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प्रेगनेंसी में मिर्गी तो रखे एक्स्ट्रा ख्याल, अजन्मे बच्चे के लिए है खतरनाक
मां बनना हर महिला के जीवन के खूबसूरत ख्वाबों में से एक होता है, जब किसी महिला को मालूम होता है कि अब वो अपने इस सपने को जीने वाली है तो उसके लिए दुनिया का सबसे खुशी का लम्हा होता है। सुखद गर्भावस्था की कामना हर महिला करती है। लेकिन कुछ महिलाओं के लिए उनका गर्भावस्था उतना आसान नहीं होता है जितना भी सोचती है। अक्सर कई तरह के संक्रमण और बीमारियों के वजह से गर्भावस्था प्रभावित होता है। इसी में से एक है एपिलेप्सी यानी मिर्गी। हालांकि जो महिलाएं मिर्गी की समस्या से गुजरती है उनके गर्भधारण करने में तो कई समस्या नहीं आती है लेकिन उनका गर्भावस्था थोड़ा मुश्किलों भरा जरा होता है।
इस बात से हालांकि कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है कि वो प्रेगनेंसी से पहले ही मिर्गी की शिकायत थी या प्रेगनेंसी के दौरान उन्हें मिर्गी की शिकायत होने लगी। दरअसल मिर्गी की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान हो या पहले से ही लेकिन समस्याएं जटिल हो सकती है।
आज हम इस आर्टिकल में बता रहे है कि कैसे प्रेगनेंसी के दौरान मिर्गी आपको प्रभावित कर सकती है और कैसे आप इस समस्या से खुद का बचाव कर सकते है।

क्या है मिर्गी या एपिलेप्सी?
ये एक तरह की कंडीशन है, जिसमें ब्रेन में नर्व सेल्स क्षीण हो जाती है। यह वजह से दौरे आने लगतेे है। हर व्यक्ति में इन दौरों की स्थिति और आवृति अलग-अलग होती है। ये एक तरह की मेडिकल स्थिति होती है जिसका पूरी तरह से इलाज सम्भव नहीं है। हालांकि दवाईयों के जरिए मिर्गी के दौरों की आवृति को जरुर कम किया जा सकता है। यह समस्या महिलाओं और पुरुष दोनों को हो सकती है लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए ये समस्या गर्भावस्था को थोड़ा जटिल बना सकता है।

मिर्गी के वजह से गर्भधारण करने में होती है दिक्कत?
मिर्गी की समस्या आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित नहीं करती है। एक अध्ययन के अनुसार अगर किसी महिला को मिर्गी की समस्या है तो इसके बावजूद भी वो मां बनने की पूरी क्षमता रखती है क्योंकि मिर्गी की दवाईयां फर्टिलिटी को बिल्कुल भी प्रभावित नहीं करती हैं। ये अध्ययन महिलाओं के अलग-अलग उम्र के तबकों पर करवाया गया था। जिसमें सामने आया कि सामान्य महिलाओं की तुलना में मिर्गी से पीड़ित महिलाएं भी गर्भवती हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान मिर्गी के लक्षण
मिर्गी की समस्या का निदान आसान है लेकिन इस समस्या को पुख्ता करने के लिए इसकी जांच जरुरी होती है। जो किसी भी लेबोरेटरी में करवाई जा सकती है। बहुत सारे मामलों में तो इसके लक्षण साफ-साफतौर पर नजर आते है।

ऐंठन और थकान
जिन गर्भवती महिलाओं को मिर्गी की समस्या होती है, उन्हें मांसपेशियों की ऐंठन के समान लयबद्ध मांसपेशी में संकुचन महसूस होता है। ये ऐंठन आमतौर पर बहुत निकटता से होते हैं। इसके अलावा हल्का सिरदर्द और थकान सी लगने लगती है।

मेडिकल चैकअप कराएं
प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में अत्यधिक सांस लेने और आपा खोने जैसे लक्षण भी दिखाई देते है। अगर आपके साथ या आपके परिवार में किसी गर्भवती महिला के साथ ये समस्या है तो इन लक्षणों को अवॉइड करने की जगह मेडिकल चैकअप करवाएं।

खतरों की सम्भावनाएं
मिर्गी और गर्भावस्था का जो सबसे स्पष्ट खतरा होता है वो ये है कि दौरे आने पर महिला कभी भी अचेत होकर गिर सकती है। कई बार, अचानक से गिरने से शरीर के अलावा पेट पर भी चोट पहुंच सकती है।

बच्चें पर प्रभाव
गर्भ के अंदर एम्नीओटिक तरल पदार्थ से बच्चे की रक्षा होती है, तथ्य यह है कि अचानक उच्च दबाव पड़ने से भ्रूण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कई बड़े मामलों में, यह आपके अजन्मे बच्चे में आजीवन दुर्बलता या विकलांगता की समस्या भी दे सकती है। इसके अलावा मिर्गी की रोगी गर्भवती महिलाओं को हमेशा यह सलाह दी जाती है कि वे अधिक यात्रा न करें।

बेबी को कैसे नुकसान पहुंचाता है मिर्गी?
सुरक्षा के पहलू से देखा जाएं अगर किसी महिला को बार-बार दौरे आते है तो उन्हें चिंतित होने की बेहद जरुरत होती है। ज्यादातर मामलों में, महिला की गर्भनाल यानी प्लेसेंटा, गर्भाशय की आंतरिक दीवार से अलग हो सकती है। यह स्थिति, जिसे मेडिकल टर्म में 'प्लेसेंटल अब्रप्शन' कहा जाता है, ये आपके अजन्मे बच्चे के लिए भी घातक साबित हो सकती है। यह स्टिलबर्थ के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा इसकी वजह से अजन्में बच्चें में कई तरह के विकार हो सकते है। और अत्यधिक मामलों में, यह गर्भपात का कारण भी हो सकता है

ध्यान रखें इस बात का
मिर्गी से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को अकेले रहने से बचना चाहिए। क्योंकि इन्हें कभी भी मिर्गी का दौरा आ सकता है। इसलिए आपके चारो और कोई न कोई मौजूद रहना चाहिए। मिर्गी रोगी गर्भवती माता का प्रसव सदैव अस्पताल में ही करवाना चाहिए। इससे माता व शिशु दोनों को बेहतर चिकित्सकीय देखभाल मिल पाती है।



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