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Friday the 13th: क्यों दुनिया भर में डर का दूसरा नाम बन चुकी है ये तारीख? जानें इसके पीछे का खौफनाक रहस्य!
Friday the 13th : जब भी महीने की 13 तारीख शुक्रवार को आती है, तो दुनिया भर में इसे लेकर एक अलग ही डर और उत्सुकता देखने को मिलती है। "Friday the 13th" यानी शुक्रवार की 13 तारीख को कई पश्चिमी देशों में अशुभ, डरावना और दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता है। इस दिन से जुड़े कई अंधविश्वास हैं, और यह सोशल मीडिया से लेकर फिल्मों तक में डर और रहस्य का प्रतीक बन चुका है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि 13 तारीख और शुक्रवार का मेल पश्चिमी देशों में अशुभ माना जाता है। सैकड़ों सालों से यह मान्यता चली आ रही है कि जब शुक्रवार को 13 तारीख आती है, तो यह दिन किसी अनहोनी, अपशकुन या दुर्भाग्य को बुलावा देता है। यहां तक कि कई लोग इस दिन यात्रा नहीं करते, नया काम शुरू करने से बचते हैं, और कुछ तो घर से बाहर निकलने तक से डरते हैं।

इस बार 13 जून को शुक्रवार आ रहा है, जिस वजह से 'Friday the 13th' एक बार फिर से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। तो आइए जानते हैं कि यह डर कहां से शुरू हुआ और आखिर इस दिन को इतना अशुभ क्यों माना जाता है?
कहां से शुरू हुई यह मान्यता?
भारत में भी कुछ लोग 13 नंबर को अशुभ मानते हैं, लेकिन इसकी जड़ें विदेशी संस्कृति में पाई जाती हैं। हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में 13 नंबर को अशुभ नहीं माना गया है, जबकि पश्चिमी देशों में 13 और शुक्रवार का संयोग अंधविश्वास और भय का पर्याय बन चुका है।
13 नंबर से जुड़ा डर और डरावनी मान्यताएं
- पश्चिमी देशों में 13 नंबर को लेकर इतना डर है कि वहां के कई होटलों में रूम नंबर 13 ही नहीं होता। कई इमारतों में 13वां फ्लोर छोड़ दिया जाता है, 12 के बाद सीधे 14 नंबर का फ्लोर आता है।
- यह डर इस हद तक है कि लोग 13 तारीख को फ्लाइट बुक करने से भी बचते हैं। यूरोप में कई बार इस दिन की हवाई यात्रा का किराया कम होता है क्योंकि लोग इस दिन सफर करने से कतराते हैं।
- फिनलैंड जैसे देश में Friday the 13th को एक खास दिन के रूप में मनाया जाता है जिसे कहा जाता है, नेशनल एक्सिडेंट डे (National Accident Day)। इस दिन लोगों को सतर्क रहने, सुरक्षित ड्राइविंग करने और जोखिम से बचने की सलाह दी जाती है।
- वहीं फ्रांस में खाने की मेज पर 13 कुर्सियों का होना भी अशुभ माना जाता है। यूरोप में कई लोग इस दिन कोई नया काम नहीं शुरू करते।

बाइबिल में भी है इस तारीख का जिक्र
इस दिन को अशुभ मानने की एक मान्यता ईसाई धर्मग्रंथ बाइबिल से भी जुड़ी है। माना जाता है कि ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन सूली पर चढ़ाया गया था। इसके अलावा 'लास्ट सपर' यानी अंतिम भोज में 13 लोग शामिल थे, जिनमें से 13वें व्यक्ति ने यीशु को धोखा दिया था। इसी वजह से 13 और शुक्रवार के मेल को दुर्भाग्यपूर्ण माना गया।
'Friday the 13th' किताब ने बढ़ाया डर
इस अंधविश्वास को फैलाने में एक किताब ने बड़ी भूमिका निभाई। लेखक थॉमस विलियम लॉसन की किताब "Friday the 13th" ने इस तारीख को लेकर डर और दहशत को और गहरा कर दिया। इसमें बताया गया कि कैसे इस दिन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घट सकती हैं और कैसे यह दिन अपशकुन का संकेत है।
हिंदू धर्म में 13 नंबर को माना गया है शुभ
भारत और हिंदू धर्म में 13 तारीख को कभी अशुभ नहीं माना गया। बल्कि यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। हर महीने के हिंदू पंचांग के अनुसार 13वां दिन 'त्रयोदशी' कहलाता है, जिसे प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव की पूजा और साधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां तक कि महाशिवरात्रि भी माघ महीने की त्रयोदशी तिथि को आती है। इसके अलावा थाईलैंड में भी 13 अप्रैल को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। प्राचीन यूनान (ग्रीस) की पौराणिक कथाओं में 13वें
अंधविश्वास जो Friday the 13th से जुड़े हैं
इस दिन कई अंधविश्वासों को माना जाता है, जो वर्षों से लोगों में डर पैदा करते आ रहे हैं, इस दिन लोगों को इन चीजों से बचने की सलाह दी जाती है-
- कहा जाता है कि इस दिन अगर शीशा टूट जाएं, तो 7 साल की बदकिस्मती आती है।
- सीढ़ी के नीचे से गुजरना भी इस दिन अशुभ माना जाता है, मान्यता है कि यह जीवन के त्रिकोण को तोड़ता है और दुर्भाग्य लाता है।
- अगर गलती से नमक गिर जाएं, तो यह अशुभ माना जाता है। बचाव के लिए लोग बाईं तरफ कंधे के ऊपर नमक फेंकते हैं।
- इस दिन काली बिल्ली का रास्ता काट दें, तो बुरा संकेत माना जाता है।
- फर्श की दरारों पर पैर रखना यानी "step on a crack, break your mother's back" जैसा अंधविश्वास लोकप्रिय है।



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