जानें किन बच्चों को हो सकता है फर्स्ट बॉर्न सिंड्रोम, इससे बचने के लिए उठाएं ये कदम

घर में पहले बच्चे को सारी अटेंशन मिलती है, पूरा परिवार उस पर अपना प्यार न्यौछावर कर देता है। लेकिन छोटे भाई या बहन के आने के बाद पूरी पिक्चर ही बदल जाती है। एकाएक कपड़ों और खिलौनों संग प्यार भी बंटने लगता है। बड़ा भाई या बहन बनने के बाद, पहले बच्चे में अधिकांश नकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं, जैसे कि वह चिड़चिड़ा होने लगता है और उसे गुस्सा आने लगता है। साथ ही वह खुद को अकेला महसूस करने लगता है। पहले बच्चों में इन्हीं बदलावों का नाम है 'फर्स्ट बॉर्न सिंड्रोम'। आइए आज इस आर्टिकल के जरिए पहले बच्चे के बदले हुए इस व्यवहार के बारे में जानें, साथ ही यह भी समझें कि किस तरह बच्चों के इस व्यवहार में सुधार ला सकते हैं।

क्या है ‘फर्स्ट बॉर्न सिंड्रोम’

क्या है ‘फर्स्ट बॉर्न सिंड्रोम’

पहले बच्चे को अब तक सारा प्यार और अटेंशन मिला और दूसरे बच्चे के आ जाने के बाद सारी चीजे बटंने लगती है, ऐसी स्थिति में बड़े बच्चे को थोड़ा बुरा लगता है। किसी भी बच्चे के लिए इस तरह की भावना आना स्वाभाविक है। असल में अचानक से बड़े भाई या बहन बनने की जिम्मेदारी को समझने के लिए बच्चों को थोड़ा वक्त चाहिए। बच्चों की इसी भावना को ‘फर्स्ट बॉर्न सिंड्रोम' कहा जाता है। इसकी भी संभावना है कि बड़ा बच्चा अपने छोटे भाई या बहन से थोड़ी जलन भी महसूस करने लगे। इस वजह से माता पिता होने के नाते अपने बड़े बच्चे को गाइड करना बहुत जरूरी है, ताकि वह सबसे छोटे बच्चे से एकाएक बड़ा भाई या बहन बनने का सफर आराम से तय कर सके।

बच्चे को बच्चा ही रहने दें

बच्चे को बच्चा ही रहने दें

यह बहुत जरूरी है कि दूसरा बच्चा आने पर अपने पहले बच्चे के बचपन को जिंदा रखें। घर में एक और नन्हा मेहमान आ जाने के बाद बड़े बच्चे पर किसी तरह का कोई बोझ न डालें। उसकी उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए काम करें। उसे उपेक्षित महसूस करवाने के बजाय आप उसे समझाएं, उसे जिम्मदारी दें कि वह छोटे भाई या बहन का ख्याल रखें। इससे वह उसे अपना समझेगा और उसमें विश्वास बढ़ेगा कि वह लीडरशिप में भी बेहतर हो सकता है।

न बनाएं आदर्श

न बनाएं आदर्श

अधिकांश माता पिता अपने बड़े बच्चे को छोटे बच्चे के लिए आदर्श बना देते हैं। बड़े से उम्मीद की जाती है कि वह अच्छे से व्यवहार करे ताकि छोटा भी वही सीखे। लेकिन इस बीच यह भूल जाते हैं कि वह भी तो बच्चा ही है। बेहतर होगा कि बड़े बच्चे को भी खुली छूट दी जाए कि वह भी अपनी इच्छा के अनुसार काम कर सके।

कुछ वक्त छोड़ें अकेला

कुछ वक्त छोड़ें अकेला

अगर आप चाहते हैं कि आपका बड़ा बच्चा खुद को अकेला ना समझे, तो कुछ वक्त उसे खुद के साथ अकेले भी बिताने दें। साथ ही उससे बातें करते रहें कि स्कूल में क्या हुआ, उसके इंट्रेस्ट से जुड़े टॉपिक पर बात करें ताकि उसे लगे कि हां आपके पास अभी भी उसके लिए वक्त है।

Story first published: Thursday, February 20, 2020, 10:46 [IST]
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