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वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर गर्भस्थ शिशु की ले सकता है जान
मां बनना हर विवाहित स्त्री का सपना होता है। इससे उसे पूर्णता का अहसास होता है। लेकिन अगर आप मां ही ना बन पाएं या फिर गर्भवती होने के बाद भी मिसकैरिज हो जाए तो इससे बड़ा दुख एक स्त्री के लिए और कुछ नहीं हो सकता। इस दुख की घड़ी में आपको यह पता चले कि आपके गर्भपात या प्रेग्नेंसी लॉस के पीछे आपका स्वास्थ्य नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर है तो यकीनन आपके लिए इस पर विश्वास कर पाना काफी कठिन होगा। हालांकि यह सच है। हाल ही में हुए एक रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है कि दक्षिण एशिया में प्रति वर्ष अनुमानित 349681 गर्भावस्था नुकसान PM2.5 सांद्रता के संपर्क से जुड़े थे। जो भारत के 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (μg / m3) छोटे कण पदार्थ (PM2.5) की वायु गुणवत्ता मानक से अधिक था। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तारपूर्वक-

क्या कहता है अध्ययन
द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक मॉडलिंग अध्ययन के अनुसार, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में गर्भवती महिलाओं, जो खराब वायु गुणवत्ता के संपर्क में हैं, उन्हें स्टिलबर्थ और गर्भपात का खतरा अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि दक्षिण एशिया में प्रति वर्ष अनुमानित 349,681 गर्भावस्था हानि PM2.5 सांद्रता के संपर्क से जुड़ी थी, जो भारत के 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (μg / m3) छोटे कण पदार्थ (PM2.5) की वायु गुणवत्ता मानक से अधिक थी। 2000-2016 तक इस क्षेत्र में वार्षिक गर्भावस्था हानि का 7 प्रतिशत है।
चीन में किए गए अध्ययन के प्रमुख लेखक ताओ जुए के अनुसार, दक्षिण एशिया में विश्व स्तर पर प्रेग्नेंसी लॉस का सबसे अधिक बोझ है और यह दुनिया में सबसे अधिक पीएम 2.5 प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है।

भारत की अच्छी नहीं है स्थिति
किए गए अध्ययन में 34,197 महिलाओं को शामिल किया गया, जिन्होंने गर्भावस्था को खो दिया था, जिसमें 27,480 गर्भपात और 6,717 स्टिलबर्थ शामिल थे, जिनकी तुलना लाइवबर्थ कण्ट्रोल से की गई थी। यहां गौर करने वाली बात यह है कि गर्भावस्था के नुकसान के मामलों में से 77 फीसदी भारत से, 12 फीसदी पाकिस्तान से और 11 फीसदी बांग्लादेश से हैं। बता दें कि 10 μg / m3 की वृद्धि एक माँ के प्रेग्नेंसी लॉस को 3 प्रतिशत बढ़ाता है।
डब्ल्यूएचओ की यह है गाइडलाइन
डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार, एयर क्वालिटी 10 μg / m3 होनी चाहिए। लेकिन इस दिशानिर्देश के ऊपर वायु प्रदूषण ने गर्भावस्था के नुकसान के जोखिम को 29 प्रतिशत अधिक बढ़ा दिया है।

होता है व्यापक प्रभाव
वायु प्रदूषण का यह विपरीत प्रभाव कई मायनों में नुकसानदायक है। प्रेग्नेंसी लॉस से महिलाओं पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक प्रभाव पड़ सकते हैं। इसके अलावा इससे महिलाओं में पोस्टनेअल डिप्रेसिव डिसऑर्डर से लेकर गर्भावस्था से संबंधित लागतों में वृद्धि आदि का खतरा भी बढ़ता है। इतना ही नहीं, अगर हवा की गुणवत्ता में सुधार करके प्रेग्नेंसी लॉस को कम किया जाए तो इससे लिंग समानता में सुधार हो सकता है।

ग्रामीण महिलाओं पर दिखा अधिक असर
शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि भारत और पाकिस्तान में उत्तरी मैदानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से जुड़े गर्भावस्था के नुकसान अधिक आम थे। यद्यपि हाल के वर्षों में 30 वर्ष से कम आयु की ग्रामीण महिलाओं द्वारा प्रेग्नेंसी लॉस का कुल बोझ मुख्य रूप से वहन किया गया था। वायु प्रदूषण ने ग्रामीण क्षेत्रों में 30 वर्ष या उससे अधिक आयु की वृद्ध माताओं को प्रभावित करती हैं, क्योंकि प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभावों के लिए उनकी उच्च संवेदनशीलता है। टीम ने 1998-2016 तक स्वास्थ्य पर घरेलू सर्वेक्षणों से डेटा संयुक्त किया और वायुमंडलीय मॉडलिंग आउटपुट के साथ उपग्रह के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान PM2.5 के लिए जोखिम का अनुमान लगाया।



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