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प्रेगनेंसी में ना करें हॉट टब का इस्तेमाल, हो सकता है गर्भपात
अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं या फिर आप प्रेगनेंट हैं तो लोग आपको कई तरह की सलाह देने लगते हैं। इन्हीं में से एक है प्रेगनेंसी के दौरान हॉट टब का इस्तेमाल। जी हां, इस अवस्था में आपको हॉट टब का इस्तेमाल करने से रोक दिया जाता है क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा होता है।
यहां तक कि डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी में इसका प्रयोग करने से मना करते हैं। इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण शरीर के तापमान से जुड़ा हुआ है। एक शोध के अनुसार शरीर का बढ़ा हुआ तापमान खासतौर पर पहली तिमाही में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की संभावना को बढ़ा देता है।

ऐसा तब भी संभव है जब प्रेगनेंसी में आपको लगातर बुखार की समस्या हो रही होती है। कई तरह के अध्ययनों ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रेगनेंसी के शुरूआती दौर में हॉट टब का इस्तेमाल करने से न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के अलावा गर्भपात भी हो सकता है।
यही कारण है कि प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती स्त्री के शरीर का तापमान 101 डिग्री फॉरेन्हाइट से ऊपर नहीं होना चाहिए। हॉट टब में बीस मिनट तक रहने से शरीर का तापमान 102 डिग्री तक बढ़ जाता है।

क्या वास्तव में हॉट टब से गर्भपात हो जाता है?
2003 में हुए एक अध्ययन के अनुसार गर्भवस्था में हॉट टब के इस्तेमाल से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इस अध्ययन से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि पहली तिमाही में हॉट टब का लगातार प्रयोग करने से गर्भपात का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। इस तरह की स्थिति से बचने के लिए आप कम तापमान वाले हॉट टब का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे दस मिनट से ज़्यादा आप इसका इस्तेमाल न करें। कुछ अध्ययनों के अनुसार जकूज़ी और हॉट टब का इस्तेमाल न करने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा कम होता है।

किस तिमाही में गर्भपात का खतरा ज़्यादा होता है?
पहली तिमाही में बच्चे के शरीर के अंग पूरी तरह से बने नहीं होते इसलिए नियंत्रित परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल ठीक है। हालांकि दूसरे और तीसरे तिमाही में स्थिति बिल्कुल अलग होती है। तीसरे तिमाही के दौरान आप हॉट बाथ ले सकती हैं लेकिन आपको सॉना, जकूज़ी और हॉट टब से बचना चाहिए ताकि इनकी गर्माहट से हार्ट रेट न बढ़ जाए। साथ ही ब्लड सर्कुलेशन और फ्लो दोनों अच्छी तरह से विनयमित हो।
गर्भावस्था के शुरूआती दौर में हालांकि शिशु के शरीर के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं होते लेकिन उनका ब्रेन बहुत ही तेज़ गति से विकसित होता है इसलिए ज़्यादा गर्माहट के कारण बच्चे को जन्म दोष होने का खतरा रहता है।

क्या हॉट टब से बर्थ डिफेक्ट संभव है?
शोध के अनुसार गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में हॉट टब और सॉना का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं ऐसे बच्चों को जन्म देती है जिनमें ब्रेन से जुड़ी या स्पाइना बिफिडा की समस्या होती है। इस तरह की स्थिति में यह संभावना तीन गुना तक ज़्यादा बढ़ जाती है।

एहतियाती उपाय
हॉट बाथ हॉट टब की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित माना गया है। हॉट टब तापमान को बरकार रखता है, वहीं हॉट बाथ में पानी जल्द ही ठंडा हो जाता है। हालांकि आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि हॉट बाथ में भी पानी ज़्यादा गर्म न रहे।



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