21 जून को ही क्यों होता है साल का सबसे लंबा दिन? जानें वैज्ञानिक कारण और ह‍िंदू धर्म से कनेक्‍शन

Summer Solstice 2025 : हर वर्ष 21 जून को उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में साल का सबसे लंबा दिन माना जाता है। इस दिन को ग्रीष्म संक्रांति के नाम से जाना जाता है। यह सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि दुनिया की कई सभ्यताओं और धार्मिक मान्यताओं में भी इसका गहरा महत्व है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह दिन पृथ्वी की गति और सूर्य की स्थिति से जुड़ा होता है, वहीं धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह नया ऊर्जा चक्र, नई शुरुआत और प्रकाश की विजय का प्रतीक है। आइए विस्तार से समझते हैं कि 21 जून को दिन सबसे लंबा क्यों होता है और इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है।

Summer Solstice 2025

वैज्ञानिक कारण: क्यों होता है 21 जून को सबसे लंबा दिन?

पृथ्वी का झुकाव

पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। यह झुकाव ही पृथ्वी पर ऋतुओं के बदलने और दिन-रात की अवधि में बदलाव का कारण है। जब पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, तो अलग-अलग समय पर पृथ्वी का झुका हुआ भाग सूर्य की ओर या उससे दूर होता है।

सूर्य की स्थिति

हर साल 21 जून के आसपास, पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर सबसे अधिक झुका हुआ होता है। इस समय, सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध में स्थित कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर सीधी पड़ती हैं। यह वह बिंदु है जहां सूर्य दोपहर में ठीक सिर के ऊपर दिखाई देता है।

सबसे लंबा दिन

इस सीधी धूप के कारण उत्तरी गोलार्ध में सूर्य अधिक देर तक आकाश में रहता है, जिससे दिन की अवधि लंबी हो जाती है और रात छोटी। यही कारण है कि 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है।

मध्यरात्रि सूर्य (Midnight Sun)

आर्कटिक सर्कल (66.5°N latitude) के उत्तर में स्थित क्षेत्रों जैसे नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड में 21 जून के आसपास 24 घंटे सूर्य दिखाई देता है, जिसे 'मध्यरात्रि सूर्य' कहा जाता है। इस दौरान वहां पर रात भी उजाले में बीतती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

ग्रीष्म संक्रांति केवल खगोलीय घटना नहीं है, यह कई धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों में नई शुरुआत, ऊर्जा, प्रकाश और उर्वरता से जुड़ी हुई है। प्राचीन काल से ही इस दिन को विशेष रूप से मनाया जाता रहा है।

प्राचीन सभ्यताओं में महत्व

- माया सभ्यता (Maya Civilization): माया लोगों ने सूर्य और ग्रहों की स्थिति के आधार पर कैलेंडर विकसित किया था। उनके मंदिरों और स्मारकों की दिशा ग्रीष्म और शीत संक्रांति को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।

- मिस्र (Egypt): मिस्रवासी 21 जून के आसपास नील नदी की बाढ़ और कृषि चक्र की शुरुआत का जश्न मनाते थे।

- स्टोनहेंज (Stonehenge): इंग्लैंड में स्थित यह प्राचीन स्मारक ग्रीष्म संक्रांति के सूर्योदय की दिशा में बनाया गया है। हर साल हजारों लोग यहां 21 जून को सूर्योदय देखने के लिए जुटते हैं।

हिंदू धर्म और योग दिवस

- हिंदू धर्म में 21 जून का आध्यात्मिक और योगिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है।

- पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने इसी दिन आदियोगी के रूप में योग का पहला उपदेश सप्तऋषियों को दिया था।
- इसीलिए इस दिन को "योग दिवस" के रूप में चुना गया, ताकि दुनिया को योग की शक्ति और संतुलित जीवन का संदेश दिया जा सके।
- 2015 से संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के रूप में 21 जून को मनाया जा रहा है।
- योग अभ्यास के लिए यह दिन शुभ माना जाता है क्योंकि इस दौरान सौर ऊर्जा और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह उच्चतम स्तर पर होता है।

Story first published: Friday, June 20, 2025, 19:59 [IST]
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