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Shaeed Diwas 2024: किसने लिखा था 'रघुपति राघव राजाराम', गांधी जी ने क्यों किए थे असली भजन में बदलाव
Shaeed Diwas 2024 : महात्मा गांधी के प्रिय भजनों में एक 'रघुपति राघव राजाराम' गांधी जी के जयंती और पुण्यतिथि जैसे मौके पर यह रामधुन हर जगह सुनाई देती है।
बताया जाता है कि सभाओं के दौरान बापू इसे बड़ी भावुकता के साथ गाया करते थे और सामाजिक भाईचारे का संदेश देने वाला यह भजन बताया जाता है कि महात्मा गांधी ने इस ओरिजनल भजन में अपने हिसाब से कुछ बदलाव किए थे जो कि समाज को एकसूत्र में बांधने का संदेश देते थे।

हालांकि ओरिजनल भजन इस भजन से एकदम अलग है। आइए जानते हैं कि असली भजन के रचियता कौन थे और गांधी जी ने क्यों इनमें बदलाव किए थे?
रघुपति राघव राजा राम गीत के लेखक कौन थे?
'रघुपति राघव राजा राम' गीत को लेखक पंडित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर थे जिन्होंने सर्वप्रथम12 मार्च1930 को डांडी मार्च के समय में गाया गया था। अपने आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए गाया था। इसके बाद यह भजन महात्मा गांधी के हर सभा का हिस्सा बन गया। इस गीत के बोल बदलने के पीछे उद्देश्य भारतीय समाज की एक धर्मनिरपेक्ष समग्र छवि पेश करना था।
गांधी जी की सभा में यह भजन इस तरह गाया जाता था-
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सबको सन्मति दे भगवान।
ये था असली रघुपति राघव राजाराम भजन
यह भजन श्री लक्ष्मणाचार्य द्वारा रचित श्री नम: रामायणम् का एक अंश है। गांधी जी ने इस मूल भजन की 1-2 पंक्तियों को स्वतंत्रता आंदोलन मे अपनी भागीदारी के अनुसार परिवर्तित करके गाया करते थे। ओरिजिनल भजन भगवान राम की महिमा और स्तुति के रूप में वर्णित किया जा सकता है। इस भजन की मूल पंक्तियाँ इस तरह है:
रघुपति राघव राजाराम। पतित पावन सीताराम।।
सुंदर विग्रह मेघाश्याम। गंगा तुलसी शालीग्राम।।
भद्रगिरीश्वर सीताराम। भगत-जनप्रिय सीताराम।।
जानकीरमणा सीताराम। जय जय राघव सीताराम।।
सन 1948 में आई फिल्म "श्री राम भक्त हनुमान" में इस भजन का मूल स्वरुप उपलब्ध है। हालांकि इस भजन को किसी ने भी लिखा हो लेकिन निसंदेह यह भजन हर किसी के हृदय में बसा है। और अब यह गीत एकता और सद्भभाव की मिसाल बन चुका है।



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