नवजात शिशुओं के लिए कितना जरूरी है हेपेटाइटिस बी वैक्‍सीन

By Lekhaka

हेपेटाइटिस बी एक ऐसा वायरस है जो लिवर को नुकसान पहुंचाकर सूजन पैदा करता है। हेपेटाइटिस बी शारीरिक द्रव्‍यों और संक्रमित खून के कारण फैलता है। ये या तो तीव्र होता है या फिर घातक। शुरुआती समय में हेपेटाइटिस बी का पता चले तो इसे तीव्र कहते हैं।

कई मामलों में युवाओं में इस वायरस के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन उनका शरीर इस वायरस से लड़कर उसे खत्‍म कर देता है।

युवाओं के रक्‍त में हमेशा हेपेटाइटिस बी एंटीबॉडी होता है और शरीर ऐसे में दोबारा इस संक्रमण से संक्रमित नहीं हो पाता है। जिन लोगों को इस संक्रमण के 6 महीने में भी इससे छुटकारा नहीं मिलता उस स्थिति को घातक कहते हैं।

Hepatitis B Vaccination For Newborns

नवजात शिशुओं में हेपेटाइटिस बी वैक्‍सीनेशन ही एकमात्र तरीका है। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि नवजात शिशुओं में ये वैक्‍सीनेशन लगाने से क्‍या फायदा होता है और बच्‍चों के शरीर पर इसका प्रभाव पड़ता है। शिशुओं को हेपेटाइटिस बी का वैक्‍सीनेशन देना आपकी इच्‍छा पर निर्भर करता है।

क्‍या आपके बच्‍चे को है हेपेटाइटिस बी का खतरा ?
अमे‍रिका में घातक हेपेटाइटिस बी से पीडित 50 प्रतिशत से अधिक लोग एशिया और प्रशांत द्वीप के मूल निवासी हैं। हेपेटाइटिस बी खांसी, जुकाम और अन्‍य तरह के किसी भी काम से नहीं फैलता है। आइए जानते हैं कि हेपेटाइटिस बी कैसे फैलता है।

- अगर आपके बच्‍चे ने कैजुअल सेक्‍स किया हो?

- अगर आपके बच्‍चे ने किसी के साथ ड्रग्‍स की सुईंयां शेयर की हों?

- अगर आपका बच्‍चा किसी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित जगह से आया हो?

- अगर मां को हेपेटाइटिस बी हो ?

2009 से 2013 तक इकट्ठी की गई जानकारी के अनुसार ड्रग्‍स लेने के लिए प्रयोग किए गए इंजेक्‍शन से सबसे ज्‍यादा ये संक्रमण फैलता है।

वहीं नवजात बच्‍चों में सबसे ज्‍यादा हेपेटाइटिस बी अपनी मां से फैलता है।

क्‍या मां से फैलता है नवजात बच्‍चों में हेपेटाइटिस बी

जैसा कि हम पहले भी बता चुके हैं कि नवजात बच्‍चों में हेपेटाइटिस बी संक्रमण फैलने का खतरा बहुत कम होता है इसलिए जन्‍म के समय उन्‍हें ये वैक्‍सीनेशन देने की बहुत ज्‍यादा जरूरत नहीं है। वहीं दूसरी ओर बच्‍चों का इम्‍यून सिस्‍टम इतना मजबूत नहीं होता कि वो इस वैक्‍सीन की पॉवर को झेल पाएं। प्रीमैच्‍योर शिशु में तो इम्‍यून सिस्‍टम ठीक तरह से विकसित भी नहीं हुआ होता। जब डॉक्‍टर नॉर्मल शिशु की ही तरह प्रीमैच्‍योर शिशु को भी एक ही वैक्‍सीन लगाते हैं तो वो बच्‍चा इसे आसानी से झेल नहीं पाता है। प्रीमैच्‍योर बच्‍चों के लिए ये वैक्‍सीन काफी मुश्किल होता है।

कैसे असर करता है वैक्‍सीन

कई वर्षों की रिपोर्ट के अनुसार वैक्‍सीन लेने के कुछ समय बाद इम्‍युनिटी बढ जाती है। अध्‍ययन के अनुसार कई सालों बाद तक शरीर में एंटीबॉडी उपलब्‍ध रहता है। लेकिन अगर ध्‍यान से देखा जाए तो इन लोगों में इम्‍युनिटी की कमी होती है। जिन लोगों में एंटी-एचबीएस का स्‍तर 10 IU/mL से अधिक होता है, उनका इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत कहलाता है।

2014 में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी वैक्‍सीनेशन देने के बाद केवल 24 प्रतिशत किशोरों में ही किशोरावस्‍था तक एंटी-एचबी स्‍तर सामान्‍य रहता है।

नवजात शिशुओं में इम्‍यून सिस्‍टम

शिशुओं में जन्‍म के कुछ समय बाद तक इम्‍यून सिस्‍टम विकसित होता रहता है और वो बाहरी चीज़ों के साथ तालमेल बनाने के लिए तैयार होता है।

बच्‍चों का इम्‍यून सिस्‍टम अधिकतर स्‍तनपान के द्वारा ही विकसित होता है। मां के दूध में कुछ ऐसे एंटीबॉडी होते हैं जो नवजात को इम्‍यून सिस्‍टम विकसित करने में मदद करते हैं।

अगर आप अपने बच्‍चे को हेपेटाइटिस बी का वैक्‍सीन लगवाने की सोच रहे हैं तो उससे पहले उस वैक्‍सीन के बारे में अच्‍छी तरह से पढ़ लें और उसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्‍त कर लें। अपने बच्‍चे को वैक्‍सीन लगवाने से पहले डॉक्‍टर से इसके बारे में सब कुछ जान लें।

Story first published: Wednesday, August 2, 2017, 11:00 [IST]
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