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कितना सुरक्षित है आपके शिशु के लिए वजाइनल सीडिंग?
आज साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि हर दिन हमें कुछ न कुछ नया सुनने को मिलता है। यह तरक़्क़ी बड़ी बड़ी परेशानियों को चुटकी में हल कर देने वाली होती है। वजाइनल सीडिंग की प्रक्रिया एकदम नयी है लेकिन धीरे धीरे इसका चलन बढ़ रहा है। बोल्डस्काई पर हम अपने पाठकों को समय समय पर नयी नयी जानकारियों से अवगत कराते रहते हैं। आज भी हम आपके लिए कुछ ऐसी ही नयी जानकारी लेकर आएं है और हमारा विषय है, वजाइनल सीडिंग। तो आइए जानते हैं आखिर क्या है वजाइनल सीडिंग।
वजाइनल सीडिंग
जब बच्चा सी-सेक्शन से पैदा होता है तो ऐसे में माँ से कई तरह के बैक्टीरिया बच्चे में आ जाते हैं और कुछ बैक्टीरिया बाहरी वातावरण से। इस परिस्थिति में माँ से निकला तरल पदार्थ शिशु को इस तरह के बैक्टीरिया से बचाता है यानी जन्म के समय मां के वजाइना से जो तरल पदार्थ निकलता है, उसमें ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो बच्चे में बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं। इस तरल पदार्थ को बच्चे के शरीर पर लगा दिया जाता है।

सामान्य तरीके से जन्म लेने वाले बच्चों की तुलना में सी-सेक्शन द्वारा जन्मे बच्चों का इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है इसलिए आजकल वजाइनल सीडिंग की मांग काफी बढ़ गयी है क्योंकि इस पदार्थ में कई अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

कैसे होता है वजाइनल सीडिंग?
यह प्रक्रिया बहुत ही आसान है। नार्मल डिलीवरी में बच्चे पहले से ही माँ के वजाइना से निकलने वाले तरल पदार्थ से ढका रहता है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया है। लेकिन सी-सेक्शन में ऐसा नहीं होता सी-सेक्शन द्वारा पैदा होने वाले बच्चों को यह तरल पदार्थ रुई की मदद से उनके मुँह, नाक और त्वचा पर लगा दिया जाता है।
डॉक्टर्स का मानना है कि नार्मल डिलीवरी वाले बच्चों को यह तरल पदार्थ कम से कम साल भर तक बीमारियों से दूर रखता है जबकि सी-सेक्शन वाले बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं।

क्यों की जाती है वजाइनल सीडिंग?
सी-सेक्शन से जन्मे बच्चे कई तरह के बुरे माइक्रोब्स के संपर्क में आ जाते हैं जैसे स्टाफीलोकोकी और क्लॉस्ट्रीडियम डिफिसील। जबकि नार्मल डिलीवरी वाले बच्चे अच्छे बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं जैसे लैक्टोबैसिलस और प्रीवोटेला। इस तरह के अच्छे बैक्टीरिया बच्चे को पेट और सांस से जुड़ी बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं और सी-सेक्शन से पैदा हुए बच्चों को इन्हीं अच्छे बैक्टीरिया के संपर्क में लाने का वजाइनल सीडिंग एक बेहतर जरिया है।

वजाइनल सीडिंग के फायदे
शोधकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि बच्चों के लिए वजाइनल सीडिंग बेहद फायदेमंद होता है। जन्म के समय जिन बच्चों को प्राकृतिक रूप से सारी चीज़ें नहीं मिल पाती है, वजाइनल सीडिंग उन्हें वह सब कुछ प्राप्त कराता है ताकि वह लंबे समय तक स्वस्थ रह सकें। शोधकर्ताओं का मानना है कि नार्मल डिलीवरी वाले बच्चों को जानलेवा बीमारियों का खतरा कम होता है। वहीं सी-सेक्शन वाले बच्चों में इस बात का ख़तरा ज़्यादा होता है।

वजाइनल सीडिंग में रिस्क
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं एक अच्छा और दूसरा बुरा। ठीक इसी प्रकार वजाइनल सीडिंग के अगर कुछ फायदे हैं तो इसके नुकसान भी हैं। माँ के वजाइना से निकलने वाले तरल पदार्थ में जहां एक ओर अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, वहीं कुछ बुरी चीज़ें भी होती हैं जैसे पैथॉजेन जो आपके नवजात शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा इस प्रक्रिया को बहुत ही सावधानी से करना चाहिए। ज़रा सी चूक इन्फेक्शन का कारण बन सकती है जो बच्चे के लिए किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं होता।

क्या आपको वजाइनल सीडिंग चुनना चाहिए?
हालांकि यह अभी एकदम नया है लेकिन ज़्यादातर मां अपने बच्चे की भलाई के लिए इसका चुनाव करना चाहती हैं। अगर आप सी-सेक्शन द्वारा बच्चे को जन्म देने वाली हैं तो ऐसे में आप वजाइनल सीडिंग चुन सकती हैं लेकिन ध्यान रहे किसी भी तरह की लापरवाही न हो। नहीं तो यह आपके बच्चे के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
हालांकि वजाइनल सीडिंग को लेकर अभी भी अध्ययन जारी है इसलिए इस बात की पूरी गारंटी नहीं दी जा सकती कि आपका बच्चा इससे स्वस्थ रहेगा। बेहतर यही होगा कि आप अपने बच्चे पर पूरा ध्यान दें और उसे स्तनपान ही करवाएं क्योंकि किसी भी तरह के इन्फेक्शन से लड़ने की ताकत उसे आपके दूध से ही मिलेगी।



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