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किस तरह अनजाने में आप तोड़ देते हैं बच्चे का आत्मविश्वास!
बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए आपको अब तक कई तरह के टिप्स मिले होंगे मगर फिर भी आप उनसे संतुष्ट नहीं है और अब भी अपने बच्चे में आत्मविश्वास को बेहतर करने के तरीके ढूंढ रहे हैं? इसके पीछे ज़रूर कोई ना कोई कारण होगा जो बच्चे को आत्मविश्वासी बनने से रोक रहा है। बच्चे में आत्मविश्वास को जगाने की प्रक्रिया में माता पिता की तरफ से पूरी निष्ठा के साथ प्रयास करने की ज़रूरत होती है।
अपने बच्चे में आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो आपको उसके कॉन्फिडेंस को प्रभावित करने वाले कारणों के बारे में जानना चाहिए। इसकी वजह कोई भी हो सकता है, परिवार, दोस्त, रिश्तेदार, यहां तक की शिक्षक भी इसका कारण हो सकते हैं। चूंकि, बच्चे अपना ज़्यादातर समय परिवार में बिताते हैं इसलिए परिवार वालों की वजह से ही उनमें आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। आज हम उन कारणों के बारे में चर्चा करेंगे जो सामान्यत: बच्चे के आत्मविश्वास को तोड़ सकते हैं।

गलतियों पर चिल्लाना
बच्चे तो गलतियां करते ही हैं लेकिन उन पर चिल्लाना, खासतौर पर दूसरों के आगे उन पर चिल्लाने से उनके आत्मविश्वास में कमी हो सकती है। अगर आप अपने बच्चे की गलतियों में सुधार लाना चाहते हैं तो उनसे अकेले में बात करें और प्यार से उन्हें उनकी गलती का अहसास कराएं।
तुलना करना
कभी भी दूसरों से अपने बच्चों की तुलना ना करें। हर बच्चा अलग होता है और उस पर दूसरे बच्चों जैसा बनने का दबाव ना डालें। कभी-कभी ऐसा करके भी आप अनजाने में ही अपने बच्चे का आत्मविश्वास तोड़ देते हैं।
ज़्यादा परवाह करना
अगर आप अपने बच्चे की बहुत ज़्यादा परवाह करते हैं और उनके लिए सब कुछ करते हैं तो इसका असर भी उसके आत्मविश्वास पर पड़ता है। इससे बच्चे को लग सकता है कि वो अकेले कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं है। माता पिता का बच्चे की बहुत ज़्यादा परवाह करना भी उसके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
लोगों के सामने बेइज्जती करना
पब्लिक में किसी भी वजह से बच्चे को डांटना उसे अंतर्मुखी बना सकता है। इससे उनका सामाजिक दायरा घट या सीमित हो सकता है। अपने बच्चे की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना उससे अकेले में बात करें और उसे समझाएं।
प्रोत्साहन की कमी
बच्चों को अपनी तारीफ सुनना बहुत अच्छा लगता है और जब कोई उन्हें प्रोत्साहित करता है तो वो खुश हो जाते हैं और इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। माता-पिता के ऐसा करने से ज़्यादा असर पड़ता है। इसलिए कभी भी माता-पिता को अपने बच्चे को प्रोत्साहित करना नहीं भूलना चाहिए। उसकी हर छोटी उपलब्धि पर उसकी तारीफ करें।
दूसरों के बच्चों से बेहतर बनाना
कई अभिभावक अपने बच्चे को अपने रिश्तेदार या दोस्तों के बच्चों से बेहतर बनाना चाहते हैं। इसे कंपेटिटिव पेरेंटिंग कहा जाता है और इसमें अनजाने में ही माता पिता अपने बच्चे का आत्मविश्वास कमज़ोर कर देते हैं। ऐसा करके आप बस अपने बच्चे पर अपनी मर्ज़ी थोप रहे हैं।
बहुत ज़्यादा अनुशासन में रहना
अपने बच्चे को अनुशासन में रखना ज़रूरी है। हालांकि, अगर आप बिना किसी योजना या दिशा के ऐसा करते हैं तो इसका नकारात्मक असर ही पड़ता है। अपने बच्चे को बहुत ज़्यादा अनुशासन में रखना उसके आत्मविश्वास पर असर कर सकता है।



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