Latest Updates
-
Jodhpur Spicy Snack Mirchi Bada Recipe: घर पर बनाएं जोधपुर का मशहूर चटपटा मिर्ची बड़ा -
मालवीय नगर अग्निकांड में 21 की मौत, क्या सच हुई 2026 को लेकर बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी? -
कौन है ढोंगी इंजीनियर बाबा? जो गंधर्व विवाह की आड़ में लड़कियों संग करता था घिनौना काम -
भारत के पास है कितना सोना? दुनिया के सबसे बड़े Gold Reserve वाले टॉप-10 देशों की लिस्ट में नंबर 1 कौन? -
90% People Cook This Wrong Chole Bhature Recipe: अब घर पर पाएं बाजार जैसा स्वाद -
Khan Sir Family-Net Worth: कौन-कौन है खान सर के परिवार में? जानें कितनी संपत्ति के मालिक हैं आपके चहेते शिक्षक -
आज है विभुवन संकष्टी चतुर्थी; विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें ये अचूक उपाय, दूर होंगे सभी संकट -
4 जून को केरल में दस्तक देगा मानसून, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें उत्तर भारत में कब बरसेंगे बादल -
किन लोगों को भूलकर भी नहीं चलानी चाहिए साइकिल, फायदे की जगह हो सकता है बड़ा नुकसान -
Global Running Day: दौड़ना शुरू करने से पहले जान लें ये नियम, वरना फायदे की जगह होगा नुकसान
एचआईवी संक्रमित बच्चों में दवा कितनी कारगर?
एक नए शोध से संकेत मिले हैं कि एचआईवी संक्रमित आठ में से एक बच्चा दवा लेने के पाँच साल के अंदर एंटीरेट्रोवायरल दवाइयों के प्रति अपनी प्रतिरक्षा क्षमता (इम्यूनिटी) खो देता है. जबकि बड़े लोगों में ऐसा काफ़ी देर बाद होता है.
इसका मुख्य कारण दवाइयों का ख़राब स्वाद बताया गया है जिस वजह से बच्चे इन्हें नियमित रूप से नहीं लेते. नए शोध से इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि एचआईवी बच्चों के लिए उपलब्ध दवाईयाँ कितनी उपयुक्त हैं. पहली बार हुई इस शोध में यूके मेडिकल रिसर्च काउंसिल के डॉक्टरों ने आठ यूरोपीय देशों के बच्चों का अध्ययन किया है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि दवा बनाने वालों और क्लिनिक में प्रयोग करने वालों को ऐसी दवाएँ विकसित करनी होंगी जो लेने में आसान हों, मात्रा कम हो और जिनका स्वाद इतना ख़राब न हो.
कितनी उपयुक्त?
एचआईवी संक्रमण के लिए मुख्यत एंटीरेट्रोवायरल ड्रग्स दी जाती हैं. इन दवाईयों की वजह से शरीर में एचआईवी का स्तर कम रहता है जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर नहीं होती. यानी मरीज़ को एचआईवी के कारण हो चुके नुकसान से उबरने में मदद मिलती है.
लेकिन अगर ये दवा रोज़ न ली जाए तो एचआईवी वायरस पर दवाइयों का असर होना बंद हो जाता है. ये दवाएँ तो ताउम्र दिन में कई बार लेनी पड़ती हैं. शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे और किशोर रोज़ दवा नहीं ले पाते. प्रोफ़ेसर करिना बटलर कहती हैं, “युवा लोग नियमित रूप से दवा नहीं लेते. बच्चों को भी दवा देना मुश्किल होता है. दवा का टेस्ट बहुत ख़राब और कड़वा होता है, पेट्रोल जैसा."
वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर दवाओं में सुधार होता है तो दुनिया भर में एचआईवी से संक्रमित 20 लाख बच्चों के बेहतर इलाज में मदद मिलेगी.



Click it and Unblock the Notifications