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जब ठोस आहार के लिए शिशु न हो तैयार तो मिलते हैं ये संकेत
अपने बच्चे को पहली बार कोई ठोस आहार देना बहुत मुश्किल काम होता है लेकिन क्या आप जानती हैं कि इसके लिए सही समय क्या होता है। शिशु से आपको ऐसे कई संकेत मिल सकते हैं जिनसे ये पता चलता है कि अब वो ठोस आहार लेने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन कुछ गलत संकेतों की वजह से माता-पिता को लगने लगता है कि उनका शिशु ठोस आहार के लिए तैयार है और वो इसे खिलाना शुरु कर देते हैं। तो चलिए जानते हैं उन गलत संकेतों के बारे में जो आपको गुमराह कर सकते हैं।

वजन बढ़ना
आपने कई लोगों से ये सुना होगा कि अगर शिशु का वजन पहले के मुकाबले दोगुना हो जाए तो उसे ठोस आहार देना शुरु कर देना चाहिए। लेकिन ऐसा हर मामले में जरूरी नहीं होता है। कई बच्चों का जन्म के बाद महज 3 से 4 महीनों में ही वजन बढ़ जाता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि वो बाकी चीजों को खाने के लिए तैयार है। इस समय पर ठोस आहार शुरु करना जल्दबाजी है। वजन बढ़ने का इससे कोई लेना-देना नहीं है। 6 महीने के बच्चे को ठोस आहार खिलाना सही रहता है।

धीरे-धीरे वजन बढ़ना
जन्म के बाद शुरुआती महीनों में शिशु का वजन तेजी से बढ़ता है और इसके बाद वजन बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो जाती है। कई माता-पिता को यही चिंता रहती है कि कहीं उनके शिशु में पोषण की कमी ना हो जाए। इस वजह से वो अपने शिशु को ठोस आहार देना जल्दी शुरु कर देते हैं। 2 से 3 महीने के बाद वजन बढ़ने की गति में कमी आना सामान्य बात है।

दांतों का स्वरूप
कभी-कभी माता पिता को कहा जाता है कि जब बच्चे के दांत आना शुरु हो जाए तो उसे ठोस आहार देना आरंभ कर देना चाहिए लेकिन ऐसा करना गलत है। कुछ बच्चों के दांत जल्दी निकलते हैं तो कुछ बच्चों को समय लगता है।

ये है ठोस आहार देने के सही संकेत:
जब शिशु 6 महीने का हो जाए
अगर शिशु बिना सहारे के बैठ ना पा रहा हो
अगर शिशु ने खाने की चीजों को देखकर जीभ खींचना छोड़ दिया है



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