Latest Updates
-
चेहरे से टैनिंग हटाने के लिए आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिनटों में मिलेगी दमकती त्वचा -
World Heritage Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व धरोहर दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Aaj Ka Rashifal 18 April 2026: मिथुन, तुला और कुंभ के लिए आज बड़ा दिन, जानें मेष से मीन तक का हाल -
Akshaya Tritiya 2026 Daan: अक्षय तृतीया पर इन 5 चीजों का करें दान, कभी नहीं होगी अन्न और धन की कमी -
World Hemophilia Day 2026: हीमोफीलिया क्या है? जानें इस बीमारी के कारण, लक्षण और इलाज -
Shukra Gochar 2026: अक्षय तृतीया पर शुक्र का गोचर बदलेगा इन 4 राशियों का भाग्य, बाकी के लिए जानें उपाय -
Akshaya Tritiya Wishes In Sanskrit: इन संस्कृत श्लोकों के जरिए अपनो को दें अक्षय तृतीया की बधाई -
गर्मियों में लू और डिहाइड्रेशन से से बचने के लिए पिएं ये 5 समर ड्रिंक्स, चिलचिलाती गर्मी में भी रहेंगे कूल-कूल -
2026 में टूटेगा गर्मी का हर रिकॉर्ड? बाबा वेंगा की ये भविष्यवाणी हुई सच तो फेल हो जाएंगे AC-कूलर -
Heatwave In India: गर्मी और लू से लग गए हैं दस्त? आजमाएं ये 5 देसी नुस्खे जो दिलाएंगे तुरंत आराम
प्रेग्नेंसी में मीठा खाने के बाद जरुर करें ब्रश, वरना पेट में पल रहे शिशु को हो सकता है ये संक्रमण
प्रेगनेंसी हर महिला के जीवन में बहुत ही नाजुक पल होता है। इस समय शरीर में कई बदलाव होते हैं और इस दौरान वह कई जटिल शारीरिक बदलावों से गुजरती है। अगर इन बदलावों का ढंग से ध्यान न रखा गया तो उस का प्रभाव पेट में पल रहे शिशु पर पड़ता है। इन में से एक है दांतों की देखभाल। क्या आप को पता है कि दांतों की खराब देखभाल से आप की गर्भावस्था को नुकसान हो सकता है। गर्भधारण करने के बाद आप के दांतों की देखभाल सिर्फ आप तक सीमित नहीं रहती। यह आप के गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी महत्वपूर्ण है।
एक अध्ययन के मुताबिक स्वीडन के विशेषज्ञों ने पश्चिम आस्ट्रेलिया में 3400 गर्भवती महिलाओं से जुडे़ डेटा का विश्लेषण किया। विशेषज्ञों ने जांच की कि मसूड़े से जुड़ी समस्याओं का गर्भावस्था के नतीजों पर क्या असर पड़ता है। उन्होंने अध्ययन में पाया कि जिन महिलाओं को मसूड़ों की समस्या है उन्हें गर्भधारण करने में उन महिलाओं के मुकाबले 6 महीने का अधिक समय लगा जिन्हें मसूड़ों की समस्या नहीं थी।

