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बजरंग पुनिया ने लौटाया पद्मश्री अवॉर्ड, जानिए क्या है पुरस्कार लौटाने के नियम?
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह WFI के नए अध्यक्ष चुने गए हैं। इसके विरोध में ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पुनिया ने शुक्रवार, 22 दिसंबर को अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया। इसके एक दिन बाद ही 23 दिसंबर को पहलवान वीरेंद्र सिंह यादव ने भी अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटाने की बात कही है। 'गूंगा पहलवान' के नाम से मशहूर वीरेंद्र ने 2005 समर डिफलंपिक्स में स्वर्ण पदक जीता था।

हालांकि, ऐसा नहीं है कि बजरंग पुनिया या वीरेंद्र सिंह यादव अवॉर्ड लौटाने वाले पहले शख्स हैं। इस लिस्ट में कई नामें शामिल हैं, जो अपना अवॉर्ड लौटाने का ऐलान कर चुके हैं।
लेकिन क्या आपने सोचा है कि इतना बड़ा सम्मान मिलने के बाद इसे लौटाने की क्या प्रक्रिया होती है? क्या केंद्र सरकार पुरस्कार लौटाने के बाद उसे वापस भी ले लेती है? आपको बता दें कि सरकार पुरस्कार वापस नहीं लेती है और न ही पुरस्कार वापस लेने का कोई नियम है। आइए जानते हैं इस बारे में?
ToI की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा कि पुरस्कार विजेता किसी भी कारण से पुरस्कार वापस करने के अपने फैसले की घोषणा कर सकता है लेकिन पद्म पुरस्कार को लेकर कोई नियम नहीं है। पुरस्कारों को रद्द करने की अनुमति केवल राष्ट्रपति द्वारा ही दी जा सकती है।
कैसे दिए जाते हैं अवार्ड?
रिपोर्ट के मुताबिक पुरस्कार रद्द होने तक पुरस्कार विजेता का नाम राष्ट्रपति के निर्देशों के तहत बनाए गए पद्म पुरस्कार विजेताओं के रजिस्टर में रहता है। पद्म पुरस्कार रद्द होने का अब तक कोई इतिहास नहीं है। साल 2018 में तत्कालीन गृह मंत्री ने राज्यसभा में बताया था कि पुरस्कार देश की जांच एजेंसियों द्वारा व्यक्तियों के चरित्र के सत्यापन के बाद ही दिए जाते हैं।
पुरुस्कार लौटना से नहीं छीनता है सम्मान
अब आप इसे इस बात से समझाइए पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य में किसानों के विरोध के मद्देनजर 2020 में अपना पद्म विभूषण लौटा दिया था। बाद में कानूनों को निरस्त कर दिया गया। हालांकि, बादल का नाम अभी भी पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल है।
ये लोग लौटा चुके हैं सम्मान
- पत्रकार और लेखक खुशवंत सिंह को 1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था लेकिन उन्होंने 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुए 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के विरोध में इसे वापस कर दिया।
- रामकृष्ण मिशन के स्वामी रंगनाथानंद ने साल 2000 में पुरस्कार अस्वीकार कर दिया था क्योंकि यह उन्हें एक व्यक्ति के रूप में प्रदान किया गया था, बल्कि उनके मिशन को नहीं।
- इतिहासकार रोमिला थापर ने सैद्धांतिक मतभेद की वजह से 1992 में और बाद में 2005 में दो बार पद्म भूषण लेने से इनकार कर दिया था।
- विद्वान एमएम कलबुर्गी की हत्या के विरोध में सितंबर से नवंबर 2015 के बीच लेखकों और बुद्धिजीवियों द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के 33 मामले सामने आए थे। जिसकी शुरुआत हिंदी लेखक उदय प्रकाश के साथ हुई थी।
- जनवरी 2022 में पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और CPI(M) नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य ने घोषणा के कुछ घंटों बाद पद्म भूषण सम्मान ठुकरा दिया था।



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