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एक्सक्लूसिव: आयुष्मान खुराना ने याद किया अपना बचपन, साझा किये कई राज
जिसका बचपन बचा है, वही इंसान जिंदा है। इसी को लेकर बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना ने बात की। आए थे राजधानी दिल्ली में बच्चों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने। यूनिसेफ ने उन्हें भारत का नेशनल एंबेसडर बनाया है। उनसे बात हुई। एक्टिंग से लेकर पर्सनल लाइफ पर। बच्चों के बीच वो खेल दिखाए और बच्चों के चेहरे पर खुशी आ गई। यही तो है आयुष्मान खुराना की यूएसपी। जिसके साथ हो लिए, उसे अपना बना डाला।

जो चीजें बचपन में भाती थी, वही आज भी अच्छी लगती है
बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना ने कहा कि बचपन में दोस्तों के साथ रहना, अपने परिवार के साथ खाना, खेलना, क्रिकेट के मैच के लिए घंटों पसीना बहाना और मौका मिलते ही म्यूजिक सुनने का मन करता था। आज भी मन जस का तस है। कोई चेंज नहीं है। खुद को चेंज भी नहीं करना चाहता हूं। मैथ्स तब भी उतनी अच्छी नहीं थी, आज भी प्रोफेशनल लाइफ में मैथ्स से नहीं, दिल से निर्णय लेता हूं।
समय के साथ समझना होगा बच्चों की समस्याओं को
आयुष्मान खुराना ने सीधे तौर पर कहा कि बच्चों की समस्या भी समय के साथ बदल रही है। हम सभी को मिलकर उसे समझना होगा और उसका हल निकालना होगा। भारत में बच्चे व किशोर जिन मुददों का सामना कर रहे हैं, उनको लेकर मैं संजीदा हूं। यूनिसेफ के सेलिब्रिटी एडवोकेट होने के नाते, मैंने अब तक जिन बच्चों के साथ बात की है, उससे यह पता चलगा है कि इंटरनेट सुरक्षा, अभद्र भाषा, साइबर बुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य, और लैंगिक समानता पर काम करना होगा। यूनिसेफ के साथ इस नई भूमिका में, मैं बाल अधिकारों के लिए आवाज हर मंच पर उठाउंगा।
दादी की थप्पड़ और पापा का दिया वर्ड आज भी याद है
परिवार में रहने पर कई प्रकार की बंदिश होती है। लेकिन, उससे हमारी और आपका पर्सनैलिटी निखरती है। आयुष्मान खुराना ने बताया कि बॉलीवुड के बादशाह यानी शाहरूख खान उन्हें बेहद पसंद हैं। उनकी एक्टिंग को देखकर ही एक्टिंग का जुनून चढ़ा। एक दिन जब हिम्मत करके अपनी दादी को जुनून के बारे में बताया, तो दादी ने तपाक से उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। उसके बाद यह बात पापा के पास पहुंची। उन्होंने मुझसे एक वर्ड लिया। मैंने उसे पूरा किया और एक्टिंग की दुनिया मेरे लिए खुल गई। वह वादा कुछ और नहीं, बल्कि पढ़ाई में टॉप करना था।
मैं सिंपल हूं, मेरी पसंद भी सिंपल
जब पसंद-नापसंद पर आयुष्मान खुराना से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मेरी पसंद बहुत सिंपल है। मुझे सर्दी का मौसम, देर तक सोना, अच्छा खाना बहुत पसंद है। यह मेरी एक्टर बनने से पहले और आज भी पसंद है। आज जब भी मौका मिलता है मैं अपनी पसंद को तवज्जो देता हूं, लेकिन बॉलीवुड करियर को भी देखता हूं। जिंदगी में बैलेंस बहुत जरूरी है। आगे बढ़ना है, तो पीछे की चीजों से डीटैच होना ही होगा। मुझे झूठ बिल्कुल भी पसंद नहीं है। मेरे बचपन में इंटरनेट नहीं था। हर गलत काम करने पर खूब मार खाई है। यही वजह है कि आज मेरा वजूद भी मुझसे डरता है। गलत काम कर ही नहीं सकता। यह है संस्कार और मार का बेहतर नतीजा।



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