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क्या आपका बच्चा सुरक्षित स्कूल जा रहा है?
पाखी जैन तब सकते में आ गयीं जब उनके सात साल के बच्चे ने एक दिन स्कूल से आने के बाद अपने मुंह से अपशब्द निकाले। "यह पूछने पर कि उसे यह सब किसने सिखाया, उसने बताया कि उसके स्कूल बस में हर कोई ऐसी भाषा का प्रयोग करता है और वह ऐसा कर रहा है क्योंकि उसे भी अपने सीनियर की तरह बनना है," जैन ने कहा जिन्हें उस समय यह समझ नहीं आ रहा था कि परिस्थिति का सामना कैसे किया जाए।
वह अकेली ऐसी नहीं हैं। ज़्यादातर माँ बाप और स्कूल प्रशासन क्लासरूम के अंदर अनुशासन रखने के ऊपर दबाव देते हैं, पर यह अनुशासन स्कूल बसों में लागू नहीं होता। हाल में, बसों में झगड़े के कई वाकये सामने आये हैं जहाँ बच्चे एक दूसरे को मारते पीटते हैं। सख्त माता पिता कैसे डालते हैं अपने बच्चे पर प्रभाव

जब आपका बच्चा झगड़ालू बन जाए
क्या आपको लगता है कि आपका बच्चा स्कूल बस से गन्दी आदतें सीख रहा है? अपने बच्चे को अनुशासन में लाएं और उसे सख्ती से यह बताएं कि गलत भाषा के इस्तमाल को आप बर्दाश्त नहीं करेंगे। उसे यह भी बताएं कि बड़े बच्चों की तरह बनने में तब कोई बड़प्पन नहीं है जब आप गलत हरकत कर रहे हों। सवनानी कहती हैं, "कई बार जब बच्चे बस में लड़ाई करते हैं और माँ बाप को यह पता चल जाता है तो वह ड्राइवर या स्कूल प्रशासन के ऊपर लांक्षन लगा देते हैं। यह परिस्थिति से निपटने का सही तरीका नहीं है क्योंकि तब आप गलत उदाहरण देते हैं।"
इसके बदले आप दोनों तरफ की बात सुनें और अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे ने गलती की है तो सख्ती की बजाये चिंता जताएं। डा. सोनार कहते हैं, "अपने बच्चे को यह बताएं कि दूसरे बच्चे के ऊपर धौंस दिखाना गलत बात है। कई बार बच्चे डराए धमकाए जाने की बात नहीं बताते। उन्हें यह बताएं कि उनके साथ अगर ऐसा हो रहा हो तो वह आपको, शिक्षकों को या बस के सुपरवाइजर को बताएं।
स्कूल प्रशासन की भूमिका
बसों में सुरक्षा और अनुशासन चिंता का विषय बन गया है और स्कूल प्रशासन इसके लिए गंभीर कदम उठा रहा है। शहर के कुछ स्कूलों में बस मॉनिटर नियुक्त किये गए हैं जो न सिर्फ बस में अनुशासन का ध्यान रखते हैं पर बस स्टाफ पर भी कड़ी नज़र रखते हैं। कुछ स्कूलों में बसों में सीसीटीवी कैमरा लगाने की योजना है। चांदीवली के एक स्कूल में जब बच्चा अपना आई-कार्ड लगाता है और बस में चढ़ता है तो माँ बाप के पास फ़ोन पर यह मैसेज पहुँच जाता है।
कई स्कूलों ने महिला अटेंडेंट भी रखा है ताकि सड़क और यातायात अधिकार द्वारा दिए गए मार्गदर्शन को माना जा सके। सवनानी कहती हैं "बस में प्रशिक्षित स्टाफ का होना ज़रूरी है। अगर बड़े और छोटे बच्चे साथ में बस में चल रहे हैं तो अटेंडेंट को यह ध्यान रखना चाहिए की बड़े बच्चे पीछे और छोटे बच्चे आगे बैठे हों। इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं आना चाहिए।"
स्कूल अथॉरिटी निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं
क्लास में स्कूल बस में सुरक्षा को लेकर निर्देश दे सकते हैं।
बच्चों को समय पर भेज सकते हैं ताकि उन्हें बस पकड़ने के लिए दौड़ना न पड़े।
किसी भी तकनीकी कठिनाई के लिए बस का निरिक्षण करवाएं और सुरक्षा सुनिश्चित करें।
यह सुनिश्चित करें कि बस में पर्याप्त स्टाफ है और एक महिला अटेंडेंट हमेशा मौजूद हो।
बस में सीसीटीवी लगवाएं ताकि बच्चों के व्यवहार को आंका जा सके।
माँ बाप के लिए ध्यान देने वाली चीज़ें
उस एजेंसी के बारे में पता करें जहाँ से बसें ली जाती हैं।
अपने बच्चे को सुरक्षा का महत्व बताएं, यह बताएं कि बस के लिए इंतज़ार करते हैं और बस में कैसे चढ़ते हैं।
बस स्टाफ या किसी भी बच्चे द्वारा किसी भी तरह के गलत व्यवहार की सूचना तुरंत देनी चाहिए।
बस में सफाई रखने की जानकारी अपने बच्चे को दें।



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