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Everest का वो खुला कब्रिस्तान, जहां जमी हुई लाशें बताती है रास्ता, डेथ जोन से जुड़ा है रहस्य
Most Famous Dead Body on Mount Everest : दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का ख्वाब हम में से कई लोग देखते है लेकिन करोड़ों में से चंद ही इस ख्वाब को साकार करते हैं। जहां कुछ लोग अपने सपने पर फतह हासिल कर वापिस आ जाते है, तो वहीं कुछ लोगों के लिए एवरेस्ट की राह आसान नहीं होती है वो इस सपने को पूरा करते हुए आधी राह में ही दम तोड़ एवरेस्ट की गोद में हमेशा के लिए सो जाते है।
मगर ये मर कर भी मरते नहीं है। बल्कि बर्फ में जमी हुई ये लाशें यहां आने वाले दूसरे पर्वतारोहियों के लिए माइल स्टोन बनकर काम करते है जैसे मानों चेतावनी देती है कि आगे रास्ता खराब है, यात्री अपने जोखिम पर यात्रा करें। माउंट एवरेस्ट के डेथ जोन में आज भी 300 से ज्यादा लाशे जमी हुई है। आज आपको International Everest Day 2024 के मौके पर बताएंगे कि आखिर ये माउंट एवरेस्ट का डेथ जॉन क्या है और एवरेस्ट पर फेमस डेथ बॉडी किसकी हैं-

कहां से शुरु होता है एवरेस्ट का डेथ जोन?
माउंट एवरेस्ट समुद्र तल से 8,849 मीटर ( 29,029 फीट ) यानी 8.8 किलोमीटर से ज्यादा ऊंचा है। यानी इतनी ऊंचाई जहां जाने पर आपके शरीर की सारी नसें सिकुड़ने लगनी लगती है। सांसें थमने लगती हैं और दिखना बंद हो जाता है। दिमाग काम करना बंद कर देता है। इस जगह को एवरेस्ट का डेथ जोन (Death Zone) कहते हैं।
डेथ जोन की शुरुआत 8000 मीटर से शुरू हो जाती है। यानी यहां से ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है। कम ऑक्सीजन से शरीर काम करना बंद कर देता है। एक आंकड़े के मुताबिक सबसे ज़्यादा मौत यहां पैर फिसल कर गिरने की वजह से हुई और उसके बाद हायपोथर्मिया यानी ज्यादा ठंड की वजह से दिमाग सुन्न हो जाने पर लोगों की सांसे थम गईं।
क्यों इन लाशों को नीचे नहीं लाया गया?
लोग अक्सर पूछते हैं कि एवरेस्ट पर रेस्क्यू और रिकवरी के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता है? तो आपको बता दें कि एवरेस्ट पर सबसे ऊंची ऊंचाई जहां हेलीकॉप्टर आसानी से उतर सकते हैं, वह कैंप 2 है, जो 21,000 फ़ीट (6,400 मीटर) पर स्थित है। ऊपरी ढलानों पर हवा का घनत्व ज्यादा होने की वजह से हेलीकॉप्टर आम तौर पर काम नहीं कर पाते हैं। एवरेस्ट पर अब तक का सबसे ऊँचा हेलीकॉप्टर रेस्क्यू 2013 में 25,590 फ़ीट (7,800 मीटर) पर शांत मौसम की स्थिति में किया गया था।
1921 से अब तक 200 लाशों को एवरेस्ट से नीचे लाया गया है। लेकिन इस काम में खूब मशक्कत करनी पड़ती है। एवरेस्ट से एक लाश को भी नीचे ज़मीन पर लाने में तकरीबन 30 का खर्चा और इसे उतारने के लिए जो लोग एवरेस्ट पर चढ़ाई करते हैं उनकी जान का भी खतरा रहता है। इस वजह से एवरेस्ट की इंतेज़ामिया कमेटी इन लाशों को वहीं छोड़ आती है। एवरेस्ट के डेथ जोन पर इस वक्त 308 से ज्यादा लाशें जमी हुई हैं, जिन्हें पर्वतारोही माइलस्टोन अपनी मंज़िल तय करते हैं।
एवरेस्ट का खुला कब्रिस्तान रेनबो वैली
एवरेस्ट समिट के ठीक नीचे उत्तरपूर्वी रिज मार्ग के एक क्षेत्र को रेनबो वैली नाम दिया गया है। यह स्थान उत्तरी कोल मार्ग के माध्यम से समिट पर चढ़ने या उतरने वाले पर्वतारोहियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्वाइंट है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस प्वाइंट का नाम यहां जमी हुई पर्वतारोहियों के लाशों के अलग-अलग रंगों के जैकेटों के वजह से पड़ा है।
एवरेस्ट पर सामान्य तापमान माइनस 16 से माइनस 40 तक रहता है। जिस वजह से लाशें सड़ती नहीं हैं। आइए जानते है एवरेस्ट की मील का पत्थर बन चुके फेमस फ्रोजन डेथ बॉडी के बारे में-

