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बुखार से पीड़ित भगवान जगन्नाथ को लगेगा फुलरी तेल, जानें इस परांपरा और तेल की खासियत
Rath Yatra 2025 : पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में हर साल देवस्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ को 108 कलशों के सुगंधित जल से स्नान कराया जाता है। इस बार 11 जून को देवस्नान पूर्णिमा के दिन जब महाप्रभु को स्नान कराया गया, तो शास्त्रों के अनुसार स्नान के पश्चात वे 'मानव रूप' में अस्वस्थ हो गए। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसमें भगवान की मानवीय लीला को दर्शाया जाता है। इस अवधि में उनकी विशेष देखभाल की जाती है, जिसे 'अनवसर सेवा' कहा जाता है। यह सेवा मंदिर के भीतर 'अणवसर गृह' (बुखार घर) में की जाती है, जहां दइतापति सेवक भगवान की गुप्त चिकित्सा सेवा करते हैं।
भगवान जगन्नाथ के बुखार को शांत करने और उनके शरीर को बल प्रदान करने के लिए 16 जून को अनासरी पंचमी के मौके पर फुलरी तेल से उनकी मालिश शुरू कर दी गई है।

यह तेल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और महाप्रभु की सेहत को ठीक करने के लिए एक प्रकार की दिव्य औषधि की भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं इस तेल के औषधीय गुण-
क्या है फुलरी तेल?
फुलरी तेल एक विशेष प्रकार का आयुर्वेदिक और सुगंधित तेल है, जिसे भगवान जगन्नाथ के लिए विशेष परंपरा और विधि से तैयार किया जाता है। यह तेल हर साल केवल एक बार बनाया जाता है और इसमें औषधीय तत्वों के साथ भक्ति भाव भी समाहित होता है। इस तेल को पुरी के बड़े ओड़िया मठ द्वारा तैयार किया जाता है।
फुलरी तेल कैसे बनता है?
हर साल हेरापंचमी के दिन दो विशेष मिट्टी के घड़ों में तिल का तेल डाला जाता है। इसमें विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियां और सुगंधित फूल मिलाए जाते हैं। इन घड़ों को फिर मिट्टी में एक वर्ष के लिए दबा दिया जाता है ताकि तेल में उपस्थित सभी औषधीय और सुगंधित तत्व पूर्ण रूप से समा जाएं। एक वर्ष बाद यह तेल निकाला जाता है, और महाप्रभु के स्नान के बाद, जब वे बीमार होते हैं, तब इसी फुलरी तेल से उनकी मालिश की जाती है।
फुलरी तेल में प्रयुक्त औषधीय तत्व
तिल का तेल : यह तेल त्वचा को पोषण देता है, दर्द और सूजन को कम करता है।
हरिद्रा (हल्दी) : सूजन और संक्रमण से लड़ने में सहायक।
नागरमोथा : शरीर को डिटॉक्स करता है।
चंदन : ठंडक देता है और सुगंधित होता है।
तुलसी : रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
लोध्र और मंजिष्ठा : त्वचा के लिए लाभकारी, रक्त शोधक।
फूल : बेला, गुलाब, चमेली, कदंब आदि जो तेल को सुगंध और दिव्यता प्रदान करते हैं।
फुलरी तेल के औषधीय गुण
- यह तेल आयुर्वेदिक दृष्टि से बेहद लाभकारी माना जाता है:
- वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है (त्रिदोष नाशक)
- सूजन, दर्द, थकान और जकड़न को कम करता है
- त्वचा को पोषण और नमी देता है
- मानसिक शांति और स्निग्धता प्रदान करता है
- संक्रमण और त्वचा रोगों से रक्षा करता है
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
फुलरी तेल सिर्फ एक औषधि नहीं, बल्कि भगवान की मानवलीला का प्रतीक भी है। यह दर्शाता है कि भगवान भी इंसान की तरह कष्ट सहते हैं और सेवा, उपचार और देखभाल से स्वस्थ होते हैं। यह परंपरा भक्तों को यह सिखाती है कि बीमार होना जीवन का हिस्सा है, और धैर्य, सेवा तथा उपचार के माध्यम से सब कुछ ठीक हो सकता है।
26 जून को जब भगवान जगन्नाथ स्वस्थ हो जाएंगे, तब उनकी भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथ निर्माण कार्य रथखला में जोरों से चल रहा है, जहां महारणा सेवक तीनों रथों का निर्माण कर रहे हैं।



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