Latest Updates
-
Restaurant Style Baby Corn Masala Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा स्वादिष्ट बेबी कॉर्न मसाला -
Train Washroom Rule: भूलकर भी इस समय न करें ट्रेन के टॉयलेट का इस्तेमाल, वरना सफर में होगी बड़ी दिक्कत -
गर्मियों में कम बजट में घूमने के लिए बेस्ट हैं भारत की ये 9 जगहें, परिवार के साथ बनाएं ट्रिप का प्लान -
फेमस शेफ पंकज भदौरिया को हुआ ब्रेस्ट कैंसर: क्या पुरुषों को भी हो सकती है यह बीमारी? जानें लक्षण और बचाव -
Jackfruit Side Effects: इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खाना चाहिए कटहल, वरना शरीर बन जाएगा बीमारियों का घर -
Amritsar Style Pindi Chole Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसा चटपटा स्वाद -
Rule Change 1st June 2026: 1 जून से आम आदमी को बड़ा झटका! जानिए क्या होगा महंगा और क्या सस्ता -
Bakrid Mubarak Wishes for Saas-Sasur: बकरीद पर अपने सास-ससुर को भेजें दिल छू लेने वाले मुबारकबाद संदेश -
Desert Style Ker Sangri Recipe: राजस्थान का पारंपरिक और चटपटा स्वाद अब घर पर पाएं -
Eid Mubarak Wishes For love: ऐ चांद, तू उनको मेरा पैगाम देना...बकरीद पर पार्टनर को भेजें ये 25+ रोमांटिक मैसेज
इस चायनीज काली मंदिर में चढ़ता है नूडल्स-मोमोज का भोग, पड़ोसी देश चीन से जुड़ा है कनेक्शन
Chinese Kali Temple In Kolkata : भारत के विभिन्न मंदिरों में भिन्न-भिन्न रीति-रिवाज और परंपराएं देखने को मिलती हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां देवी को पारंपरिक मिठाइयों, लड्डू या खीर के बजाय चाइनीज व्यंजन का भोग लगाया जाता हो? कोलकाता में स्थित "चीनी काली मंदिर" ऐसा ही एक अनोखा स्थान है, जहां माता को नूडल्स और मोमोज का भोग चढ़ाया जाता है।
यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था और भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अनूठी परंपरा के कारण भी देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

काली माता का चमत्कारी इलाज
इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक रोचक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि कई वर्षों पहले एक लड़का गंभीर रूप से बीमार हो गया था। डॉक्टरों ने उसे बचाने की सारी उम्मीदें छोड़ दी थीं, जिससे उसके माता-पिता बेहद परेशान थे। वे अपने बेटे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए विभिन्न मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं से प्रार्थना कर रहे थे। इस दौरान वे एक स्थान पर पहुंचे, जहां एक पेड़ के नीचे दो काले पत्थर रखे थे, जिन्हें लोग काली माता के रूप में पूजते थे।
उस माता-पिता ने वहीं बैठकर कई दिनों तक मां काली से अपने बेटे के जीवन की प्रार्थना की। उनकी भक्ति और श्रद्धा के चलते चमत्कारी रूप से उनका बेटा स्वस्थ हो गया। इस घटना से प्रभावित होकर उन्होंने काली माता की पूजा करनी शुरू कर दी। धीरे-धीरे इस स्थान पर लोगों की आस्था बढ़ने लगी, और बंगाली तथा चीनी समुदाय के लोगों ने यहां एक मंदिर का निर्माण करा दिया। तभी से यह स्थान "चीनी काली मंदिर" के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
चाइनीज व्यंजनों का भोग
इस मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि यहां माता को चाइनीज व्यंजन चढ़ाए जाते हैं। माना जाता है कि जब चीन में गृहयुद्ध हुआ था, तब कई चीनी शरणार्थी कोलकाता में आकर बस गए। वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी अपने साथ लेकर आए, जिनमें देवी-देवताओं को विशेष प्रकार का भोजन अर्पित करने की परंपरा भी शामिल थी। चीनी काली मंदिर में भी शरणार्थियों ने देवी को नूडल्स और मोमोज चढ़ाने की परंपरा शुरू कर दी, जो धीरे-धीरे यहां के नियमित प्रसाद का हिस्सा बन गई।
प्रसाद में मिलता है नूडल्स, मोमोज,और चोपसी
आज इस मंदिर में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को नूडल्स, मोमोज, चावल और अन्य चाइनीज व्यंजन परोसे जाते हैं। लोग इसे मां काली का आशीर्वाद मानकर श्रद्धा से ग्रहण करते हैं। कोलकाता के इस मंदिर में बंगाली और चीनी संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि यह मंदिर आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक सौहार्द्र का भी प्रतीक बन चुका है।
चीनी काली मंदिर की यह अनूठी परंपरा न केवल इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि आस्था और संस्कृति का मेल किसी भी रूप में हो सकता है। यही कारण है कि यह मंदिर कोलकाता में श्रद्धालुओं के बीच खासा लोकप्रिय है और प्रतिदिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।



Click it and Unblock the Notifications