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शिशु की आँखों के आस पास सफ़ेद दाने कहीं मिलिया तो नहीं?
नवजात शिशुओं में त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं होती हैं जिनमें लाल चकत्ते और बम्प्स बहुत ही आम होते हैं और कई बार ये हानिकारक नहीं होते। अकसर हम बच्चे की नाक, ठोड़ी, ऊपरी गाल पर छोटे सफ़ेद बम्प्स देखते हैं जो शिशु के जन्म के दो या तीन हफ़्तों के बाद उभरने लगते हैं। इसे मिलिया कहते हैं।

क्या है मिलिया?
मिलिया त्वचा से जुड़ी समस्या है जो छोटे सफेद और पीले रंग के बम्प्स के रूप में नवजात शिशु की नाक और ठोड़ी पर निकल आते हैं। ये आमतौर पर समूहों में पाए जाते हैं। इस तरह के बम्प्स की संख्या कम या ज़्यादा भी हो सकती है। कुछ बच्चों में मिलिया मसूड़ों में या फिर मुँह के ऊपरी हिस्से में भी हो जाता है। यह बच्चों को किसी भी रूप में प्रभावित नहीं करता।
मिलिया एक सामान्य स्थिति होती है जो तकरीबन 40 से 50 फीसदी नवजात शिशुओं को हो जाती है। इसमें किसी भी तरह का दर्द नहीं होता और न ही यह हानिकारक होता है। मिलिया केवल बच्चों को नहीं बल्कि बड़ों को भी हो सकता है।

नवजात शिशुओं में मिलिया के कारण
मिलिया केराटिन के स्किन की सतह में फंस जाने के कारण होता है। केराटिन वह प्रोटीन है जो हमारे स्किन और बालों के टिशू में पाया जाता है। जब डेड स्किन सेल्स हटने की बजाए स्किन की परत में ही फंस जाते हैं उस स्थिति में भी मिलिया हो जाता है।
बच्चों में तेल की ग्रंथियां विकसित हो रही होती है। ये डेड स्किन को पूरी तरह से हटने नहीं देती जिसके कारण यह स्किन की सतह में ही फंस जाते हैं और छोटे सफ़ेद बम्प्स निकल आते हैं जिसे मिलियम कहते हैं। इस तरह के बम्प्स को समूह में हम मिलिया कहते हैं।

मिलिया के लक्षण
आमतौर पर मिलिया नाक और ठोड़ी पर होता है। यह सफ़ेद या पीला रंग का हो सकता है हालांकि इसमें किसी तरह की खुजली नहीं होती लेकिन यदि इन्हें रगड़ा गया तो ये लाल होने के साथ और भी बढ़ सकते हैं। कुछ मामलों में मिलिया गालों के ऊपरी हिस्सों और पलकों पर भी देखा गया है।
नवजात शिशु में बांह और पैरों के ऊपरी हिस्सों में भी मिलिया हो सकता है। यह बच्चों में होने वाले एक्ने से बिल्कुल अलग होता है। कुछ बच्चों का जन्म मिलिया के साथ ही होता है। वहीं कुछ बच्चों में यह जन्म के 2 या 3 हफ्ते बाद देखने को मिलता है।

क्या मिलिया अपने आप ठीक हो सकता है?
समय के साथ मिलिया अपने आप ही ठीक हो जाता है। इसके लिए किसी भी तरह का कोई क्रीम या ऑइंटमेंट इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इस तरह की चीज़ें इसे और भी बढ़ा सकती है।

मिलिया में भूलकर न करें यह सब
1. अगर आपके बच्चे को मिलिया है तो बम्प्स को दबाएं नहीं।
2. कपडे से रगड़े नहीं।
3. मिलिया में खुजली नहीं होती ना ही यह छूने से फैलता है इसलिए इसे रोग नहीं कहा जा सकता।
4. पेरेंट्स मिलिया को दूसरी स्किन की समस्याओं से जोड़ने लगते हैं जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता लेकिन बड़ों में यह स्किन से संबंधित परेशानी के कारण हो सकता है।

मिलिया का उपचार
मिलिया का कोई उपचार नहीं है क्योंकि यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। नवजात बच्चों में यह कुछ हफ़्तों बाद खुद ही गायब हो जाता है। कुछ बच्चों का जन्म मिलिया के साथ ही होता है ऐसे में इसे ठीक होने में कम से कम दो महीने लग जाते हैं।
मिलिया कोई रोग नहीं है लेकिन फिर भी यदि आप अपने बच्चे की त्वचा को लेकर परेशान हैं तो फिर हम आपको कुछ चीज़ें बताएंगे जिनसे आपको यह समझने में आसानी होगी कि आपको डॉक्टर की ज़रुरत है या नहीं।
1. अगर बम्प्स तेज़ गति से बढ़ रहे हैं तो बच्चे को असहज महसूस हो सकता है।
2. मिलिया बम्प्स आमतौर पर सफ़ेद और पीले रंग के होते हैं। लाल और चटक बम्प्स किसी अन्य स्किन से जुड़ी समस्या के कारण हो सकते हैं।
3. यदि बम्प्स को छूने पर आपके बच्चे को दर्द हो रहा है तो फ़ौरन अपने डॉक्टर से सलाह लें।
4. मिलिया बम्प्स कुछ हफ़्तों या फिर ज़्यादा से ज़्यादा दो महीने में ठीक हो जाते हैं। अगर इसके बाद भी कोई सुधार नहीं नज़र आता तो इसका मतलब है आपको अपने डॉक्टर से इस विषय में बात करनी चाहिए।
बच्चों में स्किन प्रॉब्लम होती रहती है। इनमें से अधिकांश अपने आप ही ठीक हो जाती है। इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं होती इसलिए अगर ऐसी कोई समस्या है भी तो आप ज़्यादा परेशान न हो। ये समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाते हैं।



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