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बच्चों में बोतल की आदत छुड़ाना क्यों जरूरी?

चिकित्सकों के मुताबिक शिशुओं के शरीर में बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं के प्रवेश का सबसे बड़ा माध्यम दूध की बोतल होता है। आम तौर पर माता-पिता यह सोचते हैं, कि बोतल को अच्छ से धोकर और स्ट्रलाइज्ड करने के बाद उससे दूध देने से कोई नुकसान नहीं होता। जबकि यह पूरी तरह गलत है। पानी में उबालने के बाद भी तमाम कीटाणु बोतल की निप्पल और ढक्कन के बीच में छिपे रहते हैं।
बच्चो में होती खून की कमी
वैज्ञानिकों के मुताबिक लंबे समय तक बच्चों के बोतल से दूध पीने से उनके शरीर में लौह यानी आयरन तत्व की कमी हो जाती है। हाल ही में हुए एक शोध में पाया गया कि दो वर्ष उम्र के बच्चों में बोतल के इस्तेमाल से आयरन कमी भारी मात्रा में देखी गई। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे को 15 महीने की आयु तक बच्चे में बोतल की आदत छुड़वा देनी चाहिए।
आयरन की कमी होने का मतलब बच्चें में खून की कमी हो जाती है। बच्चे कमजोर पड़ जाते हैं।



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