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मौत को लेकर सवाल करता है बच्चा तो उसे डांटने की जगह यूं दें जवाब
बच्चे बहुत ही मासूम होते हैं और इसलिए छोटी से छोटी बात का भी उन पर बहुत गहरा असर हो सकता है। ऐसे में जब भी बच्चों से किसी विषय पर बात की जाती है तो बहुत ही संभलकर बात करना जरूरी हो जाता है। छोटी उम्र में कई बार बच्चे कुछ ऐसी चीजें देखते हैं, जिनके बारे में उन्होंने पहले कभी भी सुना या देखा होता है। मसलन, अगर घर में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो बच्चों के मन में सवालों का सैलाब आ जाता है।
अक्सर हम बच्चे को कहते हैं कि दादाजी अब तारे बन गए हैं या फिर नानी भगवान के पास चली गई हैं। ऐसे में बच्चे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हो पाते हैं। वे अक्सर पूछ ही लेते हैं कि नानी वापिस कब आएंगी या फिर दादाजी तारे किस तरह बन गए। ऐसे में समझ में नहीं आता है कि बच्चे को किस तरह समझाया जाए या फिर डेथ के बारे में किस तरह बताया जाए। आमतौर पर, लोग बच्चे को डांटकर या फिर इधर-उधर की बातें करके उसे चुप कराने की कोशिश करते हैं। हालांकि, आपको ऐसा करने से बचना चाहिए। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि आप बच्चे से डेथ के बारे में किस तरह बात की जाए-

रहें स्पष्ट
जब आप बच्चे से किसी की मौत के बारे में बात करते हैं तो यह बेहद जरूरी है कि आप उससे घुमा-फिराकर कुछ ना कहें। आप उनकी उम्र के अनुसार शब्दों का चयन करें। हालांकि, उस दौरान आपके शब्द स्पष्ट होने चाहिए। मसलन, आप छोटे बच्चे को बता सकते हैं कि जब कोई मर जाता है, तो उनका शरीर काम करना बंद कर देता है, और वे कुछ भी महसूस नहीं कर पाते हैं। आप उनसे सो गए या चले गए जैसे शब्दों का इस्तेमाल ना करें, क्योंकि इससे बच्चे के मन में सोने को लेकर डर पैदा हो सकता है
सवालों का दें जवाब
जब बच्चे की आंखों के सामने किसी प्रियजन की मौत होती है तो उसके मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। अक्सर बच्चे जब इन सवालों को पूछते हैं तो उन्हें चुप करवा दिया जाता है। हालांकि, आपको ऐसा करने से बचना चाहिए। उन्हें सवाल पूछने दें। इससे आपको उनकी समझ के स्तर को समझने और साथ ही साथ उनकी चिंताओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है। आप इस बात को समझें कि बच्चों की उम्र और व्यक्तिगत के आधार पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं और प्रश्न हो सकते हैं।
किताबों या कहानियों का करें इस्तेमाल
कई बार ऐसा होता है कि हमें समझ में नहीं आता है कि हम बच्चे से मौत को लेकर किस तरह बात करें या फिर उन्हें किस तरह समझाएं। ऐसे में आप कुछ किताबों, कहानिंयों, फिल्मों या फिर अन्य मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे बच्चे के लिए मौत की अवधारणा को समझने में मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं, इससे आपके लिए भी मौत की चर्चा उनके साथ करना अधिक आसान हो जाएगा।
सही हो समय और स्थान
बच्चों से मौत के बारे में बात करना एक बहुत ही सेंसेटिव मुद्दा है। इसलिए, जब भी आप बच्चे से मौत को लेकर बात करें तो समय और स्थान सही होना चाहिए। आप एक शांत जगह चुनें, जहां पर बच्चा प्रश्न पूछने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में सहज महसूस करे। साथ ही आप यह भी सुनिश्चित करें कि आपके पास बिना किसी रुकावट के बात करने के लिए पर्याप्त समय हो।
लें प्रोफेशनल हेल्प
कई बार ऐसा होता है कि आपके लिए बच्चे को समझा पाना काफी मुश्किल होता है या फिर आप जो बच्चे को कहते हैं, वह उसे सही ढंग से नहीं समझ पाता। हो सकता है कि वह किसी अपने के जाने के दुख से जूझ रहा है और उससे निपटने में कठिनाई हो रही है, तो ऐसे में सबसे अच्छा होता है कि किसी प्रोफेशनल काउंसलर या थेरेपिस्ट की मदद ली जाए। ये काउंसलर बच्चों के साथ काम करने में माहिर होते हैं और उन्हें बेहतर तरीके से हैंडल कर पाते हैं।



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