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बेटी को जल्दी शुरु हो गए हैं पीरियड्स, पैरेंट्स को Early puberty से जुड़ी ये 5 बातें होनी चाहिए मालूम
प्यूबर्टी यानी यौवन की शुरुआत, ये एक ऐसा पड़ाव है, जो ना सिर्फ बच्चों के लिए बल्कि उनके पेरेंटस के लिए भी चुनौतियों से भरा हुआ है। ये एक ऐसी स्टेज है जिससे लगभग सभी लोग होकर गुजरते हैं। जो कि एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोसेस है जिसमें एक बच्चा युवावस्था की ओर एक कदम बढ़ाता है।
हालांकि, बदलाव के इस चरण में उसे कई तरह के मेंटल और फिजिकल बदलावों से गुजरना पड़ता हैं। अगर आप में या आपके बच्चे की प्यूबर्टी बस अभी ही शुरू हुई है तो हो सकता है कि आपने इनमें से कुछ बदलावों का अनुभव किया हो। और जो आपके लिए पूरी तरह से नया है। ऐसे में इससे जुड़े मिथ आपको परेशान कर सकते है। यहां हम आपके साथ प्यूबर्टी से जुड़े कुछ सामान्य मिथक शेयर कर रहे है।


पीरियड ब्लड अशुद्ध होता है
पीरियड एक नेचुरल प्रोसेस है। साइंटिफिक रूप से कहें तो, मेंस्टुअल डिस्चार्ज में कोई टॉक्सिस कंपोनेंट नहीं होते हैं। मेंस्टुअल का लगभग आधा भाग ब्लड होता है। बाकी कंपोनेंट में कैल्शियम, आयरन, सोडियम, सर्वाइकल म्यूकस आदि शामिल हैं।
प्यूबर्टी के बाद लंबाई नहीं बढ़ना चिंताजनक
हर किसी के लिए डवलपमेंट का पीरियड अलग-अलग होता है। यदि आपके बच्चे अपने क्लासमेट जितने लम्बे नहीं हैं, या उनकी मसल्स या बॉडी में कुछ बदलाव नजर नहीं आ रहा है, , तो पेरेंटस को चिंता नहीं करनी चाहिए। आमतौर पर लड़कों की लंबाई में आमतौर पर 12 से 16 या 18 साल की उम्र के बीच ग्रोथ देखी जाती है, जबकि लड़कियों की लंबाई में यह सामान्य रूप से 9 से 15 के बीच होती है।
साफ-सफाई नहीं रखने से पिंपल होते है
लड़कियों और लड़कों दोनों को पिंपल्स होते हैं और इसका साफ-सफाई से कोई लेना-देना नहीं है। बल्कि, इसके पीछे का कारण हार्मोन है। यह स्किन के पोर्स में एक्सट्रा ऑयल फंसने का परिणाम है। पिंपल्स आमतौर पर कुछ दिनों में गायब हो जाते हैं, इसलिए इसे लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। बल्कि माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना करना चाहिए कि पिंपल्स उनके बच्चे के आत्मविश्वास में बाधा न डालें। अगर फिर भी बच्चा इसको लेकर असहज महसूस कर रहा है तो इस संबंध में आप अच्छे स्किन स्पेशलिस्ट से संपर्क कर सकते है।
पीरियडस के दौरान लड़कियों को खेलना या अचार नहीं छूना चाहिए
कुछ लड़कियों को पीरियड के दौरान दर्द का अनुभव हो सकता है, जबकि अन्य को नहीं। ऐसे में ये पूरी तरह से लड़की की फिजिकल या मेंटल कंडीशन के अनुसार होना चाहिए, या यूं कहें ये उसकी पसंद होनी चाहिए कि उसे खेलना है या नहीं। पीरियडस के दौरान अचार न छूने का कोई कारण नहीं है। बल्कि कई जगहों पर तो आज भी पीरियड के दौरान लड़कियों को रसोई में जाने या मंदिर में जाने से रोकती हैं।
स्वप्नदोष असामान्य है
स्वप्नदोष कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है जिसके तहत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात हो जाता है। यह महीने में अगर 1 या 2 बार ही हो तो सामान्य बात कही जा सकती है। यह पुरुषों या विशेषकर युवाओ में होने वाली बहुत ही आम घटना है, जब लड़कों को स्वप्नदोष का अनुभव होता है, तो उनमें से कुछ सोचते हैं कि उन्हें कोई बीमारी है, या यहां तक कि उन्हें कैंसर भी है। ऐसे में पेरेंटस को अपने बच्चे से इस तरह की स्थिति के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए कि ये सामान्य है।
प्यूबर्टी के बाद पेरेंटस और बच्चे के बीच जुड़ाव कम हो जाएगा
हालांकि इस बात में पूरी तरह से सच्चाई है कि प्यूबर्टी वह समय है जब व्यक्ति अपने परिवार के बाहर रिश्ते तलाशते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे अपने पेरेंटस को पसंद नहीं करते हैं। बल्कि वे बस अन्य समान विचारधारा वाले लोगों के साथ समय बिताना चाहते हैं जो उन्हें समझते हैं। क्यूंकि कुछ बातें ऐसी होती है जिसे बच्चा अपने पेरेंटस से शेयर करने से संकोच करता है। ऐसे में हो सकता है कि वे अपने पेरेंटस के साथ समय बिताना न चाहें, लेकिन पेरेंटस के सपोर्ट की उसे हर कदम पर जरूरत थी, है और आगे भी रहेगी।



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