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शिशु के रोने का क्या मतलब होता है?
जैसे जैसे शिशु बड़ा होता जाता है वैसे ही वह अपनी भावनाओं को अपने परिवार के बीच में व्यक्त करने लग जाता है। उसे हर किसी के इशारे समझ में आने लगते हैं और वो अपने ही अंदाज में उसके जवाब भी देने लग जाता है। अगर आप नई नई मां बनी है तो आपको अपने शिशु के साथ बहुत सा समय बिताने पर पता चलेगा कि आपका शिशु आपसे क्या कहना चाहता है।
जब आपका बच्चा खुश होगा तो वह आपको देख कर हंस देगा और यदि उसे कोई समस्या हो रही है तो वह उसे बोलने के बजाए रो कर बताएगा। ऐसे में आपको बच्चे का रोना समझना होगा जिसके लिये हम आपकी मदद करेगें। आइये जानते हैं कि बच्चे के रोने का क्या मतलब होता है।

1. बच्चा बीमार है- अगर बच्चे को दूध पिलााने पर भी वह न चुप हो तो समझ जाएं कि वह बीमार है। इसके लिये आपको उसके शरीर को चेक करना होगा कि कहीं उसे तेज बुखार, रैश, खून या सांस लेने में तकलीफ तो नहीं।
2. बच्चे को भूख लगीबच्चे की - अगर आपने बच्चे की गीली नैपी बदल दी है और फिर भी वह रो रहा है तो उसे भूख लगी है।
3. बच्चे की डाइपर चेंज करने का समय है- जब बच्चा रोता है तो पहली चीज करें कि उसकी डाइपर चेक कर लें। गीली और गंदी डाइपर से बच्चे परेशान हो जाते हैं और रो कर उसे बदलने की डिमांड करते हैं। अगर आप कपड़े का डाइपर यूज कर रही हैं तो उसे समय समय पर चेंज करें।
4. बच्चे की पीठ सहलाएं- दूध पिलाने के बाद बच्चों के पेट में गैस बन जाती है इसलिये कई बार बच्चे खुद ही रो कर जताते हैं आप उन्हें पीठ पर सहलाएं। इसलिये उन्हें हमेशा दूध पिलाने के बाद उनकी पीठ सहलाएं ।
5. कान में संक्रमण - अगर बच्चे तेजी से रो रहे हैं और साथ में कान खींच रहे हैं तो समझ जाएं कि उनके कान में संक्रमण है। इससे आपके बच्चे को खाने पीने में परेशानी के साथ दर्द भी झेलना पड़ सकता है।
6. बच्चे को मां चाहिये- कभी कभार बच्चे केवल अपनी मां का स्पर्श चाहते हैं। इससे उन्हें सुरक्षित होने का एहसास होता है।



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