाव
जिस तरह उत्तर भारतीय लोग कुर्ता-पजामा पहनना पसंद करते हैं। उसी तरह दक्षिण भारतीय लोगों को लुंगी ज्यादा आरामदायक लगती है। किंतु यह पहनावा केवल घर तक ही सीमित है।

8 बहुत लंबा नाम
ये सच्च है कि दक्षिण भारतीय लोगों के नाम थोडे लंबे होते हैं। कभी-कभी कुछ लोगों को नाम उच्चारण करने में भी मुश्किल होती हैं। लेकिन कुछ ही लोग अपने नाम के साथ अपने गांव का नाम जोडकर कहते हैं।

9 बेवकूफ होते हैं
दक्षिण भारतीय लोग पड़ाकू होते हैं लेकिन बेवकूफ नहीं होते हैं। यहां के लोग डिग्री हासिल करने के लिए नहीं बल्कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढते हैं। ज्ञान की लालसा इन्हें आगे पढने पर मजबूर करती है। अतः यह कारण इस धारणा को जन्म देता है।

10 पोशाक
दक्षिण भारतीय लोग साडी, लुंगी व लहंगा-चोली पहनना ज्यादा पसंद करते हैं। हालांकि, सलवार-कमीज़ को यहां तक पहुंचने में थोडी सी देरी हो गई। जबकि इसका भी चलन आरंभ हो चुका है।

11 पिछडापन
कहते हैं कि यहां के लोग पिछडे हुए हैं व छोटी सोच रखते हैं। इसका मुख्या कारण है इनका ज्ञान व अब तक किसी अन्य संस्कृति से प्रभावित ना होना।

12 प्रथाएं मानने वाले
दक्षिण भारतीय लोग अपने माथे पर विभूति लगाते हैं। यह विभूती भगवान शिव के अनुयायी होने का प्रतीक है। बदकिस्मती से, यह विभूति का निशान इन्हें दक्षिण भारतीय होने की पहचान दिलाता है।



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