Ahmedabad Plane Crash : कौन हैं सीट नम्‍बर 11A पैसेंजर? जो मौत को चकमा देकर निकला जिंदा

Ahmedabad Plane Crash : 11 जून की दोपहर भारत ने अपनी हाल की सबसे दर्दनाक और भयावह विमान दुर्घटनाओं में से एक का सामना किया। एयर इंडिया की एक फ्लाइट अहमदाबाद के घनी आबादी वाले इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे चारों ओर अफरातफरी मच गई। हादसा इतना भयंकर था कि विमान देखते ही देखते आग का गोला बन गया। इस त्रासदी में 240 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसी खौफनाक मंजर के बीच एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने हर किसी को हैरानी में डाल दिया।

दरअसल, विमान की सीट 11ए पर बैठे एक यात्री रमेश विश्वास कुमार इस भयानक हादसे में सुरक्षित बाहर निकल आए। पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक ने एएनआई से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि मलबे के बीच सीट 11ए से रमेश नाम का एक शख्स जिंदा मिला, और सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि वह खुद चलकर एंबुलेंस तक पहुंचे।

Ramesh Viswashkumar

चमत्कार से कम नहीं है, जिंदा बचना

रमेश ने एक इंटरव्‍यू में बताया क‍ि, "हादसे के बाद एक तेज़ धमाका हुआ। चारों तरफ आग ही आग थी। मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैं बस बचने की कोशिश करता रहा। जब होश आया, तो देखा मैं एंबुलेंस में था। मुझे अब भी विश्वास नहीं होता कि मैं जिंदा हूं। ये किसी चमत्कार से कम नहीं है।"

रमेश की इस जीवित बचने की घटना को सोशल मीडिया पर "चमत्कार" और "भगवान की कृपा" कहा जा रहा है। उनका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वह दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे से निकलकर चलते हुए नजर आ रहे हैं। लोगों ने उन्हें "मुकद्दर का सिकंदर" तक कह दिया।

पुलिस के अनुसार, इस हादसे में रमेश के अलावा एक और यात्री जीवित पाया गया है जो अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन रमेश की स्थिति तुलनात्मक रूप से स्थिर है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने भाई को ढूंढ रहे हैं, जो उसी फ्लाइट में उनके साथ था।

कौन हैं रमेश विश्वास कुमार?

40 वर्षीय रमेश विश्वास कुमार एक ब्रिटिश नागरिक हैं, जो पिछले 20 वर्षों से लंदन में पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे थे। वह भाई अजय कुमार रमेश के साथ भारत में परिवार से मिलने आए थे। गुरुवार को दोनों यूके लौट रहे थे, जब एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया। हादसे में रमेश चमत्कारिक रूप से बच गए। उनका वीडियो और बोर्डिंग पास भी सामने आया है।

को राखे साइयां, मार सके ना कोय।

हादसे के बाद स्थानीय लोग, बचाव दल और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर जुटीं। अब तक मलबे से 242 शवों को निकाला जा चुका है, और कई शवों की हालत ऐसी है कि पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विमान के इंजन में तकनीकी खराबी थी, जिससे विमान उड़ान भरते ही कंट्रोल खो बैठा और आवासीय इलाके में जा गिरा।

स्थानीय निवासी भी रमेश के बचाव को दैवीय चमत्कार मान रहे हैं। एक चश्मदीद ने कहा, "जिस तरह विमान जल रहा था, उसमें किसी के बचने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। रमेश का बचना भगवान की मेहरबानी है।"

यह हादसा भारत के सबसे दर्दनाक विमान हादसों में गिना जा रहा है। लेकिन इसी मौत के सन्नाटे के बीच रमेश विश्वास की जिंदगी की कहानी, उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आई है, यह याद दिलाने के लिए कि जब ऊपर वाला साथ देता है, तो मौत भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती। वो कहते हैं, ना जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय।

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