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Mizoram Next CM : इंदिरा गांधी के सुरक्षा इंचार्ज से लेकर मिजोरम के नए सीएम तक, जानें कौन हैं लालडुहोमा?
Who Is Mizoram Is Next CM Lalduhoma: मिजोरम विधानसभा चुनाव में जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) के नेता लालडुहोमा का मिजोरम के अगले मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुरक्षा प्रमुख रहे लालडुहोमा दो-तिहाई बहुमत के साथ नई सरकार बनाएंगे।
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी 74 साल के लालदुहोमा मिजोरम के सेरछिप विधानसभा से चुनाव में खड़े हुए थे। चुनाव में ZPM ने बहुमत (21) के पार 27 सीटों पर जीत की की मुहर लगाई है। आइए जानते हैं कौन हैं लालदुहोमा, जो मिजोरम के मुख्यमंत्री बनेंगे...

इंदिरा गांधी से प्रभावित होकर राजनीति से जुड़े
लालदुहोमा की राजनीतिक यात्रा चुनौतियों से भरी रही है। 1982 एशियाई खेलों की आयोजन समिति में एक महत्वपूर्ण पद पर रहे। इंदिरा गांधी से प्रभावित होकर लालदुहोमा ने राजनीति में आने का फैसला किया और भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली। उन्हें 31 मई 1984 को मिजोरम कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। उनका राजनीतिक लक्ष्य मिजोरम नेशनल फ्रंट (एक समय में राज्य का विद्रोही संगठन जो मिजोरम को भारत से अलग स्टेट बनाना चाहता था) और भारत सरकार के बीच शांति वार्ता पर केंद्रित था।
काफी उतार चढ़ाव रहा है राजनीतिक सफर
लालदुहोमा ने एमएनएफ के नेता और भारत सरकार के खिलाफ बगावत छेड़ने वाले लालडेंगा की भारत वापसी की व्यवस्था की थी। लालडेंगा और इंदिरा गांधी की मुलाकात 31 अक्टूबर की दोपहर को होने वाली थी, लेकिन उसी सुबह इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। दिसंबर 1984 के लालदुहोमा मिजोरम निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़े और उनकी जीत हुई। उसी वर्ष उन्हें कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मिजो नेशनल यूनियन का किया था गठन
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ललथनहवला से अनबन के चलते लालडुहोमा ने सबसे पहले कांग्रेस छोड़ी और मिजो नेशनल यूनियन का गठन किया। बाद में एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री टी सेलो के नेतृत्व में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस में शामिल हो गए। लालडेंगा की मृत्यु के बाद,लालडुहोमा ने अपने उत्तराधिकारी जोरमथांगा के साथ विवाद के कारण जोरम नेशनलिस्ट पार्टी (जीएनपी) का गठन किया। वह 2003 और 2008 में विधायक बने।
अयोग्यता का सामना करने वाले देश के पहले सांसद
कांग्रेस पार्टी से लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर 1984 के दिसंबर माह में लालदुहोमा संसद पहुंचे। लेकिन वर्ष 1988 में कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि वे भारत में दलबदल विरोधी कानून से मुक्त होने वाले पहले सांसद भी हैं।
2018 के विधानसभा चुनाव से सुर्खियों में आएं
बता दें, पिछले विधानसभा चुनाव (2018) में भी लाल्दुहोमा की पार्टी को चुनाव आयोग से मान्यता नहीं मिलने के बाद भी उनकी पार्टी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालथनहलवा को करारी शिकस्त दी थी। जिसके बाद से ही लाल्दुहोमा राजनीति के गलियारों की सुर्ख़ियों में आ गए।



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