ग्रीन बूट
एवरेस्ट में शेवांग पलजोर की डेथ बॉडी को ग्रीन बूट के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1996 में हुए दुर्भाग्यपूर्ण एवरेस्ट अभियान के दौरान अपनी जान गंवा दी थी। ग्रीन बूट्स नाम उनके पैरों में पहने हुए हरे कोफ़्लाच माउटेनिंग बूट के वजह से पड़ा।
ग्रीन बूट्स का शव नॉर्थईस्ट रिज मार्ग पर माइलस्टोन बनकर राहगीरों का रास्ता बताने का काम कर रही है। पलजोर और आईटीबीटी की छह सदस्यीय टीम समिट से कुछ ही दूरी पर बर्फीले तूफ़ान में फंस गई थी। इनमें से तीन सदस्य वापस लौट आए, जबकि पालजोर और दो अन्य पर्वतारोही ने समिट पर जाना जारी रखने का फैसला किया और वे कभी वापस नहीं लौटे।

स्लीपिंग ब्यूटी
स्लीपिंग ब्यूटी के नाम से फेमस हवाई की फ़्रैंकिस आर्सेंटिएव, जिन्होंने मई 1998 में समिट में फतेह हासिल करने के बाद उतरते हुए जान गंवा दी। फ़्रैंकिस आर्सेंटिएव और उनके पति, सर्गेई आर्सेंटिएव ने बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक पहुंचने के बाद उतरते समय, फ़्रैंकिस सर्गेई से अलग हो गई।
वह ठंड और एल्टीट्यूड सिकनेस की वजह से कमजोर हो गई। उज़बेकिस्तान की एक टीम ने उन्हें ऑक्सीजन देकर 800 फ़ीट (244 मीटर) बचाने की कोशिश भी की थी। उसकी गंभीर हालात को देख उन्हें वहीं छोड़ दिया।
2007 में उनका शव मिला था, उनकी लाश पहाड़ पर इस तरह लेटी हुई मिली मानो वो सो रही हो। इसी तरह उनके पति सर्गेई ने भी एवरेस्ट से उतरते वक्त जान गंवा दी। उनकी लाश 1999 में मिली थी।

रॉब हॉल
रॉब हॉल न्यूजीलैंड के एक प्रतिष्ठित पर्वतारोही और एडवेंचर कंसल्टेंट्स के संस्थापक थे। 10-11 मई, 1996 को माउंट एवरेस्ट पर हुई सबसे भयावह त्रासदी में उन्होंने अपने साथी की जान बचाते हुए जान गंवा दी। हॉल का शव माउंट एवरेस्ट के साउथ समिट के पास पड़ी है जो वहां आने वाले पर्वतारोही को आगे का रास्ता बताने का काम कर रही है। रॉब हॉल पर 2016 में आई फेमस हॉलीवुड मूवी 'एवेरस्ट' भी बन चुकी है। ऐसी और भी कई फेमस बॉडीज है जो अलग-अलग प्वाइंट पर माइलस्टोन का काम कर रही हैं।



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