प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस
प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस, गर्भावस्था के पहली तिमाही के दौरान होता है, इसमें दांतों में सूजन, लालिमा नजर आना, फूलापन, मसूड़ों से खून आना जैसी समस्याएं होने लगती है। कुछ मामलों में मसूड़े सूज जाते हैं और प्रेगनेंसी जिंजिवाइटिस से पीड़ित होती है। वे इरीटेंट्स के कारण बड़ी गांठ बना सकते हैं। ये गांठें या बढ़कर गांठों का रुप ले लेती हैं, जिन्हें प्रेगनेंसी ट्यूमर भी कहा जाता हैं। इन गांठों से घबराने की जरुरत नहीं होती है सामान्यत: इनमें दर्द नहीं होता है। ये शिशु के जन्म के बाद प्रायः गायब हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इन्हें दांतों के सर्जन, जैसे कि पेरियोडोंटिस्ट कहलाने वाले मसूड़ों के उपचार के विशेषज्ञ द्वारा हटाए जाने की जरूरत पड़ सकती है, अपने मसूड़ों को पूरी तरह स्वस्थ बनाए रखना, गर्भावस्था से जुड़ी ऐसी पेरियोडोंटल समस्याओं से बचाव के सर्वोत्तम तरीका है। महिलाओं में परिसंचारी यौन हार्मोन-एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन की सांद्रताएं बढ़ना गर्भावस्था से जुड़ी परियोडोन्टल समस्याओं का कारण होता है। परियोडोन्टस रोग जैव शारीरिक द्रवों का स्तर बढ़ाते हैं जो प्रसव पीड़ा उत्पन्न करते हैं। योनि मार्ग से उपर जाते हुए मार्ग से भ्रूण तक संक्रमण नहीं पहुंचता बल्कि यह रूधिर प्रवाह में प्रवेश करते हैं और मुख व गुहा से नीचे जाते हैं।

पूर्व प्रसव होने का खतरा
अध्ययनों से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान पेरियोडोन्टल रोग से पीड़ित महिलाओं में समय पूर्व प्रसव (37 सप्ताह से पहले) या कम वजन (2.5 किलोग्राम से कम) का खतरा भी हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान पेरियोडोन्टाइटिस का उपचार करने से समय पूर्व प्रसव के जोखिमको टाला जा सकता है।

प्रेग्नेंसी ओरल हैल्थ को सुधारने की खास बातें
प्रेगनेंसी के दौरान दांतों का ध्यान रखने के लिए खानपान का सही ध्यान रखें। जितना अधिक आप स्नैक्स खांएगी उतना ही अधिक दांतों का नुकसान बना रहेगा। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान दांतों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया गर्भस्थ शिशु तक पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकता हैं। इसलिए इस समय अपने खानपान को लेकर विशेष रूप से सजग रहें। ओरल हेल्थ को सुधारने और मुंह की साफ-सफाई पर ध्यान देने की सलाह देने से मां से शिशु तक ऐसे बैक्टीरिया पहुंचने की सम्भावना कम हो जाती है।

मीठा न खाएं
चीनी युक्त स्नैक्स खाने से बचने की कोशिश करें व कुछ खाने के बाद हर बार अच्छी तरह पानी से कुल्ला करके मुंह को साफ करें।दूध, पनीर, दही व अन्य डेयरी उत्पादों से युक्त स्वास्थ्यप्रद आहार, अनिवार्य खनिज तत्वों का प्रमुख स्रोत होता है।

सावधानी पूर्वक दांत साफ करें
- दांतों को सावधानीपूर्वक साफ कर के और ब्रश करने की सही विधि से प्लाक (दांतो पर जमने वाला खराब पदार्थ) को हटाने से दांतों से होने वाली कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
- गर्भावस्था के दौरान दांतों की समस्याओं का पता लगाने व इलाज करने के लिए दांतों का चैकअप बहुत जरूरी है। साथ ही अपने दंत चिकित्सक को यह बताना न भूलें कि आप गर्भवती हैं, ताकि उस के अनुसार इलाज किया जा सके।

प्रेग्नेंसी में कब न करें दांतों का इलाज
गर्भावस्था के शुरुआती पहली तिमाही के दौरान दांतों के उपचार से बचना चाहिए क्योंकि यह शिशु की वृद्धि व विकास के लिए महत्वपूर्ण समय होता है। दूसरी तिमाही के दौरान नियमित इलाज किया जा सकता है। लेकिन दांतों के इलाज की ऐसी सभी प्रक्रियाओं को प्रसव पश्चात तक के लिए टाल देना चाहिए, जो टाली जा सकती हों। गर्भावस्था के दौरान दांतों का एक्स रे कराने से भी बचना चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications











