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ATM PIN 4 Digit: जानिए एटीएम पिन में क्यों होते हैं सिर्फ चार डिजिट? ?
बैंकिंग करना आज के समय में बेहद आसान हो गया है। वो जमाने लद गए, जब पैसे जमा करने से लेकर निकालने तक के लिए बैंक जाकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। आज के समय में ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर एटीएम मशीनों ने लोगों की काफी मदद की है। जरूरत पड़ने पर कार्ड की मदद से कुछ ही सेकंड में पैसे आसानी से निकाले जा सकते हैं। इन एटीएम मशीनों का इस्तेमाल हम सभी ने किया है। जब भी हम एटीएम का इस्तेमाल करते हैं तो हमें एक चार डिजिट का पिन कोड उसमें एंटर करना पड़ता है।
ऐसा हम सभी ने कई बार किया है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि एटीएम का पिन सिर्फ चार अंकों का ही क्यों होता है। हालांकि, शुरुआत से ऐसा नहीं था। जब एटीएम मशीनों का आविष्कार हुआ था, उस समय इसके आविष्कारक ने पिन कोड छह अंकों का रखने का मन बनाया था। लेकिन बाद में एक खास वजह के चलते उसने पिन कोड को चार अंकों का ही रखा। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि वास्तव में एटीएम का पिन चार अंकों का ही क्यों होता है-

एटीएम मशीन का ऐसे आया आइडिया
एटीएम मशीन स्कॉटिश इन्वेंटर जॉन शेफर्ड-बैरन के दिमाग की उपज है और इसका इस्तेमाल साल 1967 से किया जा रहा है। एटीएम मशीन के अविष्कार का आइडिया जॉन को बेहद ही अनोखे तरीके से आया। एक बार जॉन शेफर्ड-बैरन नहा रहे थे और उस समय वह एक ऐसी मशीन के बारे में सोच रहे थे जो चॉकलेट बार की जगह कैश दे सके। यही से उन्हें एटीएम मशीन का अविष्कार करने का ख्याल आया। हालांकि, इस दौरान उन्हें यह भी अहसास हुआ कि मशीन को इस तरह बनाया जाना चाहिए, जिससे वह उपयोगकर्ता को सुरक्षित रूप से पहचान सके और इससे लोगों को किसी तरह का नुकसान ना हो। इसलिए, उन्होंने पिन का सुझाव दिया।
एटीएम में चार अंकों का ही पिन कोड क्यों होता है
अब सवाल यह उठता है कि एटीएम में सिर्फ चार अंकों का ही पिन कोड क्यों होता है। वास्तव में जॉन अपने पुराने आर्मी नंबर को ध्यान में रखते हुए पिन कोड को छह अंकों का रखने का मन बनाया था। लेकिन जब उन्होंने यह विचार अपनी पत्नी कैरोलीन से शेयर किया तो उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। कैरोलीन का कहना था कि वह केवल चार अंक ही याद रख सकती है। ऐसे में जॉन को यह समझ में आया कि अगर कैरोलीन को छह अंकों को याद रखने में समस्या हो रही है तो दुनिया के बाकी लोगों को भी यह परेशानी हो सकती है। ऐसे में उन्होंने पिन कोड को केवल चार अंकों का ही रखने का फैसला किया। जिस वजह से वही चार अंक विश्व मानक बन गए।
बनाए जा सकते है 10000 पिन
जॉन ने अपनी पत्नी के सुझाव को मानते हुए एटीएम के पिन को 6 अंकों की जगह 4 अंक करने का फैसला किया। उन्होंने पिन में 0 अंक को भी शामिल किया, जिसका सीधा अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति अपने एटीएम पिन में 0 का इस्तेमाल कर सकता है और वह भी कितनी बार। 4 अंकों के एटीएम पिन को 0000 से 9999 अंकों के बीच सेट किया जाता है। इससे करीबन 10000 अलग-अलग पिन नंबर बनाए जा सकते हैं।



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