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चिकनपॉक्स से कितना अलग है मंकीपॉक्स, बच्चों में ये लक्षण दिखते ही हो जाए सर्तक
यूके और कुछ अन्य देशों में मंकीपॉक्स के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, हालांकि भारत में इसका अभी तक कोई केस सामने नहीं आया है। लेकिन एहतियात के तौर पर केंद्र सरकार ने इसे लेकर 'नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल' और 'इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च' को अलर्ट रहने के लिए कहा है। इसलिए इस वायरल जूनोटिक बीमारी के संकेतों और लक्षणों से अवगत होना सभी के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। लेकिन बात ये आती है क्या वयस्कों की तरह, ये बीमारी बच्चों को भी चपेट में ले सकती है। क्या ये बच्चों में गंभीर बीमारी के रूप में उभरकर सामने आ सकती है, या फिर कोरोना की तरह मंकीपॉक्स से भी बच्चे जल्दी उभर सकते है। इस लेख में खासकर जब बात बच्चों की हो तो, शुरूआत में ही अगर हम इस बीमारी को पहचान लें तो इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। इस लेख में हम यहीं बताने जा रहे है कि बच्चों में मंकीपॉक्स के संक्रमण की पहचान कैसे करें और बचाव के लिए कौन-से उपाय कारगर साबित होंगे।

मंकीपॉक्स के लक्षण
यूके में मई की शुरुआत में आए मंकीपॉक्स के मामलों पर हुई रिसर्च के बाद ये बात सामने आती है कि मंकीपॉक्स , चेचक की तुलना में हल्का होता है और इसके लक्षण बुखार, सिरदर्द, शरीर पर दाने और फ्लू जैसे होते हैं। ये लक्षण अपने आप ही 3 हफ्ते के अंदर चले चले जाते हैं। इसके अलावा मंकीपॉक्स शरीर में लिम्फ नोड्स या ग्रंथियों को भी बढ़ा देता है। मंकीपॉक्स के संपर्क में आए अधिकतर लोगों को केवल बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान का अनुभव हुआ है। अगर संक्रमण अधिक गंभीर होता है तो चेहरे और हाथों पर दाने और घाव हो सकते हैं। जो धीरे-धीरे शरीर के बाकी हिस्सों में फैल सकते हैं।

बच्चों में मंकीपॉक्स
बात अगर बच्चों की हो तो, विशेष रूप से, कुछ मंकीपॉक्स के लक्षण चिकन पॉक्स जैसे चकत्ते, बुखार और दर्द के समान नजर आ सकते हैं। हालांकि हेल्थ एक्सर्टस की मानें तो बच्चों में मंकी पॉक्स संक्रमण का जोखिम बहुत कम और हल्का होता है, लेकिन यह अधिक सामान्य चिकन पॉक्स की तरह ही असर दिखा सकता है।

वयस्कों की तुलना में बच्चों में मंकीपॉक्स किस तरह से अलग है
एक्सपर्टस की स्टडी में ये बात सामने आई है कि बच्चों में, वयस्कों की तुलना में, बुखार आमतौर पर 2-3 दिन अधिक होता है। जिसमें दाने आमतौर पर तीसरे या चौथे दिन से शुरू होते हैं और धीरे-धीरे बदलाव होने लगता हैं। बच्चों में, थकावट और कमजोरी के लक्षण ज्यादा नजर आ सकते हैं। हालांकि, वे ज्यादातर सिरदर्द की शिकायत नहीं करते हैं। इसलिए, बच्चों के लिए डाइड्रेशन बनाए रखना और अधिक लिक्विड इनटेक लेना बहुत ज्यादा आवश्यक है।

मंकीपॉक्स से बचने के उपाय
-सबसे महत्वपूर्ण बचाव उपाय है हाथों की स्वच्छता जिसके लिए साबुन और पानी या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र से 20 सेकंड तक के लिए अपने हाथ साफ करें।
-जानवरों से इंसानों में संक्रमण की रोकथाम होनी चाहिए।
- अगर आप नॉन वेजिटेरियन है तो मीट को अच्छी तरह से पकाने के बाद ही खाए।
- ऐसा व्यक्ति जिसे रैशेज की शिकायत हो, उससे दूसरा व्यक्ति संपर्क में आने से बचें।
-किसी बीमार मरीज के इस्तेमाल की गई किसी भी लिक्विड या वस्तु के संपर्क में आने से बचें।

मंकीपॉक्स पर विशेषज्ञों ने जागरूकता की अपील की, घबराने की नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि हाल ही में मंकीपॉक्स का प्रकोप चिंता का कारण है, लेकिन इसको लेकर उन्होंने लोगों से घबराहट ना पैदा करने की अपील की हैं, ये एक्सपर्टस इस बात की भी पुष्टि करते है कि ये वायरस COVID-19 जैसा नहीं है।



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