...जब हकलाये बच्‍चा

Kid
आपके घर में या फिर आपके आस-पडोस में कोई ऐसा बच्‍चा जरुर होगा जो बात-बात पर हकलाता होगा। बच्‍चों में हकलाहट सामान्‍य बात है, लेकिन जब उसके साथी व परिवार जन मज़ाक उडाएं या नकल करें तो बच्‍चे में धीरे धीरे हीनभावना घर करने लगती है और वह लोगों से मिलने जुलने से कतराने लगता है। जो बच्‍चे हकलाते हैं वह एक ही अक्षर को लंबा खीचते हैं।

कब हो सकती है समस्‍य: स्‍टैमरिंग या हकलाहट आमतौर पर तीन से पांच साल पर शुरु होती है। शुरुआती दौर में लगभग पांच फीसदी बच्‍चों में यह दोष होता है। इनमें से 4 फीसदी बच्‍चे बिना किसी की मदद के अपने आप ही ठीक बोलने लगते हैं। दिलचस्‍प तथ्‍य यह है कि लड़कियों के मुकाबले लड़को में यह दोष 4 गुना ज्‍यादा पाया जाता है।

उपचार क्‍या है: इसका इलाज किसी दवा से नहीं किया जाता। इसमें स्‍पीच थैरेपी कारगर साबित होती है और इसके अलावा मोवैज्ञानिक इलाज भी किया जाता है। सबसे पहले हकलाहट का कारण जानने की कोशिश की जाती है। बच्‍चे के मन में किसी प्रकार का भय हो तो उसे दूर करने की कोशिश होती है। और अगर ऐसा है तो उसके मन में आत्‍मविश्‍वास पैदा किया जाता है और दिमाग से यह बात दूर करने के प्रयास किए जाते हैं कि उसमें किसी प्रकार का कोई दोष है।

माता-पिता क्‍या करें: पैरेंट्स को सदैव इसका ध्‍यान रखना चाहिए कि बच्‍चा भयभीत या तनावग्रस्‍त न रहे। अपने बच्‍चे का न तो स्‍वंय मजाक उडाएं और न ही किसी और को ऐसा करने दें। बच्‍चे को ज्‍यादा से ज्‍यादा बोलने के लिए प्रेरित करें। जब भी बच्‍चा बोलते हुए अटके तो उसे खुद ही अपना वाक्‍य या शब्‍द स्‍वयं पूरा करने दें। बच्‍चे को कहानी, कविता आदि सुनाने के लिए प्रेरित करें।

Story first published: Friday, February 10, 2012, 12:01 [IST]
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