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आखिर क्यों अधिकतर मांएं करवाती हैं 'ड्रीम फीडिंग'
हम बड़ों की तरह, बच्चे भी कभी कभार रात भर आराम से नहीं सो पाते। जैसे बड़े अकसर, पानी पीने के लिए या टॉयलट के लिए उठते हैं। ठीक इसी तरह बच्चे भी नींद में जागते हैं, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाते और रोने लगते हैं। ऐसे में अधिकतर मांओं की एक कारगार ट्रिक होती है 'ड्रीम फीडिंग', जिसमें बच्चे को नींद में दूध पिलाकर फिर से सुला दिया जाता है, ताकि वह एक बार फिर से सो जाएं और सपनों की दुनिया की सैर करें।
तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है ड्रिम फीडिंग? क्या हैं इसके फायदें? कैसे करती है ये काम? और क्या है इसका सही तरीका?

आखिर क्या है ड्रीम फीडिंग?
जैसे कि शाब्दिक अर्थ से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को दूध पिलाने की इस ट्रिक में नींद में ही दूध पिला दिया जाता है, जब बच्चे सपनों में खोए हुए होते हैं। इसी वजह से बच्चे लंबे टाइम तक गहरी नींद में शांति से सोते हैं। यही वजह है कि दूध पिलाने की यह ट्रिक अधिकांश मां अपनाती हैं।

आखिर क्यों है फायदेमंद?
यह आपकी पर्सनल च्वाइस है कि आप बच्चे को नींद में दूध पिलाना चाहती हैं या नहीं। लेकिन इस विषय पर हुई बहुत सी शोध में खुलासा हो चुका है कि रात के 10 बजे से 12 बजे तक के बीच दूध पिलाने की वजह से बच्चे गहरी नींद में सोते हैं। इसी वजह से मां की भी नींद पूरी हो जाती है। दूध पीने की वजह से बच्चे का पेट भरा होता है और उसकी नींद खराब नहीं होती और इसी वजह से मां को रात में बार बार जागने की जरूरत नहीं पड़ती है। नींद में ही दूध पिलाने की यह ट्रिक अकसर सभी मांओं के लिए इसलिए काम कर जाती है, क्योंकि बच्चों में निपल सक करने की प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है इसी वजह से वह दूध आसानी से पी लेते हैं।

मिलता है पूरा न्यूट्रिशियन
ड्रीम फीडिंग के जरिए बच्चों की हेल्थ को बहुत से फायदे होते हैं। पहला फायदा तो यही है कि इससे बच्चा गहरी और लंबी नींद लेता है। दूसरा इस ट्रिक से बच्चों को नींद में एक्स्ट्रा कैलोरीज भी मिल जाती है, जो उनके लिए आवश्यक होती है। इसी के साथ बच्चे को जब एक बार ड्रीम फीडिंग की आदत हो जाती है तो वह रात को कम खाता है और जिससे दिन की डाइट अच्छी हो जाती है।

क्या है सही तरीका
नींद में बच्चे को दूध पीलाने की यह ट्रिक आपकी तभी तक फायदेमंद है जब आप उसे सही तरीके से फॉलो करें। पहली बात तो यह कि आप खुद सोने से पहले उसे दूध पिला सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप आधी रात को सो रही हैं तो बच्चे को भी तभी दूध पिलाएं। इससे बच्चे का फीडिंग शेड्यूल और नींद दोनों ही गड़बड़ा जाता है। कोशिश करें कि बच्चे को 10 से 11:30 तक दूध पिला दें क्योंकि शुरू के कुछ घंटे बच्चे बिल्कुल अच्छी गहरी नींद में सोते हैं, ऐसे में उन्हें दूध पिलाते वक्त वह नींद में ही सुस्त रहते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि बच्चे से बात करें, उसे कडल करें ताकि वह हल्के हल्के होश में आ जाएं और तभी बच्चे को दूध पिला दें।



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