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पेरेंट्स की वो बुरी आदतें जो बच्चों पर ड़ालती है नकरात्मक असर, पॉजिटिव पैरेंटिग के लिए रखें इन बातों का ध्
बच्चे अपने माता-पिता की परछाई होते है। ऐसे में वे वो ही करते है जो वो अपने पेरेंटस से सीखते है। जाने-अंजाने में अब आप गलत करो या सही, बच्चे तो वो ही करेंगे, जो उन्होंने आपसे सीखा है।
इसलिए समझदारी तो इसी में है कि पेरेंटस को पहले अपनी नैगेटिव हैबिटस में सुधार लाया जाए, ताकि बच्चे पर आपका गलत इंप्रेशन ना पड़ें। यहां हम आपको वो नैगेटिव चीजों के बारे में बताने जा रहे है जो बच्चे अपने पेरेंटस से सीखते है।

ऑरग्यूमेंट
पति-पत्नी या परिवार के लोगों के बीच ऑरग्यूमेंट होना आम बात है। लेकिन अगर बच्चा हर रोज इसी तरह का माहौल अपने आसपास देखेगा, तो वो आक्रामक और हिंसक स्वभाव का हो सकता है। बल्कि फिजिकली और वर्बली होने वाले झगड़े बच्चों के इमोशनल और मेंटल बैलेंस को नुकसान पहुंचा सकते है। उसे ऐसा लग सकता है कि जो भी ऑरग्यूमेंटस अपनों के बीच हो रहे है उसके पीछे वो ही जिम्मेदार है। ऐसे में वो खुद को दोषी समझकर डिप्रेशनम में जा सकता है। इसलिए ये जरूरी है कि घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाके रखा जाए। और अगर घर का कोई भी सदस्य ऑरग्यूमेंट कर रहा हो तो, उस तरीके की सिचुएशन को स्मार्ट तरीके और पेंशेस से संभाली जाए। ताकि इसका नैगेटिव इंपेक्ट बच्चे पर ना पड़ें।
नैगेटिव एक्टिविटीज
अगर आपका बच्चा अपने आसपास किसी के साथ किसी प्रकार या खुद के साथ दुर्व्यवहार होते देखता है, तो ये सिनेरियो आपके बच्चे की मेंटल कंडीशन पर बुरा असर ड़ाल सकता है। ये दुर्व्यवहार, चाहे फिजिकल हो या वर्बल, ग्रोइंग एज में होने वाली इन नैगेटिव एक्टिविटीज से बच्चे का स्वभाव हिंसक हो जाता है। ऐसे में जो पेरेंटस अपने बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, वे उन्हें ना सिर्फ हिंसक बल्कि आक्रामक भी बना सकते हैं, जिससे वे ड्रग्स लेने या शराब पीने जैसी हार्मफुल एक्टिविटीज में शामिल हो सकते हैं। इसलिए ये जरूरी है कि पेरेंटस अपने बच्चों को हेल्दी एनवायरमेंट दें, ना कि नैगेटिव एनवायरमेंट।
डिसीप्लेन का ओवरडोज
सभी पेरेंटस यही चाहते है कि उनके बच्चे डिसीप्लेन में रहें और इसके लिए वे साम-दाम-दंड-भेद सभी तरह के तरकीब आजमाते है। लेकिन क्या आप जानते है जब पेरेंटस अपनी पॉवर का प्रयोग करते है, तो उससे बच्चें का व्यवहार तो नहीं बदलता, बल्कि बच्चा वास्तव में उनसे दूर चला जाता है। दरअसल बच्चे स्ट्रीक डिसीप्लेन पर एग्रेसिवली रिएक्ट करते है, और पेरेंटस का ये व्यवहार उसके माइंड पर नैगेटिव इंपेक्ट ड़ालता है। इसलिए बच्चे से सख्ती से नहीं नरमी से पेश आए। तभी आप उसमें बदलाव होता देखेंगे।

एंटीसोशियल होना
अगर पेरेंटस दूसरे लोगों के साथ घुलते-मिलते नहीं, या अपने आप को एक निश्चित सीमा में बांधे रखते है, यानि पेरेंटस अगर एंटी सोशियल है तो इस बात की अधिक संभावना है कि आपके बच्चे आपसे यह नकारात्मक आदत सीखेंगे और जीवन भर इसका पालन करेंगे। दरअसल बच्चे पेरेंटस से ही हर चीज सीख्रते है और उनकी आदतों को अपने जीवन में अपनाते हैं। इसलिए, पेरेंटस का उनके बच्चे के व्यवहार पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। तो अगर आप भी एंटीसोशियल है तो ये बात मानकर चलें कि बच्चा भी आपके पद-चिन्हों पर ही चलेगा। इसलिए सबसे पहले खुद में बदलाव लाए, ताकि आप अपने बच्चे को सोशियल होना का महत्व समझा सकें।
स्ट्रेसफुल सिचुएशन में पेशेंस खोना
स्ट्रेसफुल सिचुएशन में पेरेंटस जिस तरह से रिएक्शन देते है, बच्चे भी ठीक वैसा ही रिएक्शन देंगे। यानि अगर आप स्ट्रेसफुल माहौल में नैगेटिव कमेंटस करते हैं, तो आपका बच्चा उसी तरह रेस्पोंस करना सीख सकता है। जबकि इस तरह के हालातों में आपका चिल्लाना , गाली देना, सामान तोड़ना और अपने आसपास के लोगों को कोसना ये सभी नैगेटिव हैबिटस है जो आपके बच्चे के व्यवहार को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। वो इमोशनली अनस्टेबल हो सकता है। इसकी बजाय अगर आप स्ट्रेस को पॉजिटिवली संभालना सीखते हैं, तो आप अपने बच्चे को स्ट्रेस को सही तरीके से हैंडल करने का आर्ट सिखा सकते हैं।



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