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कैसे निपटे प्रेगनेंसी के डर से?
गर्भवस्था को हम खुशी के साथ जोड़ते हैं क्योंकि घर में एक नए महमान के आने से हमारी खुशियां दोगुनी हो जाती हैं। लेकिन कई सारी महिलाएं प्रसव और उससे पहले के दौर से काफी डरी हुई रहती हैं, इसलिये वे अपनी प्रेगनेंसी कई समय तक टालती रहती हैं। हांलकी प्रेगनेंसी का यह डर कई महिलाओं में आम होता है और इस डर के पीछे कोई और नहीं बल्कि दिमागी डर छुपा होता है। आइये जानते हैं इस डर से किस तरहसे निपटा जा सकता है।

प्रेगनेंसी का डर क्यों?
1. प्रेगनेंसी के डर को टोकोफोबिया कहते हैं, जो कि सुनने में बहुत ही अच्छा नाम लगता है। लेकिन यह किसी भी आम फोबिया की ही तरह होता है।
2. जिस तरह से लोगो को सांप, मकड़ी या फिर ऊंचाई से डर लगता है उसी तरह से महिलाओं को बच्चा जनने से डर लगता है। इसमें खूब सारे खून को सोंच कर अधिकतर महिलाएं डर जाती हैं।
3. कई महिलाएं प्रसव को लेकर इतनी डरी हुई होती हैं कि वे अपनी 40 तक की उम्र पार हो जाने के बाद भी प्रेगनेंट नहीं होती। ऐसी महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी को हर समय टालती रहती हैं क्योंकि उनके दिमाग में यह डर बहुत ज्यादा बैठ जाता है।
4. इस डर के पीछे बहुत सारा कारण छुपा होता है। बच्चा न पैदा करने के पीछे हर महिला का अपना अलग ही कारण होता है। कई महिलाएं तो अपनी बॉडी की शेप को लेकर ही डर जाती हैं, कि अगर उनका वहीं सुडौल शेप दुबारा न मिल पाया तो क्या होगा।
5. कुछ महिलाएं इसलिये डरती हैं कि मां बनने के बाद उनके पार्टनर उनसे पहले जैसा प्यार नहीं करेंगे, जितना वे शादी के बाद किया करते थे। इसके अलावा कुछ का मानना है कि घर में बच्चा आ जाने से उनकी पूरी दिनचर्या में बदलाव आ जाएगा।
6. लेकिन महिलाओं को जो सबसे महिलाओं को डराता है वह है प्रसव के दौरान का। आप प्रेगनेंसी में होने वाले डर के बारे में जितना लोगो से सुनती हैं, आप उतना ही ज्यादा डरती हैं।
कैसे निपटे इस डर से?
- प्रेगनेंसी में फ्रिक या चिंता करना प्राकृतिक होता है, जिसका कोई इलाज नहीं है। इस चिंता को दूर करने के लिये आपको किसी अच्छे काउंसलर या फिर उन महिलाओं से बात करनी चाहिये जो इस दौर से गुजर चुकी हों।
- अगर आपकी बीवी इस डर से प्रभावित है, तो उसे एक अच्छे जीवन साथी होने का भरोसा जताएं। उन्हें बताएं कि आप उनकी इस मुश्किल और पीड़ादायक घड़ी में शुरु से आखिर तक साथ निभाएंगे।
- बच्चा होने से संबधित जानकारी के बारे में बुरे लोगो से पूछने की बजाए अच्छा होगा कि आप टीवी या फिर अच्छी किताबों में पढ़ कर जानकारी हांसिल करें। आपको तो इस बात से खुश होना चाहिये कि प्रेगनेंसी के समय आप आराम से बिना किसी चिंता के जितनी मर्जी उतनी कैलोरी का खाना खा सकती हैं।
- आपको इस पॉजिटिव सोंच की ओर भी ध्यान देना चाहिये कि अगर इस दुनियां में बच्चा लाना खुशी की बात नहीं होती, तो बहुत से कपल्स यह काम न करते। जब पुराने जमाने में महिलाएं बिना किसी मेडिकल हेल्प के प्रसव के दौर से आराम से गुजर जाती थीं, तो आपको तो इतनी सारी मेडिकल सुविधा उपलब्ध है।



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