Latest Updates
-
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग
न्यू बोर्न बेबी के साथ को-स्लीपिंग कितनी सेफ है? जानें यहां
जब एक कपल पैरेंट बनता है तो वह अपने नवजात शिशु का सबसे अधिक ध्यान रखना चाहता है। हालांकि, हर पैरेंट का अपना अलग पैरेंटिंग स्टाइल होता है। जहां कुछ पैरेंट्स अपने शिशु को पालने में सुलाना पसंद करते हैं, वहीं कुछ पैरेंट अपना बेड बेबी के साथ शेयर करते हैं। जिसे को-स्लीपिंग कहा जाता है। कुछ पैरेंट्स को यह अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित लगता है।
लेकिन पिछले कुछ वक्त से को-स्लीपिंग को लेकर लोगों में मतभेद है। अधिकतर पैरेंट्स को बच्चे को अपने साथ सुलाना बेहद ही सामान्य लगता है। लंबे समय में हम इसे अपने घर में देखते आए हैं। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि बच्चे को साथ सुलाने से उसकी सेहत पर विपरीत असर भी पड़ सकता है।
आपको शायद जानकर हैरानी हो, लेकिन शिशुओं के साथ एक ही बिस्तर पर सोने से कई बार उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। जिसे सडन अनएक्सपेटेड डेथ इन इंफेसी अर्थात् एसयूडीआई कहा जाता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको को-स्लीपिंग के कुछ साइड इफेक्ट्स के बारे में बता रहे हैं-

नवजात के साथ क्या को-स्लीपिंग सुरक्षित है?
नवजात के साथ एक ही बेड पर सोना सुरक्षित नहीं माना जाता है। हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि एक साथ सोना नवजात शिशु के लिए सुरक्षित नहीं है। दरअसल, जब वे वयस्कों के साथ सोते हैं तो इससे उन्हें चोट लगने, सांस लेने में समस्या, दम घुटने, आदि का खतरा हो सकता है। चूंकि बच्चों के अंग विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए वयस्कों के बीच सोने पर उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है।
अचानक मौत का बढ़ता है खतरा
सुनने में आपको शायद अजीब लगे, लेकिन कई बार नवजात के साथ एक ही बेड शेयर करने से उसकी अचानक मौत का खतरा काफी बढ़ जाता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स भी नवजात के साथ बेड शेयर ना करने की सलाह देते हैं। कुछ स्थितियों में तो नवजात को को-स्लीपिंग नहीं करनी चाहिए, इससे रिस्क फैक्टर काफी बढ़ जाता है-
• बच्चा चार महीने से कम का है
• बच्चे का जन्म समय से पहले हो गया हो
• बच्चा छोटा और कम वजन का है
• माता-पिता में से कोई एक धूम्रपान करता है या शराब पीता है
• अत्यधिक थके हुए व्यक्ति के साथ सोना, जिससे सोते समय बच्चे को नुकसान हो सकता हैै।
• अगर व्यस्क को मुंह पर कंबल ढककर सोने की आदत हो, जिससे शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में समस्या हो सकती है।
• आपके पास पालतू जानवर हैं और वे आपके बिस्तर पर रहते हैं, इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
को-स्लीपिंग के अन्य नुकसान
अगर नवजात शिशु और पैरेंट्स एक ही बेड शेयर करते हैं तो इससे अन्य भी कई नुकसान हो सकते हैं-
• एक साथ सोने से बच्चे और माता-पिता दोनों के लिए बाद में अलग-अलग सोना चैलेंजिंग हो सकता है।
• माता-पिता को बच्चे की हरकतों या आवाज़ों से नींद में खलल का अनुभव हो सकता है।
• सोते समय गलती से हाथ लगने या अन्य कारणों से शिशु को चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है।
• एक साथ सोने से बच्चे की नींद का पैटर्न इनकंसिस्टेंट हो सकता है, जिससे उनके लिए खुद को शांत करना और बेहतर तरीके से सोना मुश्किल हो सकता है।
• एक साथ सोने से बच्चे की निर्भरता माता-पिता की उपस्थिति पर बढ़ जाती है, जिससे बच्चे के बड़े होने पर सोने में कठिनाई हो सकती है।
को-स्लीपिंग से जुड़े सेफ्टी टिप्स
ऐसे बहुत से पैरेंट्स हैं, जो बच्चे के साथ सोना ही पसंद करते हैं। दरअसल, इससे मां के लिए बेबी को ब्रेस्टफीड करवाना काफी आसान हो जाता है। साथ ही, इससे बच्चे को एक गर्माहट महसूस होती है और पैरेंट्स व बेबी के बीच का बॉन्ड मजबूत होता है। अगर आप भी को-स्लीपिंग को अच्छा मानते हैं तो आपको कुछ सेफ्टी टिप्स को जरूर फॉलो करना चाहिए-
• अपने बच्चे को उसकी पीठ के बल सुलाएं। उसे कभी भी उसके पेट या बाजू के बल ना सुलाएं। इससे उन्हें सही तरह से सांस लेने में मदद मिलती है।
• बिस्तर साझा करते समय बच्चे को न लपेटें और ना ही अपना कम्बल शेयर करें। अगर जरूरत हो तो आप उसे अलग से छोटा कम्बल पहना सकती हैं।
• हमेशा सुनिश्चित करें कि गद्दा सख्त और सपाट हो।
• अगर आपके लंबे बाल हैं तो उन्हें बांध लें। ऐसी सभी चीजें हटा दें, जिनसे दम घुटने का खतरा हो सकता है।
• सुनिश्चित करें कि आपका शिशु बिस्तर से ना गिरे। अगर आपको बेबी के गिरने का डर है, तो ऐसे में आप फर्श पर गद्दे बिछाकर सोने पर विचार करें।



Click it and Unblock the Notifications
