Latest Updates
-
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा
नन्हें बच्चों को ये 8 दवाइयां देने से बचें
जब भी आप नवजात शिशु या नन्हें बच्चे को दवाई दें, तो पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। नवजात बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है, जिससे वह आसानी से बीमारी की चपेट में आ जाएंगे। यहां तक कि प्रकृतिक दवाई या हर्बल देते समय भी माता-पिता को सावधानी बरतनी चाहिए।
नन्हें बच्चे अक्सर खांसी और जुखाम की चपेट में आ जाते हैं। पर अगर आप उन्हें इसके लिए दवाई देंगे तो यह खतरनाक हो सकता है। अमेरिकी बाल चिकित्सा अकादमी के अनुसार ड्रग प्रबंधन ने इसे नवजात बच्चों में प्रभावी नहीं पाया है।
ऐसे ड्रग्स जिसे छोटे बच्चों को देने से बचना चाहिए

1. ऐस्पिरिन
डॉक्टर के निर्देश के बिना अपने बच्चों को ऐस्पिरिन वाली दवाइयां न दें। ऐस्पिरिन से रेयेज सिंड्रोम हो सकता है, जिससे किडनी और ब्रेन को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

2. खांसी और जुखाम की दवाई
अमेरिकी बाल चिकित्सा अकादमी के बाल चिकित्सक छोटे बच्चों को खांसी और जुखाम की दवाई देने के पक्ष में नहीं है। ऐसी दवाइयों से अधिकतर मौकों पर बीमारी तो दूर नहीं होती, इसके उलट ओवरडोज से इसका नुकसान ही उठाना पड़ता है। इसके साइड इफेक्ट में सुस्ती, एबडोमिनल दर्द, दरोदा और हृदय गति का बढ़ जाना है। हर साल हजारों बच्चों को घर पर खांसी और जुखाम की दवाई देने के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है।

3. मिचली की दवाई
डॉक्टर की सलाह के बगैर अपने बच्चों को एंटी-नॉसिया दवाई न दें। नॉसिया यानी मिचली का जो लक्षण बच्चों में देखा गया है वह अस्थाई ही होता है और उनका शरीर बिना दवाई के भी इससे उबरने में समर्थ होता है। वहीं एंटी-नॉसिया दवाई देने से परेशानी और बढ़ सकती है। अगर बच्चा उल्टी कर रहा है, तो उसे डिहाइड्रेशन से बचाने लिए पर्याप्त तरल पदार्थ दें।

बड़ों की दवाई
ऐसा भी न करें कि नन्हें बच्चों को व्यस्कों की दवाई कम मात्रा में दे दें। नवजात बच्चों की दवाइयों का घनत्व आमतौर पर व्यस्कों की दवाइयों से ज्यादा होता है। इसलिए नन्हें बच्चे को ऐसी दवाई देने में सावधानी बरतें।

5. दूसरे बच्चों की दवाई
डॉक्टर ने जो दवाई दूसरे बच्चे के लिए लिखी है वह किसी और को न दें। यह खतरनाक हो सकता है। अपने बच्चे को वही दवाई दें जो डॉक्टर ने उनके लिए लिखा हो।

6. एक्सपायर्ड दवाई
जब दवाई एक्सपायरी डेट को पार कर जाए, तो उसे जल्द से जल्द फेंक दें। साथ ही जिन दवाइयों का रंग बदल गया हो, उससे भी दूर रहें। एक्सपायरी के बाद दवाई का न सिर्फ प्रभाव खत्म हो जाता है, बल्कि वह खतरनाक भी हो सकता है।

7. अत्यधिक एसेटामीनोफेन मिली दवाई
कई दवाइयां में बुखार और दर्द को कम करने के लिए एसेटामीनोफेन होता है। नवजात बच्चों को ऐसी दवाई देने से बचें। बेहतर होगा कि इसके लिए आप अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

8. चबाने वाली दवाई
बच्चों को चबाने वाली दवाई न दें। ये गले में फंस सकता है। अगर आपका बच्चा कठोर भोजन करने लगा है तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें कि क्या टेबलेट को खाने में मिला कर दिया जा सकता है।



Click it and Unblock the Notifications
