Divyanka Tripathi के घर से आई डबल गुडन्यूज, Vivek Dahiya ने शेयर की जुड़वां बेटों के जन्म की खुशखबरी

Divyanka Tripathi Blessed With Twins Baby Boy: टीवी जगत के सबसे पसंदीदा और आदर्श कपल्स में से एक दिव्यांका त्रिपाठी (Divyanka Tripathi) और विवेक दहिया (Vivek Dahiya) के घर शादी के पूरे 10 साल बाद बेहद खूबसूरत और डबल खुशियां आई हैं। 'ये है मोहब्बतें' फेम एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी 40 की उम्र में मां बन गई हैं और उन्होंने दो प्यारे-प्यारे जुड़वां बेटों (Twin Baby Boys) को जन्म दिया है। विवेक दहिया ने सोशल मीडिया पर इस डबल गुडन्यूज को फैंस के साथ साझा किया है, जिसके बाद से ही टीवी इंडस्ट्री और फैंस के बीच जश्न का माहौल है। हर कोई इस स्टार कपल को माता-पिता बनने की बधाइयां दे रहा है। लेकिन इस बड़ी खुशखबरी के साथ ही फैंस और आम लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता भी बढ़ गई है कि जुड़वां बच्चे होने के पीछे का क्या साइंस है। आइए जानते हैं कि मेडिकल साइंस के अनुसार महिला के गर्भ में ट्विंस (Twins) कैसे बनते हैं।

दिव्यांका और विवेक के घर गूंजी डबल किलकारी

विवेक दहिया और दिव्यांका त्रिपाठी की जिंदगी का नया अध्याय शुरू हो गया है वो अब एक साथ 2 बेटों के पेरेंट्स बन गए हैं। खुद कपल ने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम हैंडल पर ये खुशी शेयर की है। कपल ने नीले रंग के कपड़ों में दो बच्चों की फोटो लगाई है और साथ में लिखा है- आखिरकार इंतजार खत्म हुआ... "द बॉयज" आ गए हैं और जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही है। मेरे करण अर्जुन आ गए! दिव और मैं माता-पिता बनने के इस नए और अद्भुत अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं, इसलिए हमें आप सभी के प्यार और आशीर्वाद की जरूरत है।

बधाई देने वालों का लगा तांता

जैसे ही कपल ने इस खुशी को शेयर किया इंस्टाग्राम पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। अंकिता लोखंडे से लेकर जेनिफर विंगेट तक ने बधाई दी है। साथ ही दिव्यांका और विवेक के फैंस की भी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। सभी कपल को दिल खोलकर बधाई दे रहे हैं औ बच्चों के सुखद भविष्य की कामना कर रहे हैं।

आखिर महिला के गर्भ में जुड़वां बच्चे कैसे बनते हैं?

गर्भ में जुड़वां बच्चे (Twins) मुख्य रूप से दो वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से पैदा होते हैं। पहली प्रक्रिया में, जब महिला की ओवरी से किसी महीने प्राकृतिक रूप से या हार्मोनल बदलाव के कारण एक के बजाय दो अलग-अलग अंडे रिलीज होते हैं और वे दो अलग-अलग स्पर्म्स द्वारा फर्टिलाइज हो जाते हैं, तो 'फ्रेटरनल ट्विंस' का जन्म होता है; ऐसे जुड़वां बच्चों के चेहरे और जेंडर अलग-अलग हो सकते हैं।

दूसरी प्रक्रिया में, स्पर्म द्वारा फर्टिलाइज किया गया एक ही अंडा गर्भ में विकसित होने के शुरुआती दिनों में ही अचानक दो बराबर हिस्सों में टूट जाता है, जिससे 'आइडेंटिकल ट्विंस' बनते हैं; क्योंकि ये एक ही अंडे से विकसित होते हैं, इसलिए इनका चेहरा हूबहू एक जैसा होता है और इनका जेंडर दोनों लड़के या दोनों लड़कियां भी हमेशा एक ही रहता है। इसके अलावा, बढ़ती उम्र में हार्मोन के उतार-चढ़ाव या आईवीएफ (IVF) जैसी फर्टिलिटी तकनीकों के इस्तेमाल से भी जुड़वां बच्चे होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

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