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गंगा नदी में क्यों प्रवाहित की जाती हैं अस्थियां, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण भी
Why Do We Immerse the Ashes of the Dead in the Ganga : सनानत धर्म में मां गंगा को मोक्ष दायिनी कहा गया है। माना जाता है कि पृथ्वी के अलावा मां गंगा की दो अन्य धाराएं आकाशगंगा और पाताल में हैं।
हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य में गंगाजल का इस्तेमाल जरुर किया जाता है। इसके अलावा बच्चे के मुंडन के बाल से लेकर मृत्यु के बाद मनुष्य की अस्थियों तक को गंगा में प्रवाहित करने की करोड़ो साल पुरानी परांपरा हैं।

हिंदू देश में मुत्यु के बाद आत्मा को शांति मिल सकें इसके लिए अस्थि विसर्जन के लिए सबसे ज्यादा महत्व गंगा नदी का ही माना जाता है। आइए जानते हैं अस्थियों को गंगा में ही क्यों प्रवाहित करने की परंपरा है और इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक तर्कों को समझते हैं।
आत्मा को शांति मिलती
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अस्थियों को गंगा में प्रावहित करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है तथा पतितपावनी मोक्ष दायिनी गंगा के पवित्र जल के स्पर्श से मृतक की आत्मा के लिए स्वर्ग के दरवाजे खुल जाते हैं। गंगा का निवास स्थान आज भी स्वर्ग माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि गंगातट पर शरीर त्यागने वाले को यमदंड का सामना नहीं करना पड़ता।
आत्मा को मिलता है नया मार्ग
शंख स्मृति एवं कर्म पुराण के अनुसार भी अस्थियों को गंगा में विसर्जन करना ही श्रेष्ठ बताया है। मान्यता है कि मां गंगा में अस्थियां डालने से इंसान के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उससे जुड़ी आत्मा को नया मार्ग मिलता है। हरिद्वार, प्रयागराज, काशी, नासिक, गया आदि ऐसी कई जगह है जहां गंगातट पर विधि विधान से अस्थियों का विसर्जन किया जाता है।
वैज्ञानिक तर्क
वैज्ञानिक परीक्षणों से यह निष्कर्ष मिलता है कि अस्थियों (हड्डियां) में कैल्शियम और फास्फोरस अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है, ये नदी के किनारे की भूमि के लिए खासा उपजाऊ बनाता है। साथ ही यह जलीय जीवों के लिए एक पौष्टिक आहार है। गंगा हमारे देश की सबसे बड़ी नदी है इसके जल से भूमि का बहुत बड़ा भाग सिंचित होता है। इसके जल की उर्वरा शक्ति यानी फर्टिलिटी पॉवर क्षीण न हो, इसके बचाव के लिए अस्थियां प्रवाहित करने की परंपरा रखी गई है।



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