Latest Updates
-
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
गर्भावस्था में मां के मूड को भांप लेते हैं शिशु

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन के शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि मां की मनोदशा शिशु को जन्म देने के पहले और बाद में स्थिर रहती है, तो ऐसी स्थिति में परीक्षण में शिशुओं की मानसिक और मांसपेशियों की क्षमता बेहतर रहती है। लेकिन यदि मां की मनोदशा में बदलाव होता है। चाहे वह खुशमिजाज से तनाव की अवस्था में या फिर तनाव से खुशमिजाज अवस्था में आती है तो शिशुओं के बेहतर नतीजे नहीं आ पाते हैं।
अध्ययन से पता चलता है कि नवजात का मस्तिष्क गर्भावस्था के दौरान अपनी मां की मनोवैज्ञानिक स्थिति के समान ही मनोदशा की स्थिति में रहता है। इसका असर जन्म के बाद बच्चों के शरीर के विकास पर भी पड़ता है। अध्ययन के अनुसार गर्भावस्था के दौरान मां के तनाव का सामना करने वाला शिशु बाद की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से झेलता है। जर्नल साइकोलाजिकल साइंस में प्रकाशित शोध के मुताबिक 221 महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया।



Click it and Unblock the Notifications