Latest Updates
-
Quick Filling Dinner Anda Paratha Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसा स्वादिष्ट अंडा पराठा -
मानसून से पहले दिल्ली में डेंगू के 162 और मलेरिया के 42 मामले, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार; जानें बचाव के उपाय -
Dhaba Style Marinade Chicken Tikka Recipe: घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्मोकी स्वाद -
प्रेग्नेंट हैं 39 साल की सामंथा रुथ प्रभु! करीबी शख्स ने किया कन्फर्म, जानें कब होगी डिलीवरी -
मलाइका अरोड़ा की फिटनेस का खुल गया राज, 52 की उम्र में यंग दिखने के लिए करती हैं ये 5 योगासन -
South Indian Style Tomato Rice Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा चटपटा स्वाद -
Summer Solstice: 21 जून को क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन? जानें क्या है इसके पीछे की असली वजह -
International Yoga Day 2026 Wishes: योग करे जो रोज...योग दिवस पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामनाएं -
Father's Day 2026 Shayari: उंगली पकड़कर चलना सिखाया...फादर्स डे पर पापा को भेजें ये दिल छू लेने वाली शायरियां -
Zero Oil Sprouts Cheela Recipe: वजन घटाने के लिए बनाएं हेल्दी और टेस्टी नाश्ता
शादी से पहले यहां लड़कियां 7 दिन तक मनाती हैं 'सुहागरात', माता-पिता खुद देते है इसकी इजाजत
हमारे देश में शादी-ब्याह को लेकर कई अजीबो-गरीब प्रथाए हैं, जिनके बारे में सुनकर सिर चकरा जाता है। आज हम आपको छत्तीसगढ़ की एक ऐसी ही प्रथा के बारे में बता रहे हैं, जो सदियो से चली आ रही है। इस प्रथा के तहत न सिर्फ लड़के-लड़कियों को अपना जीवनसाथी चुनने की छूट होती है बल्कि विवाह पूर्व वो घर वालों की रजामंदी से शारीरिक संबंध भी मनाते हैं। इसे छत्तीसगढ़ में घोटुल प्रथा कहा जाता है।
इसमें नौजवान युवक-युवतियों को मन पसंद जीवनसाथी चुनने का अधिकार दिया जाता है। वैसे तो जैसे-जैसे समय और जमाना बदलता जा रहा है यह परंपरा कम होती जा रही है। आइए जानते हैं इस प्रथा के बारे में सबकुछ।

क्या है घोटुल प्रथा?
घोटुल देश के कई जनजातीय समुदायों जैसे माड़िया, गोंड और मुरिया में पॉपुलर है। यह प्रथा छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले और साउथ के कुछ खास इलाकों में खासतौर पर मनाया जाता है। घोटुल को एक प्रकार का बैचलर्स डॉरमिटरी कहा जा सकता है, यानी एक विशिष्ट आकार की झोपड़ी या घर को जिसे आदिवासी जोडा मिलकर बनाता है और रात में बसेरा करता हैं। अलग-अलग इलाकों की घोटुल परम्पराओं में अंतर होता है। कुछ में जवान लड़के-लड़कियां घोटुल में ही सोते हैं तो कुछ में वे दिन भर वहां रहकर रात को अपने-अपने घरों में सोने जाते हैं। इस परांपरा में दोनों पक्ष के घरवालों को कोई ऐतराज नहीं होता है। घोटुल में लड़कों को चेलिक और लड़कियों को मोटियारी कहा जाता है। बिन शादी के कपल कुछ दिन तक रात बिताने के बाद शादी के बंधन में बंध जाते हैं।
कैसे करते हैं जीवनसाथी का चुनाव
जब कोई लड़का शारीरिक रूप से परिपक्व हो जाता है। उस समय वह घोटुल का रास्ता चुनता है। उसे बांस से कंघी बनानी होती है। क्योंकि इस बांस की कंघी के जरिए ही वो अपनी भावी जीवनसाथी की तलाश करता है। जब किसी एक लड़की जिसे वह कंघी पसंद आती है, वह उसे चुरा लेती है और उसे अपने बालों में लेकर घूमती है, जो इस बात का संकेत होता है कि वह लड़के को पसंद करती है। फिर वे सब मिलकर अपना घोटुल सजाते हैं और उस झोपड़ीनुमा घोटुल में रहने लगते हैं।
ताकि बेहतर बना सकें दांपत्य जीवन
घोटुल की परंपरा का एक मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज में वैवाहिक जीवन को सुखद और सामंजस्यपूर्ण बनाना है। इस प्रथा के माध्यम से युवक-युवतियां न केवल एक-दूसरे की भावनाओं और इच्छाओं को समझते हैं, बल्कि वैवाहिक जीवन की आवश्यकताओं को भी सीखते हैं। घोटुल में एक साथ समय बिताने के दौरान युवक-युवतियां एक-दूसरे की शारीरिक और मानसिक जरूरतों को समझते हैं, जिससे उनका वैवाहिक जीवन बेहतर और संतुलित बन सके। आदिवासी समाज में महिलाओं का बहुत उच्च स्थान होता है, और उन्हें समाज में समानता और सम्मान दिया जाता है।
धीरे-धीरे इस परांपरा को हो रहा है पतन
घोटुल जैसी परंपराएं, जो वर्षों से आदिवासी समुदाय द्वारा संरक्षित और सम्मानित रही हैं, अब बाहरी हस्तक्षेप और सामाजिक बदलावों के कारण संकट में हैं। बाहरी दुनिया का इन पारंपरिक रीति-रिवाजों पर प्रभाव पड़ने से घोटुल का असली स्वरूप बदलने लगा है। बाहरी लोग जब इन परंपराओं के साथ जुड़े स्थलों पर आते हैं और तस्वीरें खींचते हैं या वीडियो बनाते हैं, तो यह आदिवासियों की सांस्कृतिक गोपनीयता और गरिमा पर आक्रमण माना जाता है।
हालांकि घोटुल पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसका प्रचलन कम हो गया है। बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में, जहां यह परंपरा कभी समृद्ध हुआ करती थी, वहां अब इसका चलन धीरे-धीरे घट रहा है।
नक्सली, जो आदिवासी क्षेत्रों में माओवादी विचारधारा का पालन करते हैं, घोटुल जैसी परंपराओं को लेकर विशेष रूप से विरोधी रहे हैं। उनका मानना है कि युवाओं को इतनी स्वतंत्रता देना उचित नहीं है और इस परंपरा का दुरुपयोग हो रहा है। उनके अनुसार, लड़कियों का शारीरिक शोषण हो सकता है और इसलिए इस प्रथा पर रोक लगनी चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications