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क्या प्रेगनेंट महिलाओं के लिए अच्छा है तिल का तेल?
प्रेगनेंसी महिलाओं की जिंदगी का एक खूबसूरत एहसास होता है। यह वह समय होता है जब उन्हें दो के बारे में सोचना और काम करना पड़ता है। इस समय चूंकि बच्चे का आहार मां पर निर्भर रहता है, इसलिए इस बात का काफी ध्यान रखना पड़ता है कि मां को सभी जरूरी विटामिन और पौष्टिक तत्व मिले।
प्रेगनेंसी के दौरान तिल के तेल को लेकर विवाद की स्थिति रहती है। तिल आइरन, पोटैशियम और कैल्सियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत है, पर साथ में यह भी कहा जाता है कि इससे प्रेगनेंसी के दौरान मिसकरेज सहित कई खतरे होते हैं। ऐसे महिलाओं को तिल का तेल लेने की मनाही है जिन्हें एलर्जी हो या फिर पहले कभी प्रीटर्म लेबर हुआ हो। हालांकि वे महिलाएं जो कब्ज से ग्रस्त हो और जिन्हें पौष्टिक तत्व की जरूरत हो, वे तिल का तेल ले सकती हैं।
पैसिव स्मोकिंग से भी भ्रूण पर पड़ता है बुरा असर
प्रेगनेंट महिलाओं पर तिल के तेल का असर इस बात पर निर्भर करता है कि उनका स्वास्थ कैसा है और वह कितनी मात्रा में इस तेल का सेवन कर रही है। तो क्या तिल का तेल प्रेगनेंसी के लिए अच्छा है? यह एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब हम यहां जानने की कोशिश करेंगे। इसके लिए हम गर्भवती महिलाओं पर तिल के तेल के अलग—अलग प्रभाव पर विचार करेंगे।

मिसकरेज : भारत के कुछ हिस्सों में तिल के तेल को गुड़ के साथ मिलकर इसका इस्तेमाल गर्भपात के लिए किया जाता है। इसलिए जब आप अपनी नानी—दादी से पूछेंगी कि क्या प्रेगनेंसी के दौरान तिल का तेल ठीक रहता है तो वह कहेंगी नहीं। खासकर पहले तीन महीने में।
एलर्जी : तिल के तेल में सल्फर और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है। चूंकि प्रेगनेंसी के दौरान इम्यून सिस्टम असुरक्षित होता है, ऐसे में इससे एजर्ली का खतरा रहता है। इसलिए अगर आप एलर्जिक हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान आपके लिए तिल का तेल ठीक नहीं है।
हॉट फूड : आयुर्वेद के अनुसार तिल का तेल गर्म खाद्य पदार्थ की श्रेणी में आता है। यह शरीर को अंदर से गर्म करता है जिससे भ्रूण का विकास प्रभावित होता है। यानी कि एक बार फिर हमारे सवाल का जवाब नहीं में है।
हार्मोन को प्रेरित करना : तिल का तेल हार्मोन को प्रेरित करता है। इससे गर्भाशय सिकुड़ सकता है, जिससे प्रीटर्म लेबर या मिसकरेज का खतरा बढ़ जाता है। यह एक मुख्य वजन है जिससे प्रेगनेंट महिलाएं तिल के तेल के सेवन को लेकर दुविधा में रहती है।
गर्भाशय का सिकुड़ना : चूंकि तिल का तेल हार्मोन को प्रेरित करता है, इससे गर्भाशय सिकुड़ सकता है। खतरा तब ज्यादा होता है जब आप प्रेगनेंट हों। यानी कि प्रेगनेंट महिलाओं को तिल के तेल से दूर रहना चाहिए।
जरूरी पौष्टिक तत्व : तिल का तेल आइरन, पोटैशियम और कैल्सियम से भरा होता है। साथ ही इसमें विटामिन ए और बी भी होता है। अगर किसी प्रेगनेंट महिला को पौष्टिक तत्वों की जरूरत है तो उन्हें तिल का तेल दिया जा सकता है।
प्रीमैच्योर ब्लीडिंग : तिल के तेल में हार्मोन को संतुलित करने का गुण पाया जाता है। इससे यह प्रेगनेंट महिलाओं में प्री—मैच्योर ब्लीडिंग रोकने में मददगार साबित होता है। अगर सही मात्रा में लिया जाए तो प्रेगनेंसी के दौरान तिल का तेल लेना अच्छा रहता है।
कब्जियत को दूर करे : प्रेगनेंट महिलाओं में कब्जियत की समस्या आम बात है। तिल के तेल में बड़ी मात्रा में फाइबर पाया जाता है जिससे इस समस्या से निपटने में मदद मिलती है। यानी कि यहां प्रेगनेंसी के दौरान तिल के तेल का इस्तेमाल करना अच्छा रहता है।



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