Latest Updates
-
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं -
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी
सिजेरियन डिलिवरी के खराब प्रभाव
पिछले कुछ समय से सीजेरियन डिलीवरी ज्यादा हो रही हैं। सीजेरियन डिलीवरी, एक प्रकार की सर्जरी होती है जिसके द्वारा अप्राकृतिक रूप से प्रसव करवाया जाता है, इसमें गर्भाशय में चीरा लगाकर बच्चे को बाहर निकाल लिया जाता है। अन्य ऑपरेशन की तरह इसमें भी कई समस्याएं होती हैं और इसके बाद कई प्रकार की दिक्कतें भी झेलनी पड़ती हैं।
READ: सिजेरियन डिलिवरी के बाद देखभाल
महिलाएं, इस बारे में बिल्कुल भी जागरूक नहीं होती है कि सीजेरियन का असर उनके बच्चे के स्वास्थ्य पर किस प्रकार पड़ता है। जिस बच्चे का जन्म, सामान्य प्रसव से नहीं होता है वह बच्चा जन्मनाल के सम्पर्क में नहीं आ जाता है जिसके कारण उसमें जीवाणु अणुओं के साथ सम्पर्क में न आने की वजह से उसकी इम्यूनिटी कम हो जाती है। ऐसी एक नहीं बल्कि कई अन्य समस्याएं भी होती हैं।
READ: सीजेरियन के बाद पेट पर पड़े निशान को ऐसे मिटाएं

सीजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला का शरीर ज्यादा कमजोर हो जाता है और वह, सामान्य प्रसव की अपेक्षा दो गुना रक्त खो देती है। सामान्य प्रसव में सिर्फ दर्द होता है लेकिन ऑपरेशन से प्रसव होने के बाद महिला का शरीर अंदर से काफी कमजोर हो जाता है, जो कि जीवनपर्यन्त समस्या बन जाती है। ऐसी महिलाओं को अस्थमा, डायबटीज और मोटापे की समस्या हो सकती है।

ऑपरेशन से होने वाले बच्चे को सांस सम्बंधी समस्या हो सकती है। एक शोध में यह बात सामने आई है कि सर्जरी से होने वाले बच्चों में ब्रोनकाईटिस आदि की समस्या ज्यादा होती है। जन्मनाल के माध्यम से न गुजरने के कारण बच्चा, प्राकृतिक रूप से कमजोर हो जाता है, उसकी इम्यूनिटी कम हो जाती है, उसे एलर्जी सम्बंधी समस्या भी जल्दी हो जाती है।

कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि बच्चों का प्रसव, ऑपरेशन से होने पर उनमें मोटापे की समस्या हो जाती है। मां के साथ-साथ बच्चे को भी मोटापे का भय रहता है, उनका वजन ज्यादा हो जाता है। उनकी उम्र के अन्य बच्चों की अपेक्षा वे ज्यादा भारी-भरकम नजर आते हैं। सामान्य प्रसव से पैदा होने वाले बच्चे, ऑपरेशन से पैदा होने वाले बच्चों की अपेक्षा 46 प्रतिशत ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। ऐसे में बच्चे को अप्रत्यक्ष रूप से कई और भी दिक्कतें हो जाती है जिसकी जड़ मोटापा होता है।

उपरोक्त उल्लेखित दो समस्याओं के अलावा भी बच्चों को काफी दिक्कत होती है। टाइप 1 प्रकार की डायबटीज का खतरा भी इस प्रकार के प्रसव की देन हो सकती है। उम्र से पहले ज्यादा उम्र का दिखना जैसी समस्या भी आम बात है। इंसुलिन की मात्रा भी संतुलित नहीं ही रहती है। ऐसे बच्चे, बचपन में इतने कमजोर होते हैं कि उनमें ताउम्र कोई न कोई समस्या बनी ही रहती है।



Click it and Unblock the Notifications
